खोज 

अभिषेक पाण्डेय (अंक: 295, अप्रैल द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

खोजता किसी एक को 
कोई एक बार-बार, 
 
नए-नए रूप में 
कहीं छाँह-धूप में 
पर्वतों से चल पड़ा 
खोजने समुद्र-द्वार . . . 
 
कंचन-किरण तजती हुई 
तम-वस्त्र से सजती हुई 
हर दिशा ज्यों कर रही है 
स्वप्न को स्वीकार . . . 
 
अनेक पुष्प-मंडली में 
बज रहा भ्रमर-सितार 
दुख भरा घूँट-ओस 
पी गई हवा विचार 
प्यास मानो कर रही है 
तृप्ति पर परोपकार . . .

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
स्मृति लेख
गीत-नवगीत
कविता - क्षणिका
हास्य-व्यंग्य कविता
कविता - हाइकु
कहानी
बाल साहित्य कविता
किशोर साहित्य कविता
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में