कितना कठिन हो जाता है

15-05-2026

कितना कठिन हो जाता है

अभिषेक पाण्डेय (अंक: 297, मई द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

कितना कठिन हो जाता है 
भाषा का प्रयोग 
जब शब्द हल्के हो जाते हैं 
एक शब्द को काग़ज़ पर बिठाओ 
तो दूसरा ऊपर उठकर हवा में तैरने लगता है 
 
कितना मुश्किल हो जाता है एक कवि के लिए 
जब उसे सौंदर्य और सत्य में से 
किसी एक को चुनना पड़ता है 
बंद फूलों जैसे अपने ही मासूम कानों को 
शब्दों की आग से छेदना पड़ता है 
 
अपने ही शब्दों से लहूलुहान और कीचड़ से सनी हुई 
इस कविता को ढोते हुए 
जब भी वसंत के समय मैं किसी पेड़ के पास से गुज़रता हूँ 
अपना ही कोई शब्द काँटा बनकर मेरे पैर में ज़ोर से चुभता है! 

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