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    कैनेडा का हिंदी साहित्य
    कैनेडा का हिंदी साहित्य साहित्यकुंज.नेट पत्रिका चार सफल विशेषांकों (सुषम बेदी विशेषांक, दलित साहित्य विशेषांक,.. आगे पढ़ें
नई तरकीब
लेखिका: डॉ. आरती स्मित - नई तरकीब

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

कहानियाँ

अंतर 

"बस यही तुम में और मनोज में अंतर है, तुम हर काम को अपने अनुसार करते हो जबकि मनोज हर काम को समझबूझ कर मुझसे पूछ कर करता है," रमेश ने अपने बेटे सुजीत पर झल्लाते हुए कहा।  "पर पापा आगे पढ़ें


अंधा

जब सूर्यदेव सिर के ऊपर आ गया, भीखू ने हल के जुए के नीचे से बैलों को निकालकर, एक पेड़ की छाया में बाँध दिया। फिर तेज़ क़दमों से घर की ओर चल दिया। वह जैसे ही भागू की चौपाल आगे पढ़ें


अधूरा पूरा सा इश्क़

यादों के झरोखे पर आज फिर किसी ने दस्तक दी थी। न चाहते हुए भी अमन का मन उस ओर खिंचता चला गया, अपनी बेटी का आँसुओं से भीगा हुआ चेहरा उसे बार-बार कचोट रहा था।  "विनय! मुझे माफ़ कर आगे पढ़ें


उतरता रंग

उस मिश्रित आबादी वाले मोहल्ले में किसी संस्था द्वारा महिला सभा आयोजित हुई। सभा में अमीर-ग़रीब सभी महिलाओं को आमंत्रित किया गया था। सभा शुरू होने से पहले एक अमीर महिला ने दिवाली के दिन महँगा बड़ा टीवी ख़रीदने की आगे पढ़ें


एक्ज़िमा

उसने दीवार पर लटके कलैंडर को गहराई से देखा। ओह! मार्च फिर आने को है क़रीब ही तो है पर फिर जान पड़ता है अभी ही तो मार्च बीता था? आश्चर्य से देखते हुए उसने सोचा, "पिछले साल की पीड़ा आगे पढ़ें


गुलमोहर 

माँ को गुलमोहर का पेड़ बहुत पसंद था। उनकी इच्छा थी कि अपने बाड़े में गुलमोहर का पेड़ होना चाहिए लेकिन गुलमोहर का पौधा लाएँ कहाँ से? नर्सरी में बहुत से पौधे थे मगर उस समय गुलमोहर नहीं था। पत्नी आगे पढ़ें


चतुर और चालाक

मूल कहानी: क्रैक एण्ड क्रुक; चयन एवं पुनर्कथन: इटलो कैल्विनो अंग्रेज़ी में अनूदित: जॉर्ज मार्टिन; पुस्तक का नाम: इटालियन फ़ोकटेल्स हिन्दी में अनुवाद: सरोजिनी पाण्डेय   प्रिय पाठको, एक इतालवी लोककथा का अनुवाद प्रस्तुत कर रही हूँ, आज के परिप्रेक्ष्य आगे पढ़ें


छतरी

सुरेन्द्रनाथ वर्मा अकेले थे। ऐसा नहीं  था कि उनका परिवार नहीं था। दो बेटे थे, दो बहुएँ थीं, दोनों के दो-दो बच्चे थे। यानी भरा-पूरा परिवार था। हाँ, बस पत्नी को स्वर्गवास हुए दो वर्ष बीत चुके थे। वैसे अकेले आगे पढ़ें


टेढ़ा जूता 

कोहरे से ढकी वह सुबह ठंड से ठिठुर रही थी। कोहरा इतना कि दस-बारह क़दम आगे चल रहा आदमी भी गुम हो जा रहा था। मैं ढेर सारे ऊनी कपड़े पहने, टोपी के ऊपर मफ़लर कसे हुए था। केवल आँखें आगे पढ़ें


डायरी का पन्ना – 006: पुलिस कॉन्स्टेबल

एक मशहूर कहावत है कि “दूसरे की थाली में परोसा हुआ बैंगन भी लड्डू लगता है”। अपना जीवन तो हम सब जीते ही हैं लेकिन दूसरे की ज़िन्दगी में झाँक कर और उसे जी कर ही असलियत का पता चलता आगे पढ़ें


नौ तेरह बाईस

“मैं निझावन बोल रहा हूँ, सर” मेरे मोबाइल के दूसरी तरफ़ मेरे बॉस हैं, मेरे ज़िले के एस.पी.। अपनी आई.पी.एस. के अंतर्गत। जबकि मेरी प्रदेशीय पुलिस सेवा में मेरी तैनाती यहाँ के चौक क्षेत्र में सर्कल ऑफ़िसर के रूप में आगे पढ़ें


बोध

“नमस्ते अंकल जी! आंटी जी को ढूँढ़ती हुई हमारी अम्माँ इधर ही आ रही है," पहाड़ी स्थान पर घूमने आये दंपती जिस ढाबा जैसे रेस्टोरेंट में रुके थे, उसके बच्चों एवं बाल मित्रों ने पीछे से धमककर अनिकेत और रमा आगे पढ़ें


भाई का हिस्सा

आरोप बेहद संगीन था। इस केस को लंबा खींचने या अगली तारीख़ देने का तो कोई प्रश्न ही नहीं उठ रहा था, क्योंकि मामला पानी की तरह साफ़ था। जयनाथ बाबू के छोटे भाई की पत्नी ने उन पर यौन आगे पढ़ें


माँ

अगर मैं कहूँ कि मेरी ज़िंदगी मेरी माँ का देखा, सँजोया और सँवारा हुआ एक स्वप्न है तो इसमें अतिशयोक्ति कुछ भी नहीं। मैं उसकी इच्छाओं, आकांक्षाओं का एक तरह से अनुवाद हूँ। मेरी बेहतरी से जुड़ी किसी भी बात आगे पढ़ें


विवाह संबंध

बचपन में ही उसने बहुत बड़े दर्द को झेला था। मम्मी-पापा के प्यार को कोर्ट में मरते हुए महसूस किया था नीरज ने। तबसे नीरज कुछ समय पापा के साथ तो कुछ समय मम्मी के साथ बीताते चला आया था। आगे पढ़ें


शव यात्रा  

सरकारी समय में शव यात्रा करके पुण्य कमाने में चकोर जी ने कभी कोई कंजूसी नहीं की। जैसे ही दफ़्तर में किसी के स्वर्ग सिधारने का समाचार पहुँचता, चकोर जी सीधे मुखिया के पास जाकर उन्हें इतला करते कि वे आगे पढ़ें


शहादत के बाद

उस गाँव के दो परिवारों में पुरखों के ज़माने से खेतों को लेकर जब तब झगड़े होते रहते थे। यूँ पहले परिवार के मुखिया 'क' ऐसे झगड़ों में कोई दिलचस्पी नहीं रखते थे लेकिन दूसरे परिवार का मुखिया 'ब' अपने आगे पढ़ें


सवाल

घंटी बजी तो वह आश्चर्य में पड़ कर सोचने लगी कि कौन हो सकता है? जब से लॉक डाउन हुआ है घंटी ने भी शोर मचाना बंद कर दिया है। लगता है वह भी सकते में आ गई है, जैसे आगे पढ़ें


सोलह सोमवार

सासु माँ बड़ी ख़ुश थी, जबसे यह पता चला था कि उनकी बहू ने सोलह सोमवार के व्रत उठाए हैं! ऊपर से भले ही प्रशंसा न करे पर मन ही मन फूली नहीं समा रही थीं। आख़िर लल्ला की लंबी आगे पढ़ें


हास्य/व्यंग्य

अगले जनम हमें मिडिल क्लास न कीजो

बौद्ध धर्म अनुसार मध्यम मार्ग उत्तम मार्ग है। पर अर्थ क्षेत्र में इसमें समस्याएँ हैं। मध्यम को पल-पल सिवाय ज़िल्लत व क़िल्लत के कुछ नहीं। हमने अभी आक्सीजन, बेड, वेन्टीलेटर, रेमडेसिविर की सबकी क़िल्लत व साथ ज़िल्लत झेली है। मध्यम आगे पढ़ें


अथ मुर्दा सम्वाद

कई घंटे हो गए थे। साथ आए लोग ज़मीन पर अर्थी रख किनारे जा कर सुस्ताने लगे थे। एक मुर्दा आगे वाले को लक्ष्य कर बुदबुदाया– कितना समय और लगेगा। उसे कोई जवाब न मिला। मन तो किया जम कर आगे पढ़ें


कालजयी होने की खुजली

जैसे चींटी को जब तबाह होना होता है तो उसके पंख निकल आते हैं, जैसे गीदड़ को जब तबाह होना होता है तो वह जंगल छोड़ शहर की ओर निकल पड़ता है पीठ पर कफ़न बाँध, ठीक उसी तरह जब आगे पढ़ें


आलेख

आस्था और अंधविश्वास

आस्था और अंधविश्वास बहुत ही संवेदनशील मुद्दे हैं। जनभ्रांतियों की आड़ में, जिसके नाम पर दुनिया भर में एक से एक आरोप-प्रत्यारोप लगे हैं।  आस्था और विश्वास ने हज़ारों वर्षों की तपस्या से पीढ़ी दर पीढ़ी की विरासत रूप में आगे पढ़ें


जीवनोपासना

जीवन अमृत तुल्य है। मानव के असंख्य पुण्य कर्मों का फल उसे मनुष्य योनि प्रदान करता है। सनातन मान्यता है चौरासी लाख योनियों में भटकने के बाद मानव जन्म प्राप्त होता है। ईश्वर के दिए इस अनमोल जीवन को समाप्त आगे पढ़ें


नाम में क्या रखा है?

विश्व प्रसिद्ध नाटककार विलियम शेक्सपियर के यूँ तो अनेकों उद्धरण साहित्य की दुनिया में अमर हैं, उनके रोमियो जूलिएट नामक नाटक से एक उद्धरण निम्न है – “What’s in name? That which we call a rose by any other name आगे पढ़ें


मिथक और साहित्य

मिथक आदिम विश्वासों पर आधारित ऐसे आख्यान हैं जिनकी घटनाएँ और चरित्र प्राय: मानवेतर और तर्कातीत होते हैं लेकिन किसी सांस्कृतिक समाज के सामूहिक मन पर उसकी जड़ें गहरे समाई रहती हैं। प्रागैतिहासिक काल में मानव द्वारा कल्पित और सृजित आगे पढ़ें


विभिन्न सामाजिक आंदोलन में समकालीन कविता की अभिव्यक्ति

नई कविता के बाद उभरे विभिन्न आंदलनों में से एक महत्वपूर्ण आंदोलन के रूप में समकालीन कविता को देखा जाता है। इसकी शुरुआत छठे दशक से मानी जाती है इसीलिए साठोत्तरी कविता इसके समप्रचलित रही है। समकालीन कविता अपने काल आगे पढ़ें


हिंदी कहानियों में चित्रित वृद्धों की समस्‍याएँ

प्राक्‍कथन – कहानी कहना और सुनना मनुष्‍य की आदिम प्रवृत्ति है। यह अनादिकाल से मनुष्‍य के मनोरंजन और ज्ञान दोनों का साधन रही है। कहानी कहना कला है, इसके द्वारा एक ही कथ्‍य अनेक प्रकार से कहा जा सकता है आगे पढ़ें


समीक्षा

बच्चों के बालमन को टार्गेट कर के रची गई : बंदर संग सेल्फी

बच्चों के बालमन को टार्गेट कर के रची गई : बंदर संग सेल्फी

समीक्षित पुस्तक: बंदर संग सेल्फी लेखिका: अनीता श्रीवास्तव, टीकमगढ़, मध्यप्रदेश ISBN: 978-93-82224-93-8 मूल्य: 60 रुपया प्रकाशक: ज्ञानमुद्रा प्रकाशन भोपाल मध्यप्रदेश समीक्षक: अजीत श्रीवास्तव एडवोकेट  गीत की अति सुंदर कलेवर, रंग व चित्रों से सजी पंद्रह रचनाओं की पुस्तक प्राप्त हुई। आगे पढ़ें


बालमन के चितेरे कवि शिव मोहन यादव

बालमन के चितेरे कवि शिव मोहन यादव

  पुस्तक का नाम : सिंहों के अवतार तुम्हीं हो कवि का नाम : शिव मोहन यादव प्रकाशक : लोकोदय प्रकाशन, लखनऊ संस्करण : 2020 मूल्य : 125/- बाल साहित्य से तात्पर्य बच्चों के लिए लिखे जाने वाले साहित्य से आगे पढ़ें


विभोम स्वर में प्रकाशित सुमन कुमार घई की कहानी ’छतरी’ बनी चर्चा का विषय

विभोम स्वर में प्रकाशित सुमन कुमार घई की कहानी ’छतरी’ बनी चर्चा का विषय

खण्डवा, मध्य प्रदेश में शिवना प्रकाशन का उप-कार्यालय है। जिसके प्रभारी श्री शैलेन्द्र शरण हैं। वहीं वीणा संवाद एक साहित्यिक ग्रुप है, जिसके कई सदस्य हैं। कार्यालय में विभोम स्वर की बहुत सी पत्रिकाएँ सदस्यों द्वारा मँगवाई जाती हैं। विभोम आगे पढ़ें


स्त्री जीवन की त्रासदी को रेखांकित करती कहानियाँ

स्त्री जीवन की त्रासदी को रेखांकित करती कहानियाँ

पुस्तक: आख़िरी चिट्ठी  लेखक: डॉ. रामदरश मिश्र  प्रकाशक: प्रतिभा प्रतिष्ठान(प्रथम संस्करण)  पृष्ठ: 160  मूल्य: 200/-  एक पुस्तक भेंट मिली . . . वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामदरश मिश्र की पुस्तक, उन्हीं के हाथों! मुखपृष्ठ पर अंकित शीर्षक ने एकबारगी मुझे अपनी आगे पढ़ें


संस्मरण

आर. बी. भण्डारकर – डायरी 009 – नाम

दिनांक 15 जुलाई 2021 दिन का तीसरा पहर है। हम लोगों को आज सुबह कोरोना वैक्सीन का दूसरा डोज़ लगना तय था अस्तु मैं आज की डायरी लिखने अब बैठ सका। ध्यान गया "नामों" पर; आज की डायरी का शीर्षक आगे पढ़ें


मुहल्ले की चुड़ैल

रास्ते में मिलने वाले प्रत्येक परिचित स्त्री-पुरुष से हँसी-मज़ाक करते हुए, वह अपने पति के साथ त्योहार और बेटे के जन्मदिन की बहुत सारी ख़रीदारी करके अभी तो लौटी थी।  दोनों के कुछ आपसी संवाद के बाद पति अपनी ड्यूटी आगे पढ़ें


नाटक

चंद्रशेखर आज़ाद—भारत का बेटा

(जन्मदिन पर विशेष)   पण्डित चन्द्रशेखर 'आज़ाद' (23 जुलाई 1906 – 7 फरवरी 1931) ऐतिहासिक दृष्टि से भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के स्वतंत्रता सेनानी थे। वे पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल व सरदार भगत सिंह सरीखे क्रान्तिकारियों के अनन्यतम साथियों में से आगे पढ़ें


कविताएँ

शायरी

समाचार

साहित्य जगत - कैनेडा

विश्वरंग 2020 - कैनेडा  सत्र नवम्बर 07

विश्वरंग 2020 - कैनेडा सत्र नवम्बर 07

29 Nov, 2020

रिपोर्ट- आशा बर्मन  कैनेडा के हिंदी-प्रेमियों के लिए 7 नवम्बर 2020 एक अविस्मरणीय दिन रहेगा। इसी दिन पहली बार कैनेडा…

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शिशिर की एक शाम, नृत्य-नाट्योत्सव के नाम

शिशिर की एक शाम, नृत्य-नाट्योत्सव के नाम

23 Nov, 2019

हिन्दी राइटर्स गिल्ड का 11वां वार्षिकोत्सव   नवंबर 17, 2019 मिसीसागा -  टोरोंटो में पिछले ग्यारह वर्षों से अपने एक…

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शरद्‌ काव्योत्सव मासिक गोष्ठी - अक्तूबर 2019

शरद्‌ काव्योत्सव मासिक गोष्ठी - अक्तूबर 2019

25 Oct, 2019

१९ अक्तूबर २०१९—हिन्दी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठी ब्रैम्पटन लाइब्रेरी के सभागार में संपन्न हुई। पतझड़ के मोहक रंगों से…

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साहित्य जगत - भारत

हिन्दू कॉलेज में प्रेमचंद जयंती पर प्रो. अपूर्वानंद का व्याख्यान

हिन्दू कॉलेज में प्रेमचंद जयंती पर प्रो. अपूर्वानंद का व्याख्यान

31 Jul, 2021

आवाज़ में भी रोशनी होती है – प्रो. अपूर्वानंद हिंदू कॉलेज में प्रेमचंद जयंती पर वेबिनार   दिल्ली— "हम भी…

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कोरोनाकाल की क़ैद में सौरभ दम्पती ने रची तीन पुस्तकें

कोरोनाकाल की क़ैद में सौरभ दम्पती ने रची तीन पुस्तकें

19 Jul, 2021

(डॉ. सत्यवान सौरभ एवं प्रियंका सौरभ आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है, एक दोहाकार के रूप में जहां उनकी…

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'पर्यावरण' विषयक हाइकु संगोष्ठी

'पर्यावरण' विषयक हाइकु संगोष्ठी

6 Jul, 2021

'हाइकु गंगा' व्हाट्सएप समूह के तत्त्वावधान में दिनांक 27 जून 2021  को आज की ज्वलंत समस्या 'पर्यावरण' विषय पर आनॅलाइन…

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साहित्य जगत - विदेश

वातायन के इतिहास में एक शानदार सम्मान-समारोह

वातायन के इतिहास में एक शानदार सम्मान-समारोह

25 Nov, 2020

डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक’ और श्री मनोज मुंतशिर वातायन-यूके द्वारा सम्मानित   लंदन, 21 नवंबर 2020: वातायन का वार्षिक समारोह…

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तेजेन्द्र शर्मा के कविता संग्रह ‘टेम्स नदी के तट से’ का लोकार्पण नेहरू सेन्टर लंदन के मंच से...

तेजेन्द्र शर्मा के कविता संग्रह ‘टेम्स नदी के तट से’ का लोकार्पण नेहरू सेन्टर लंदन के मंच से...

29 Sep, 2020

• कथा यू.के. संवाददाता भारतीय उच्चायोग लंदन, नेहरू सेन्टर लंदन एवं एशियन कम्यूनिटी आर्ट्स ने एक साझे कार्यक्रम में तेजेन्द्र…

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ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा-कविता सम्मान घोषित

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा-कविता सम्मान घोषित

28 May, 2020

(सभी सम्मान लेखिकाओं को) ममता कालिया, उषाकिरण ख़ान, अनिलप्रभा कुमार, प्रज्ञा, रश्मि भारद्वाज तथा गरिमा संजय दुबे होंगे सम्मानित ढींगरा…

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फीजी का हिन्दी साहित्य

साहित्यकुञ्ज पत्रिका ’फीजी का हिन्दी साहित्य’ विषय पर नवंबर में विशेषांक प्रकाशित करने वाली हैं। उद्देश्य यह है कि फीजी की सांस्कृतिक और हिन्दी की साहित्यिक संपदा पाठकों के सामने रख सकें। हमारा फीजी के लेखकों और फीजी से जुड़े सभी लोगों से सादर आग्रह है कि आप अपनी कविताएँ, कहानियाँ, साहित्यिक लेख, संस्मरण, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि आदि साहित्यकुंज पत्रिका के लिए भेजियेगा। साहित्यकुंज पत्रिका के संपादक हैं: सुमन कुमार घई। इस विशेषांक की संपादक हैं: डॉ. शैलजा सक्सेना; सह-संपादक: सुभाषिणी लता कुमार (लौटुका, फीजी) ये रचनाएँ अक्तूबर 18, 2020 तक अवश्य भेज दीजिए। कृपया इन रचनाओं को आप इन ई-मेल पतों पर भेजिए: shailjasaksena@gmail.com sampadak@sahityakunj.net
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