दीर्घायु कामना को उग्र बीवी!

01-11-2019

दीर्घायु कामना को उग्र बीवी!

डॉ. अशोक गौतम

एक समय वह भी था जब बीवी मेरी दीर्घायु की कामना बिना बताए कर लेती थी, जब भी मौक़ा लगता था कर लेती थी। मेरी दीर्घायु की कामना अहसान जताए बिना ही कर लेती थी। कभी पता ही नहीं लगने देती थी कि वह मेरी दीर्घायु की कामना कर रही है। पर अब जबसे रिटायर हुआ हूँ, लगता है उसे मेरी दीर्घायु की कामना करने का वक़्त ही नहीं लगता हो जैसे। जब देखो मंदिर जाकर भी कुछ और ही माँगने में व्यस्त!

इधर अबके उसने करवा चौथ का व्रत एक बार फिर मेरी दीर्घायु की कामना के लिए रखने की योजना मुझे बताई तो मेरा कलेजा बाहर निकल फ़र्श पर गिरते-गिरते बचा। मरता मन एक बार फिर बाग़-बाग़ हुआ। लगा, सरकार की नज़रों में मैं भले ही बेकार हो गया हूँ पर उसकी नज़रों में मैं अभी भी कार का बंदा हूँ। नज़र-नज़र का अंतर है भाई साहब! सरकार तो बंदे ही जनता की सेवा के लिए बेकार के चुनती है। सारा दिन बस नौकरी में आते ही हाथ पर हाथ धरे दस से शाम के पाँच बजा देते हैं। पर क्या मजाल जो तनिक हाथ इधर-उधर कर लें। हाथ पर हाथ धरे हाथ जाम हो जाएँ तो जाम हो जाएँ। 

करवा चौथ का व्रत रखने से एक हफ़्ता पहले ही उसने मुझे मेरी दीर्घायु की योजना बताई। पहले तो उसने इशारों-इशारों में अपनी योजना बताने की कोशिश की पर जब मैं रिटायर मन कुछ समझ न पाया तो उसने साफ़-साफ़, मन ही मन गालियाँ देते हुए बका ज्यों मैं क्लास वन रिटायर न होकर गधा होऊँ, और वह भी निरा। जबकि आज की तारीख़ में घर, देश में निरे गधे गिनती के ही बचे हैं।

“सुनो जी! करवा चौथ सिर पर आ गया है।”
 
“तो क्या हो गया?? सिर पर तो आजकल हर कोई है। ऐसे में वह भी सिर पर आ गया तो उसे भी आने दो। हरेक को सिर पर उठाना अब इस देश की जनता की नियति हो गई है। तुम्हें इसका अपने सिर पर भार लगता हो तो मेरे सिर  पर थमा दो। इसे भी उठा लूँगा।”

“नहीं जी! यह तो मुझे ही अपने सिर पर उठाना होगा।”

“तो??”

मैंने अनसुने से पूछा तो वह तुनकते हुए बोली, “आपकी लंबी उम्र की कामना करना चाहती हूँ अबके भी!” उसके मुँह से सुन मन ख़ुश हो गया कि चलो! साल में एकबार ही सही रिटायरी को लेकर कम से कम बीवी तो चिंतित है। वरना शेष तो हर दिन कभी किचन में तो कभी हाथ में झाड़ू थमाए रखती है मुझे झाड़ू कैसे दी जाती है यह सीखाने के बहाने। कम से कम अभी वह यह तो नहीं सोच रही कि मेरे जाने के बाद सरकार ने फ़ेमिली पेंशन का प्रावधान भी रखा है।

"तो कर लो मेरी लंबी आयु की कामना।"

"अब इस बेकार के काम के लिए वक़्त कहाँ निकल पाता है जानू! सारा दिन टीवी के सामने बैठे-बैठे यों कट जाता है कि पता ही नहीं चलता कि कब सुबह हुई और कब रात के दस बज गए।"

पर मैं मुँह लटकाए! उसे एक बार फिर कि मेरे दिमाग़ को रिटायरमेंट के बाद सच्ची को काठ मार गया है। वरना कौन गधा अपनी दीर्घायु की कामना करने के सवाल पर भी मुँह लटकाए रहे? सो उसने अब सीधे-सीधे बात शुरू की, “सुनो! करवा चौथ को पाँच दिन रह गए। और तुम हो कि. . ."

"तो क्या हो गया? पाँच दिन थोड़े होते हैं क्या? पाँच गुणा चौबीस बोले तो. . ."

"तुम नहीं चाहते कि मैं तुम्हारी लंबी उम्र की कामना करूँ? तुम्हारी दीर्घायु के लिए व्रत रखूँ? कौन मर्द नहीं चाहता कि कम से कम उसकी बीवी तो उसकी दीर्घायु की कामना न करे?"

"तो कर लो! किसने रोका है तुम्हें?"

"तो कामना इन्हीं कपड़ों में हो जाएगी क्या?" 

"क्यों? पुराने कपड़ों में की कामनाओं को भगवान पूरा नहीं करते क्या?"

"पता है साथ वाली के पति अबके अपनी बीवी को करवा चौथ पर अपनी दीर्घायु की कामना के लिए कानों के लिए डायमंड सेट दिला रहे हैं। मैं तो तरस गई तुम्हारी रिटायरमेंट के बाद करवा चौथ पर सुहाग की एक नक़ली हीरे तक की तिल्ली के लिए भी!" कह उसने यों चेहरा बनाया ज्यों. . . आप उस वक़्त उसके चेहरे को देखते तो डर ही जाते। पर मैं भी उस वक़्त उस चेहरे को देख डर गया। क्या यह मेरी बीवी का ही चेहरा है जिसे मैं चौदहवीं का चाँद मान कभी घर लाया था? 

"देखो! उसके पति पुलिस में हैं। वहाँ रिश्वत लेते क़दम-क़दम पर जान का संकट बना रहता है। इसलिए वे जनाब अपनी दीर्घायु की कामना के लिए अपनी बीवी तो क्या, दूसरों की बीवियों तक को कुछ भी दे सकते हैं। अब मैं ठहरा . . . मेरा क्या! कोई मेरी दीर्घायु की कामना करे तो मेरे लिए तब भी ठीक, न करे, तब तो और भी ठीक।"

"मतलब तुम. . . समझा करो जानू प्लीज़! पता नहीं तुम्हें अब कब अक़्ल आएगी? देख रही हूँ रिटायरमेंट के बाद तुम बहुत कंजूस हो गए हो। पहले तो. . ."

"पहले अपनी दीर्घायु की कामना करवाने को माल दूसरों की जेब का होता था और अब वेतन की आधी हो चुकी पेंशन ठहरी।"

"पर फिर भी. . . कामना इज़ कामना डियर! तुम्हें क्या ये अच्छा लगेगा जब मैं इन्हीं कपड़ों में, साल पुराने गले के हार को पहने जो मैं मुहल्ले की ’तन राख का और उस पर सजावटी सामान लाख का’ के साथ चाँद से तुम्हारी लंबी उम्र की कामना करने जाऊँगी? नहीं न! सब कहेंगीं, इसका पति रिटायर क्या हुआ कि..."

अब मैं उसकी पीड़ा समझ गया था। सो  न चाहते हुए भी उससे अपनी दीर्घायु की कामना करवाने के इरादे से पूछा," तो??"

"तो क्या! बाज़ार में अपने पति की दीर्घायु की कामना करने वालियों की अभी से भीड़ होने लगी है। मिसेज़ वर्मा तो कह रहीं थीं कि उसे ज्यूलर्स की शॉप में घुसने को ही दो घंटे लग गए। ऐसे में बेचारी जो चाहती थी, अपने पति की दीर्घायु की कामना के वक़्त को वह चाहकर भी वह नहीं ख़रीद पाई जिसे पहन कर उसे अपने पति की दीर्घायु की कामना करनी है। बोल रही थी, अब उसमें और बाज़ार जाने की हिम्मत नहीं। सो इसे पहन कर जैसे-कैसे भी होगा अपने पति की दीर्घायु की कामना कर लेगी। उसकी कामना को कोई सुने या न!"

"तो??"

"देखो जानू! जो तुम चाहते हो कि मैं मन से तुम्हारी लंबी उम्र की चाँद से कामना करूँ तो प्लीज़! जो मैं चाहती हूँ मुझे वह करने दो। मैं पूरे मुहल्ले की औरतों को बता देना चाहती हूँ कि मेरे पति रिटायर ही हुए हैं कोई. . .  मैं अबके ऐसा सजना-धजना चाहती हूँ कि उनको भी लगे कि नौकरी पेशा मर्दों की ही औरतें अपने मर्दों की क़द्र नहीं करतीं, रिटायर हुओं की औरतें अपने रिटायर हुए पतियों की उनसे भी अधिक क़द्र करती हैं। मैं उन्हें बता देना चाहती हूँ कि नौकरी में रत पति लाख का तो रिटायर हुआ पति सवा लाख का होता है। पर यह तभी हो पाएगा जब. . ."

"तो??" टीवी सिरियलों में मर्दों के डायलॉग सा मेरा डायलॉग।

"तो क्या! तुम भीड़ से बहुत घबराते हो न! कोई बात नहीं। वैसे भी तुम बाज़ार में जाते ही जल्दी-जल्दी मचाने लग जाते हो। मैं अकेले ही भीड़ के बीच तुम्हारी दीर्घायु की कामना के लिए धक्के खा लूँगी। बीवी हूँ न तुम्हारी? तुम मुझे अपना क्रेडिट कार्ड दो बस! तुम्हारे क्रेडिट कार्ड के साथ मैं तुम्हारी दीर्घ आयु की कामना के लिए कहीं भी जा सकती हूँ। हाथ में तुम्हारा क्रेडिट कार्ड लिए मैं तुम्हारे लिए यमराज से तो क्या, यमराज के पापा से भी झाँसी बन लड़-भिड़ सकती हूँ सोलह सिंगार किए। तो ओके डियर! जुग-जुग जिओ मेरे जानू! तुम जिओ हज़ारों साल! साल कि दिन हों दस हज़ार!"

उसने कहा और पड़ोसन को बाज़ार जाने के लिए फोन पर मनाने लगी। उसने सोलह साल की बाली उम्र धारण कर मेरी जेब से क्रेडिट कार्ड ले अवसर से पूर्व मचलते हुए मेरी दीर्घायु, स्वस्थता की कामना की तो मत पूछो उस वक़्त मेरा उसमें मेरे प्रति त्याग समर्पण देख कितना रोना निकल आया। 

उफ़!  देखो तो! आज भी कोई मेरी लंबी उम्र के लिए कितना व्यग्र है, उग्र है? 
अशोक गौतम, 
गौतम निवास, अप्पर सेरी रोड,
 नजदीक मेन वाटर टैंक, सोलन-173212 हि.प्र
 

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