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    फीजी का हिन्दी साहित्य
    फीजी का हिन्दी साहित्य फीजी विशेषांक का परिचय हिन्दी भाषा का प्रयोग और लेखन पूरे विश्व में बहुत लंबे समय से.. आगे पढ़ें
बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात
साहित्य के रंग शैलजा के संग - बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

कहानियाँ

अंतस की पीड़ा

घड़ी के अलार्म की कर्कश आवाज़ के साथ ही उर्मि की नींद खुली और उसने अनमने मन से करवट बदलते हुए आँखे बंद किए हुए ही हाथों से टटोलते हुए घड़ी को हाथ में लिया और बड़ी मुश्किल से आँख आगे पढ़ें


अजनबी की पुकार

अभी रात बहुत बाक़ी थी। घर में अभी सभी सोये हुए थे। रात के बारह बजे थे; नींद आते आते रजनी की नींद खुल गई। उन के मकान के बग़ल से ही कोई अजनबी आवाज़ पुकार रही थी, "रजनी रजनी आगे पढ़ें


अधिकार

रश्मि अपनी दो बरस की बिटिया को अपने से चिपका कर, नज़रें झुकाए, ऐसे सिमट कर बैठी थी मानो कोई अपराध कर के आई हो, जबकि उसी सूजी हुई आँखें और बाँहों पर नील के निशान कुछ और ही कहानी आगे पढ़ें


उजड़े चमन

बबली की ख़ूबसूरती व उच्च शिक्षा के ही कारण मोहन ने शादी की हामी भरी थी। विशाखपट्टणम की एक लिमिटेड सरकारी कंपनी में नौकरी लगते ही शादी के लिए रिश्तों की लड़ी लग गई थी। हो भी क्यों न, सभी आगे पढ़ें


ओहदों का फ़र्क़

अमरीका के प्रथम राष्ट्रपति और सेनाओं के कमांडर इन चीफ जार्ज वाशिंगटन घोड़े पर सवार होकर कहीं जा रहे थे। उन दिनों वहाँ तूफ़ान की वज़ह से सड़कों पर जगह-जगह पेड़ गिरे हुए थे। एक जगह उन्हें सड़क पर गिरे आगे पढ़ें


गेम-चेन्जर

घर में भूचाल दो बार आया था, पहली बार सन् १९६५ की मई में, जब गोविन्द भाई घर से लापता हुए और दूसरी बार सन् १९६९ की जून में, जब पापाजी ने माँ के संग मकान बेचने की बात छेड़ी। आगे पढ़ें


तरकीब

मार्च 2020 में गोपाल जी सपत्नीक कुछ महीनों के लिए अपने बच्चों से मिलने भारत से अमेरिका आए थे लेकिन कोरोना के चलते वे अभी तक वापस नहीं जा पाए। उनकी एक बेटी वेस्ट न्यू यॉर्क में रहती है। उनकी आगे पढ़ें


दोहरी मार फ़ेसबुक का प्यार

सुबह-सुबह श्रीमती जी जब चाय लेकर आई, दुखी आत्मा को फ़ेसबुक पर व्यस्त देख झल्ला उठी। "क्या सुबह-सुबह मोबाइल लेकर बैठ जाते हो। मैं तो तुम्हारी इस आदत से तंग आ गई हूँ।" वह बड़बड़ाते हुए अंदर चली गई और आगे पढ़ें


फूफी

फूफी अक़्सर अपने जीवन के क़िस्से सुनाया करतीं लेकिन जब वो ख़ामोश व मायूस होतीं तो कुछ न कुछ बड़बड़ाती रहतीं। आज फूफी पैर में महावर रचाए, माँग में सिंदूर ,अँखियों में काजर, माथे पर बिंदी, कानों में झुमके पहने आगे पढ़ें


बसंत

आज रविवार है; सोचा, थोड़ा आराम कर लूँ। जाने कब आँख लग गई! थोड़ी ही देर में ठक-ठक की ध्वनि ने मेरे विश्राम में बाधा पहुँचाई। देखा तो द्वार पर कोई खड़ा है। सूरत कुछ-कुछ पहचानी सी लगती है, मगर आगे पढ़ें


मौन

रूपवती, गुणवती, सुशील और चंचल अदाओं से परिपूर्ण स्नेहा को देखते ही मयंक ने शादी के लिए हाँ कर दी। सारी बातें हो जाने के बाद बात दहेज़ पर आकर अटक गई। मयंक के घर वालों ने शादी में मोटी आगे पढ़ें


राग-विराग – 6

नन्ददास तुलसी से काशी में प्रायः ही भेंट करते रहते थे। "कुछ दिन टिक कर एक स्थान पर रहो दद्दू, आराम रहेगा और लिखने-पढ़ने में भी सुविधा रहेगी।" "समाज की वास्तविक दशा को जाने बिना लिखना उद्देश्यपूर्ण कैसे हो सकता आगे पढ़ें


लकड़ी की काठी

खिड़की के पार देखती उदास राशि के सिर पर करिश्मा ने प्यार से हाथ फेरा तो वह पलट कर उससे लिपट गई।  "माँ यह साल कितना बुरा है न, इस साल किसी का बर्थडे ही नहीं हुआ। हर बार सब आगे पढ़ें


वैलेंटाइन डे

उसके हाथों की छुअन आज भी फाहे जैसी है। कोमल भावनाओं के फाहे, जो प्रेम से उपजी हृदय की तरलता को अपने में सोख कर नरम-गरम हो गए हैं। माथे पर अंगुलियों का जादुई स्पर्श पा कर शरद ने आँखें आगे पढ़ें


समझदारी

"ज्योति, अब तुम शिक्षिका बन गई। उम्र भी तेईस हो गई, अब तो तुम्हें आपत्ति नहीं है?" अपने दोस्त की बातें सुन ज्योति गंभीर हो गई। "चुप क्यों हो? कहीं मैं तुम्हे पसंद नहीं या कोई और तुम्हें पसंद है, आगे पढ़ें


हाई वे 

कड़कती धूप की तपती ज़मीन पर नंगे पाँव, पिचके पेट, अधेड़ उम्र का नाटा सा आदमी ‘हाई वे’ पर ’खाना तैयार है’ बैनर के साथ खड़ा था। आने-जानेवालों को आवाज़ दे देकर उसके प्राण सूख गए थे। उर्र-फुर्र अतिवेग से आगे पढ़ें


क़ाबिलियत

चकोर जी पिछले दिनों एक कुत्ता ले आए। यूँ तो उन्हें कुत्तों से कोई ख़ास लगाव नहीं था लेकिन इधर अपनी बेवज़ह भौंकने की आदत के कारण वे धीरे-धीरे बिलकुल अकेले रह गए थे। ऊपर से कोरोना की वज़ह से आगे पढ़ें


हास्य/व्यंग्य

जूता संहिता

जिस प्रकार लोकतंत्र को ठीक-ठाक ढंग से चलाने के लिये तमाम नियमों क़ानूनों की आवश्यकता होती है उसी प्रकार जूता चलाने से भी बहुत सारे लोग शुद्ध रहते हैं ऐसा जूतमपैजार के विशेषज्ञों का दावा है। जूता बनाना कोई बहुत आगे पढ़ें


पोइट आइसोलेशन में है वसंत!

हर बार की तरह इस बार भी वसंत इसी मुग़ालते में था कि ज्यों ही वह स्वर्ग से धरती पर उतरने को जूते के फीते बाँधने लगेगा तो उसके जूतों के फीते बाँधने की आवाज़ सुन धरती पर हर आपदा आगे पढ़ें


बजट की समझ

कुछ छिद्रान्वेषी  राजनीतिक विश्लेषक लोग पूछते हैं बजट में बजट कहाँ है? इसमें बजट जैसा तो कुछ है ही नहीं। इसमें तो सिर्फ़ ख़रीदने, बेचने और टैक्स लगाने की ही बातें हैं। अब आपको कैसे बताएँ कि आपके लच्छन ठीक आगे पढ़ें


आलेख

अध्यात्म और विज्ञान के अंतरंग सम्बन्ध

वैज्ञानिक दृष्टिकोण कल्पनाशीलता एवं अंतर्ज्ञान से निर्मित होता है। किसी भी वैज्ञानिक खोज का आधार अंतर्ज्ञान से उपजी कल्पनाशीलता होती है। और यह अंतर्ज्ञान आध्यात्मिकता से ही चेतन होता है। वैज्ञानिक खोज वास्तविकता धरातल पर होती है। एक ऐसी वास्तविकता आगे पढ़ें


डॉ. राही मासूम रज़ा का साहित्य और समकाल

भारत एक बहुजातीय देश है। विभिन्न जातियों की सांस्कृतिक परंपराओं की अपनी अलग विशिष्टताएँ हैं किन्तु जो तत्व मानव-समुदाय को संगठित करने में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं, उनमें इतिहास और संस्कृति का बहुत बड़ा योगदान होता है। यदि भारतीय आगे पढ़ें


नरेन्द्र कोहली के मिथकीय उपन्यासों में आधुनिकता का बोध

कोहली जी सजग एवं चेतना संपन्न, सृजनशील लेखक हैं। उन्होंने भारत में प्रचलित रामकथा का पुनर्लेखन किया है। ‘रामचरितमानस’ के गहरे अध्ययन के कारण, लेखक की तर्कशील चेतना जागृत होने के कारण कोहली जी ने ‘रामकथा’ को आधुनिक संदर्भ में आगे पढ़ें


भक्ति का अनुपम महाकाव्य: प्रो. हरिशंकर आदेश का रघुवंश शिरोमणि श्रीराम

प्रो.हरिशंकर आदेश  (जन्म:7 अगस्त, 1936 – मृत्यु:28 दिसंबर, 2020)     जयन्ति ते सुकृतिनो रससिद्धाः कवीश्वराः। नास्ति येषां यशः काये जरामरणजं भयम्॥     ऐसे महान कवि जो अपनी रचनाओं को रसयुक्त बनाने की कला में प्रवीण हैं, वे वास्तव में आगे पढ़ें


यह ऋतु मस्तानी

नमस्कार दोस्तो, मैं आज  बसंत पंचमी के बारे में अपने विचार हिंदी के प्रसिद्ध कविवर ‘सेनापति’ की इन पंक्तियों के साथ साँझा करना चाहती हूँ – "चहकि चकोर उठे, करि-करि जोर उठे। टेर उठी सारिका, विनोद उपजावने। चटकि गुलाब उठे, आगे पढ़ें


फ़ज़लुर रहमान हाशमी की साहित्यिक विरासत 

बेगूसराय के कवियों शायरों में दिनकर के बाद जिस व्यक्ति का नाम निर्विवाद रूप से लिया जाता है वह फ़ज़लुर्रहमान हाशमी हैं। वह उर्दू हिंदी और मैथिली के महत्वपूर्ण लेखक तो थे ही, अँग्रेज़ी और संस्कृत का भी उन्हें अच्छा आगे पढ़ें


समीक्षा

जीवन को सुवासित करतीं रचनाएँ – अवनीश सिंह चौहान

जीवन को सुवासित करतीं रचनाएँ – अवनीश सिंह चौहान

समीक्षित कृति: ढाईआखर प्रेम के रचनाकार: शचीन्‍द्र भटनागर प्रकाशक: हिन्‍दी साहित्‍य निकेतन, बिजनौर (उ.प्र.) प्रकाशन वर्ष: 2010 मूल्‍य: रु.100/- आचार्य ओशो ने कहा है–‘प्रेम में तुम न रहो, प्रेम रहे।' यानी कि प्रेम की उस अवस्‍था में पहुँचना कि कर्ता आगे पढ़ें


पुस्तक: हिंदी साहित्य के पुरोधा

पुस्तक: हिंदी साहित्य के पुरोधा

पुस्तक: हिंदी साहित्य के पुरोधा (आलोचना संग्रह; तीन महत्वपूर्ण समीक्षा सहित) समीक्षक:ब्रजेन्द्र त्रिपाठी लेखक: डॉ. आरती स्मित संस्करण:  द्वितीय, 2020 प्रकाशक:  वर्जिन साहित्यपीठ, दिल्ली मूल्य:  ईबुक: 88 रु/-; पेपर बैक 225 रु/- कुल पृष्ठ संख्या: 198 प्रस्तुत कृति 'हिंदी साहित्य आगे पढ़ें


पोखर ठोंके दावा : जल उफने ज्यों लावा 

पोखर ठोंके दावा : जल उफने ज्यों लावा 

कृति विवरण: पोखर ठोंके दावा (नवगीत संग्रह) लेखक: अविनाश ब्योहार प्रकाशक: काव्य प्रकाशन वर्ष: प्रथम संस्करण २०१९ आकार:  २० से. x १३ से.,  आवरण: बहुरंगी पेपरबैक,  पृष्ठ: १२० साहित्य सामायिक परिस्थितियों का साक्षी बनकर ही संतुष्ट नहीं होता, वह समय आगे पढ़ें


संस्मरण

चेन्नई से हिमाद्रि तक ‘सड़क से’ 

बात 2017 की है, मई का अंतिम सप्ताह। यह वर्ष हमारी स्मृतियों में चिरस्मरणीय काल खण्ड के रूप में अंकित हो गया जब हमने केदार और बद्री की यात्रा संपन्न की थी। नई गाड़ी ली थी एम एल 350! इसकी आगे पढ़ें


मारी

मारी हमारे घर में कई सालों पहले नियुक्त एक दस साल की छोटी सहायक थी जो मेरी नवजात शिशु की देखभाल करने में मेरी मदद कर सकती थी। उसकी माँ गुज़र चुकी थी और मज़दूर बने उसके पिता को उसे आगे पढ़ें


साक्षात्कार

सराबों तक ले आने वाली शायरा 

हिन्दी सिंधी साहित्य की ललक सराबों तक ले आई मुझे– देवी नागरानी      न्यू यॉर्क! दोपहर का समय, मैं अपने ‘सिन्दूरी शाम’ प्रोग्राम के आयोजन में व्यस्त थी। फोन की घंटी बजी और उनकी मधुर आवाज़ सुनाई दी। और आगे पढ़ें


कविताएँ

शायरी

समाचार

साहित्य जगत - कैनेडा

विश्वरंग 2020 - कैनेडा  सत्र नवम्बर 07

विश्वरंग 2020 - कैनेडा सत्र नवम्बर 07

29 Nov, 2020

रिपोर्ट- आशा बर्मन  कैनेडा के हिंदी-प्रेमियों के लिए 7 नवम्बर 2020 एक अविस्मरणीय दिन रहेगा। इसी दिन पहली बार कैनेडा…

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शिशिर की एक शाम, नृत्य-नाट्योत्सव के नाम

शिशिर की एक शाम, नृत्य-नाट्योत्सव के नाम

23 Nov, 2019

हिन्दी राइटर्स गिल्ड का 11वां वार्षिकोत्सव   नवंबर 17, 2019 मिसीसागा -  टोरोंटो में पिछले ग्यारह वर्षों से अपने एक…

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शरद्‌ काव्योत्सव मासिक गोष्ठी - अक्तूबर 2019

शरद्‌ काव्योत्सव मासिक गोष्ठी - अक्तूबर 2019

25 Oct, 2019

१९ अक्तूबर २०१९—हिन्दी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठी ब्रैम्पटन लाइब्रेरी के सभागार में संपन्न हुई। पतझड़ के मोहक रंगों से…

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साहित्य जगत - भारत

साहित्य सरोकारों और सम्वेदनाओं को आवाज़ देता है- आशुतोष राना

साहित्य सरोकारों और सम्वेदनाओं को आवाज़ देता है- आशुतोष राना

20 Feb, 2021

डॉ. सुशील शर्मा की चार पुस्तकें विमोचित   गाडरवारा स्थानीय महाराणा प्रताप वार्ड शांति नगर में परम पूज्य पंडित देव…

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डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा की दो पुस्तकें लोकार्पित

डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा की दो पुस्तकें लोकार्पित

20 Feb, 2021

हैदराबाद, 19.2.2021 यहाँ दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के खैरताबाद स्थित परिसर में विगत 11 फरवरी को डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा…

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रिश्तों की विविधता और बाज़ारवाद पर आधारित हैः ’पतियों का एक्सचेंज ऑफर’

रिश्तों की विविधता और बाज़ारवाद पर आधारित हैः ’पतियों का एक्सचेंज ऑफर’

31 Jan, 2021

सुदर्शन सोनी के चौथे व्यंग्य संकलन ‘पतियों का एक्सचेंज ऑफर’ का विमोचन संपन्न व्यंग्यकार सुदर्शन सोनी की आठवीं पुस्तक चौथे…

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साहित्य जगत - विदेश

वातायन के इतिहास में एक शानदार सम्मान-समारोह

वातायन के इतिहास में एक शानदार सम्मान-समारोह

25 Nov, 2020

डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक’ और श्री मनोज मुंतशिर वातायन-यूके द्वारा सम्मानित   लंदन, 21 नवंबर 2020: वातायन का वार्षिक समारोह…

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तेजेन्द्र शर्मा के कविता संग्रह ‘टेम्स नदी के तट से’ का लोकार्पण नेहरू सेन्टर लंदन के मंच से...

तेजेन्द्र शर्मा के कविता संग्रह ‘टेम्स नदी के तट से’ का लोकार्पण नेहरू सेन्टर लंदन के मंच से...

29 Sep, 2020

• कथा यू.के. संवाददाता भारतीय उच्चायोग लंदन, नेहरू सेन्टर लंदन एवं एशियन कम्यूनिटी आर्ट्स ने एक साझे कार्यक्रम में तेजेन्द्र…

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ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा-कविता सम्मान घोषित

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा-कविता सम्मान घोषित

28 May, 2020

(सभी सम्मान लेखिकाओं को) ममता कालिया, उषाकिरण ख़ान, अनिलप्रभा कुमार, प्रज्ञा, रश्मि भारद्वाज तथा गरिमा संजय दुबे होंगे सम्मानित ढींगरा…

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फीजी का हिन्दी साहित्य

साहित्यकुञ्ज पत्रिका ’फीजी का हिन्दी साहित्य’ विषय पर नवंबर में विशेषांक प्रकाशित करने वाली हैं। उद्देश्य यह है कि फीजी की सांस्कृतिक और हिन्दी की साहित्यिक संपदा पाठकों के सामने रख सकें। हमारा फीजी के लेखकों और फीजी से जुड़े सभी लोगों से सादर आग्रह है कि आप अपनी कविताएँ, कहानियाँ, साहित्यिक लेख, संस्मरण, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि आदि साहित्यकुंज पत्रिका के लिए भेजियेगा। साहित्यकुंज पत्रिका के संपादक हैं: सुमन कुमार घई। इस विशेषांक की संपादक हैं: डॉ. शैलजा सक्सेना; सह-संपादक: सुभाषिणी लता कुमार (लौटुका, फीजी) ये रचनाएँ अक्तूबर 18, 2020 तक अवश्य भेज दीजिए। कृपया इन रचनाओं को आप इन ई-मेल पतों पर भेजिए: shailjasaksena@gmail.com sampadak@sahityakunj.net
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