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    ब्रिटेन के प्रसिद्ध लेखक तेजेन्द्र शर्मा का रचना संसार
    ब्रिटेन के प्रसिद्ध लेखक तेजेन्द्र शर्मा का रचना संसार तेजेन्द्र शर्मा जी ब्रिटेन के प्रसिद्ध कहानीकार हैं। उनका नाम ब्रिटेन की ही नहीं अपितु.. आगे पढ़ें
बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात
साहित्य के रंग शैलजा के संग - बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

कहानियाँ

आभासी दुनिया का प्यार

उस व्यक्ति के प्रोफ़ाइल में लगी तस्वीर को देखकर स्नेहा कश्यप काफ़ी आकर्षित हो गई। अत्यंत आकर्षक व्यक्तित्व वाले उस युवक का नाम था – दिवाकर देव।  दिवाकर देव की फ़ेसबुक में अपलोड की हुई उसकी तस्वीरों को देखकर स्नेहा आगे पढ़ें


एक चींटे का फ़्लर्ट

"कागज़ की नाव वाला कॉन्सेप्ट ही नईंच… ये तो प्लास्टिक की नाव है रे… गल कर डूबने का झंझटइच नईं… ए ए आती क्या खंडाला।" चींटे ने ऊँचाई से पुकारा चींटी वैसे समझदार थी। इस मनचले की बातों में उसे आगे पढ़ें


क्वारेंटाइन

मूल कहानी (अँग्रेज़ी): डॉ. नंदिनी साहू  अनुवाद: दिनेश कुमार माली    हर रात जोयिता सोने से पहले ही सोचती थी कि वह औरत क्यों हँसती है, आहें भरती है, चिल्लाती है, ख़ुशियाँ मनाती है, जबकि क्वारेंटाइन के दौरान पूरी दुनिया आगे पढ़ें


जमा-मनफ़ी

पपा के दफ़्तर पहुँचते-पहुँचते मुझे चार बज जाते हैं। वे अपने ड्राइंगरूम एरिया के कम्प्यूटर पर बैठे हैं। अपनी निजी सेक्रेटरी, रम्भा के साथ। दोनों खिलखिला रहे हैं। “रम्भा से आज कुछ भी ठग लो,” मुझे देखते ही पपा अपनी आगे पढ़ें


मरीचिका - 1

(मूल रचना:  विद्याभूषण श्रीरश्मि) धारावाहिक कहानी   1942-46 मेरे पिता वकील थे। पर वकील वे वैसे न थे जैसा मेरी 1962 की अवस्था को देख अनुमान लगाया जा सके। वे बड़े सीधे-सादे आदमी थे, झूठ के नाम से उनका कलेजा आगे पढ़ें


मैं बैठा हूँ न

"हेल्लो... जी, मैं डॉक्टर सुमित राय बोल रहा हूँ।" "सर, मैं मानपुर से जगतसिंह जी का बेटा बोल रहा हूँ।… पिता जी को दिल का दौरा पड़ा है। उन्हें आपके अस्पताल तक लाने की स्थिति नहीं है, आप तुरंत आने आगे पढ़ें


लड़ाई (प्रिया देवांगन ’प्रियू’)

शहर की लड़की थी मीरा, उसकी शादी पास के गाँव मे हुई थी। उसके घर में मीरा, उसके सास-ससुर और उसका पति रहता था। पति दिन भर काम पर चला जाता था। ससुर भी बाहर काम पर चला जाता था। आगे पढ़ें


हास्य/व्यंग्य

कृपया उचित दूरी बनाए रखें!

आरंभ में ही मैं ये बात स्पष्ट कर देना अपना नैतिक कर्तव्य समझता हूँ कि मैं देश का एक सच्चा और ज़िम्मेदार नागरिक हूँ। और अब मेरे बाद कोई भी वैसा होने का दावा ना करे वरना मैं उस पर आगे पढ़ें


कोरोना काल की बदलती दुनिया

जब चीन कोरोना की आढ़त लगाये बैठा था और दुनिया के देशों को खुदरा में इसे दे रहा था तब लोग कह रहे थे कि कोरोना काल में सब कुछ बदल सकता है लेकिन दुनिया नहीं बदल सकती। लेकिन आज आगे पढ़ें


तुम किस खेत की मूली हो?

"धिक्कार है, मूली और भटे का प्रयोग अब साहित्य में भी होने लगा," ना जाने कौन सी ख़बर पढ़ के नत्थू भुनभुनाता हुआ घुस आया। मैंने नत्थू से कहा, "करोना जो न करा दे वो कम है।" "सर जी इसमें आगे पढ़ें


नमः नव मठाधिपतये 

मैंने भी कई बार न लिखते हुए भी लिखते-लिखते नोटिस किया है कि साहित्य की दुनिया में मेरे जैसा, लिखने को उतना बेचैन नहीं दिखता जितना किसी साहित्य के मठ का मठाधिपति होने को आतुर दिखता है। तब मेरे जैसे आगे पढ़ें


माया महाठगिनी हम जानी

माया के तीन रूप होते हैं– कामिनी, कंचन, कीर्ति। इसी में एक माया जब दूसरी माया पर आकर्षित हो गयी तब तो ग़ज़ब होना ही था। यानी एक देवी जी को कीर्ति की यशलिप्सा जाग उठी। इस कीर्ति को पाने आगे पढ़ें


आलेख

नब्बे प्रतिशत बनाम पचास प्रतिशत

प्रतिशत के पीछे भागते पालक   एक समय था जब हमारे 50  प्रतिशत नंबर आते थे तो हम सातवें आसमान पर होते थे। हमारे माता पिता गर्व से कहते थे मेरा बेटा पास हो गया और आज 95 प्रतिशत के आगे पढ़ें


नरनाहर आज़ाद

असहयोग आंदोलन के दौरान जब सत्याग्रही के रूप में बालक आज़ाद पर मुक़दमा चला तो उस मुक़दमे में अदालत के द्वारा पूछे गये प्रश्नों का जिस अंदाज़ और बेबाकी से आज़ाद के द्वारा उत्तर दिया गया वह ख़ुद में इतिहास आगे पढ़ें


बौद्धिक सम्पदा की धनी आरती स्मित

व्यक्तित्व आठ वर्ष पूर्व का वह अभूतपूर्व दिन था जब डॉ. आरती स्मित से पहली बार साक्षात्कार हुआ था। वास्तव में आरती का साक्षात्कार ही था, हिंदू कॉलेज में तब मैं विभाग-प्रभारी था और डॉ. स्मित एक प्रत्याशी। जो-जो सवाल आगे पढ़ें


मेहरून्निसा परवेज के उपन्यासों में नैतिक मूल्यों का द्वंद्व 

स्वतंत्रता के बाद जहाँ मूल्यों में परिवर्तन आया वहीं नैतिक मूल्यों का द्वंद्व भी बढ़ता गया। मेहरुन्निसा परवेज ने अपने उपन्यासों में समाज में व्याप्त समस्याओं को उठाकर नवीन-दृष्टि का परिचय दिया है। मेहरुन्निसा परवेज ने परंपरागत मूल्यों को त्यागकर आगे पढ़ें


समीक्षा

'गीत अपने ही सुनें' का प्रेम-सौंदर्य

पुस्तक: गीत अपने ही सुनें                    कवि: वीरेन्द्र आस्तिक ISBN: 978-81-7844-305-8 प्रकाशक: के के पब्लिकेशन्स, 4806/24, भरतराम रोड, दरियागंज, नई दिल्ली-2         प्रकाशन वर्ष: 2017 पृष्ठ: 128 मूल्य:रु 395/- आगे पढ़ें


क्रांति की मशाल है ’जारी है लड़ाई’

क्रांति की मशाल है ’जारी है लड़ाई’

समीक्ष्य पुस्तक: जारी है लड़ाई लेखक: संतोष पटेल प्रकाशक: नवजागरण प्रकाशन, द्वारका मूल्य: ₹125/- क्रांति परिवर्तन के लिए ज़रूरी है। कवि संतोष पटेल का कविता संग्रह "जारी है लड़ाई" आज मैंने पढ़ा। इन कविताओं को पढ़कर मुझे जो महसूस हुआ, आगे पढ़ें


प्रकृति के सौन्दर्य की चित्रशाला

प्रकृति के सौन्दर्य की चित्रशाला

समीक्ष्य पुस्तक: पेड़ बुलाते मेघ (हाइकु संग्रह)  लेखक: रमेश कुमार सोनी– बसना प्रकाशक: सर्वप्रिय प्रकाशन – दिल्ली,  मूल्य: 310.00 रु संस्करण: 2018 जापानी विधा के हिंदी साहित्य लेखन के लिए छत्तीसगढ़ ही नहीं वरन पूरे भारत वर्ष में बसना, एक आगे पढ़ें


सहज व्यंग्य में चौंकाते हुए प्रहार

सहज व्यंग्य में चौंकाते हुए प्रहार

पुस्तकः बंटी, बबली और बाबूजी का बटुआ (व्यंग्य संग्रह) लेखकः श्री दीपक गिरकर प्रकाशकः रश्मि प्रकाशन,  204 सनशाइन अपार्टमेंट,  बी-3, बी-4 कृष्णा नगर, लखनऊ-226023 मूल्य: 175 रु. व्यंग्य लेखन में निरंतर नए प्रयोग हो रहे हैं और छोटे-छोटे मारक व्यंग्य आगे पढ़ें


कविताएँ

शायरी

समाचार

साहित्य जगत - कैनेडा

शिशिर की एक शाम, नृत्य-नाट्योत्सव के नाम

शिशिर की एक शाम, नृत्य-नाट्योत्सव के नाम

23 Nov, 2019

हिन्दी राइटर्स गिल्ड का 11वां वार्षिकोत्सव   नवंबर 17, 2019 मिसीसागा -  टोरोंटो में पिछले ग्यारह वर्षों से अपने एक…

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शरद्‌ काव्योत्सव मासिक गोष्ठी - अक्तूबर 2019

शरद्‌ काव्योत्सव मासिक गोष्ठी - अक्तूबर 2019

25 Oct, 2019

१९ अक्तूबर २०१९—हिन्दी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठी ब्रैम्पटन लाइब्रेरी के सभागार में संपन्न हुई। पतझड़ के मोहक रंगों से…

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हिन्दी हैं हम, चाहे, कोई वतन हमारा…..

हिन्दी हैं हम, चाहे, कोई वतन हमारा…..

28 Sep, 2019

हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने 14 सितम्बर 2019 को अपनी मासिक गोष्ठी में ‘हिंदी दिवस’ का सुन्दर आयोजन किया। यह कार्यक्रम…

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साहित्य जगत - भारत

कविता संग्रह 'नक्कारखाने की उम्मीदें' का ऑन लाइन लोकार्पण/समीक्षा संगोष्ठी

कविता संग्रह 'नक्कारखाने की उम्मीदें' का ऑन लाइन लोकार्पण/समीक्षा संगोष्ठी

27 Jul, 2020

सुपेकर की कविताएँ पूर्वाग्रह मुक्त कविताएँ - श्री सतीश राठी नगर की प्रमुख साहित्यिक संस्था क्षितिज के द्वारा श्री संतोष…

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’अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो’ पुस्तक को ’इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्डस’ द्वारा मान्यता

’अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो’ पुस्तक को ’इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्डस’ द्वारा मान्यता

13 Jul, 2020

सुदर्शन सोनी द्वारा लिखी पुस्तक ’अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो’ एक ऐसा व्यंग्य संग्रह जिसके सभी 34 व्यंग्य केवल कुत्तों…

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अनिल शर्मा केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के नए उपाध्यक्ष 

अनिल शर्मा केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के नए उपाध्यक्ष 

30 Jun, 2020

27 जून 2020 (भारत): मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने अनिल कुमार शर्मा को केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल का…

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साहित्य जगत - विदेश

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा-कविता सम्मान घोषित

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा-कविता सम्मान घोषित

28 May, 2020

(सभी सम्मान लेखिकाओं को) ममता कालिया, उषाकिरण ख़ान, अनिलप्रभा कुमार, प्रज्ञा, रश्मि भारद्वाज तथा गरिमा संजय दुबे होंगे सम्मानित ढींगरा…

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डॉ. सुषम बेदी की स्मृति में भावपूर्ण ज़ूम श्रद्धांजलि सभा 

डॉ. सुषम बेदी की स्मृति में भावपूर्ण ज़ूम श्रद्धांजलि सभा 

25 May, 2020

दिनांक 15 मई, 2020 को शीर्ष प्रवासी साहित्यकार श्रीमती सुषम बेदी की स्मृति में वैश्विक हिंदी परिवार (वाटस्एप समूह) द्वारा…

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फ़ॉल्सम, कैलिफ़ोर्निया में 'रचनात्मिका - हिंदी साहित्य मंच' का गठन

फ़ॉल्सम, कैलिफ़ोर्निया में 'रचनात्मिका - हिंदी साहित्य मंच' का गठन

15 Jan, 2020

११ जनवरी २०२०, फ़ॉल्सम, कैलिफ़ोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका। "विश्व हिंदी दिवस" के सुअवसर पर सैक्रामेंटो तथा आस पास के क्षेत्रों…

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दलित साहित्य विशेषांक

साहित्य कुंज-ई पत्रिका 'सुषम बेदी विशेषांक'; 'तेजेन्द्र शर्मा विशेषांक ' के बाद अगस्त माह के अंत में 'दलित साहित्य विशेषांक' निकाल रहा है। आप सभी से अनुरोध है कि आप दलित कौन? और दलित साहित्य क्या? दलित चेतना या दलित विमर्श; दलित साहित्य शीर्षक की आवश्यकता या अनावश्यकता आदि पर या किसी लेखक और रचना विशेष पर अपने लेख अगस्त 15 तक साहित्यकुंज की ईमेल sahityakunj@gmail.com या मेरी ईमेल:shailjasaksena@gmail.com पर भेजिएगा। इस विशेषांक में हम दलित साहित्य के इतिहास से लेकर, प्रचलित विचारों के साथ ही भविष्य में साहित्य के इस प्रकार के वर्गीकरण की सार्थकता या व्यर्थता पर भी विचार करना चाहते हैं और इस साहित्य के प्रतिष्ठित लेखकों की रचनाओं को भी पाठकों तक पहुँचाना चाहते हैं। आशा है आप का सहयोग हमें मिलेगा। सादर-शैलजा अपनी ई-मेल में अपना परिचय और फोटो अवश्य साथ भेजें। – शैलजा सक्सेना
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