साहित्य के रंग -  शैलजा के संग
साहित्य के रंग - शैलजा के संग

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

कहानियाँ

तलाश...

"समझ में आ गया क्या बच्चो?" मैंने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को अँग्रेज़ी का एक निबन्ध पढ़ाने के बाद पूछा। हालाँकि मैं ये बख़ूबी जानती थी कि उन्हें यह पाठ समझ में नहीं आया है। क्योंकि आगे पढ़ें


तारों पर झूलती ज़िन्दगी

वो दुबली-पतली, प्यारी, नन्ही सी बच्ची भागती हुई आई और माँ के सीने से लिपट कर कहने लगी - "माँ मुझे रिंग में जाने से रोक लो। कल जब गटटू ने मुझे हवा में उछाला था तभी से मेरी गर्दन आगे पढ़ें


परी और जादुई फूल

कड़ाके की ठंड है। नैनीताल की ठंडी सड़क पर धीरे-धीरे चल रहा हूँ। सड़क के किनारे बर्फ़ अभी भी जमी है। इस सड़क पर बहुत बार अकेले और कुछ बार साथियों के साथ आना-जाना हुआ था। इस पर  बोलता हूँ, "वो आगे पढ़ें


उपलों में गणित

अमेरिका से धीरज का भारत में अपने गाँव लौटना भागो काकी के जीवन में इतनी हलचल मचा देगा, इसका पूर्वानुमान कोई कैसा लगा सकता था? दरअसल, धीरज  अमेरिका के किसी विश्वविद्यालय में "प्राचीन काल में गणित और उसका मानव सभ्यता आगे पढ़ें


जीना यहाँ-मरना यहाँ 

जमुनिया भोर के अँधेरे में ही महुआ बीनने निकल पड़ी थी, जबकि सारी रात उसे तेज़ बुखार रहा था। मगर महुआ नहीं बीनेगी तो खायेगी क्या...? भूखों मरना पड़ेगा। घर में कोई दो पैसे कमाने वाला भी तो नहीं। पिछले आगे पढ़ें


बात सगाई की 

  "देखो! जानकी जिस घर में मैं तुम्हारी बेटी नीति के रिश्ते की बात चला रही हूँ कसबे के माने हुए जमींदार हैं।" "पर बुआ..... " जानकी कुछ आगे कह पाती बुआ ने बीच में ही टोक कर कहा, "अरी, आगे पढ़ें


मक्खी-मच्छर 

सुबह से अबोला जारी...। पास बैठे हुए भी दोनों अपने-अपने अदृश्य घेरों में क़ैद; संजीव आरामकुर्सी पर टाँग-पे-टाँग रखे अधलेटा इण्डिया-टुडे के पन्नों में और तनु गार्डन चेयर पर सीधी तनी बैठी ऊन-सिलाइयों की उधेड़बुन में मस्त होने के उपक्रम आगे पढ़ें


संकट मोचक  

प्रदेश सरकार में वे पहली बार मंत्री आज से कोई दस वर्ष पहले बने थे। उस वक़्त उनके नालायक़ भाई की उम्र सोलह साल थी। इस वक़्त भी वे मंत्री हैं लेकिन उनका नालायक़ भाई अब छब्बीस साल का हो आगे पढ़ें


हास्य/व्यंग्य

बुद्धिजीवी मेकर 

आज का दौर मेकों का कम, मेकरों का दौर अधिक है। यही सोच विचार के बाद मैंने सोचा कि कोई मेक वेक फेक होने के बदले बुद्धिजीवी मेकर हो जाऊँ। सच पूछो तो किंग मेकर होने में भी वह मज़ा आगे पढ़ें


मंगल ग्रह में पानी

बेटर-हाफ़ ने लगभग अंतिम चेतावनी का ऐलान किया, "खाना लगा रही हूँ, अब आते हैं, या वहीं नेट में ‘व्हाट्स-एप’ थ्रू भिजवा दूँ...?” "पता नहीं सुबह से शाम क्या सर्च करते रहते है, जो ख़तम होने का नाम नहीं लेता...? आगे पढ़ें


मुन्नू अनशन पर

एक दिन मेरे मित्र राधेश्याम मेरे पास हाँफते हुये आये। मैंने पूछा, "राधेश्याम इतना भाग क्यों रहे हो? ओलेम्पिक्स तो कब की ख़तम हो गई है… तुम अभी तक अभ्यास कर रहे हो!"  वे अत्यंत घबराये हुये थे। बदहवास से आगे पढ़ें


आलेख

क्रान्तिकारी स्वतन्त्रता-सेनानी व साहित्यकार यशपाल: व्यक्तित्व एवं कृतित्व

क्रान्तिकारी स्वतन्त्रता-सेनानी एवं साहित्यकार यशपाल के उदात्त व्यक्तित्व तथा समग्र साहित्यिक अवदान को एक शोधपत्र में समाविष्ट कर लेना सम्भव नहीं है, इसलिए मैंने अपनी समीक्षात्मक चर्चा में उनके सृजन का प्रतिनिधित्व करते एक उपन्यास "देशद्रोही" तथा पाँच चयनित कहानियों आगे पढ़ें


प्रवासी कथा साहित्य में स्त्री जीवन की अंतर कथा

समकालीन हिंदी कथा साहित्य की दशा और दिशा विभिन्न सैद्धान्तिक विमर्शों के द्वारा तय की जा रही है। कथा साहित्य को स्त्री विमर्श, दलित विमर्श, अल्पसंख्यक विमर्श, आदिवासी विमर्श आदि नाना प्रकार के विमर्शों के खाँचों में भरकर देखने की आगे पढ़ें


वीरकाव्य की परंपरा और भूषण

भूषण वीरकाव्य के श्रेष्ठ कवि है। इनके काव्य में कल्पना और पुराण की तुलना में इतिहास से अधिक सहायता ली गई है। कल्पना का प्रयोग कवि ने उतना ही किया गया है जिससे किसी तथ्य को प्रकाश में लाया जा आगे पढ़ें


हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन में प्रयुक्त इतिहास दृष्टियों की सीमा

सारांश - इतिहास अतीत की पुनर्व्याख्या है, जो सत्य और तर्कों पर आधारित होती है। अतीत की इस पुनर्व्याख्या द्वारा ही मानव अपनी ग़लतियों से सबक लेता है और उपलब्धियों से प्रेरणा। हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन का प्रथम प्रयास आगे पढ़ें


समीक्षा

जो कविता है! - प्रो. गोपाल शर्मा

जो कविता है! - प्रो. गोपाल शर्मा

समीक्ष्य पुस्तक : कुछ कोलाहल, कुछ सन्नाटा लेखिका : गुर्रमकोंडा नीरजा संस्करण: 2019 मूल्य : 150 ₹ पृष्ठ : 120 ISBN : 978-93-84068-78-3 प्रकाशक : नजीबाबाद, परिलेख प्रकाशन वितरक : हैदराबाद, श्रीसाहिती प्रकाशन।  मोबाइल : 9849986346  यदि आप मेरे इस आगे पढ़ें


वर्तमान का आईना : ‘संपादकीयम्’

वर्तमान का आईना : ‘संपादकीयम्’

समीक्षित कृति : संपादकीयम् (लेख/पत्रकारिता) लेखक- ऋषभदेव शर्मा आईएसबीएन: 97893-84068-790 प्रकाशक- परिलेख, नजीबाबाद वितरक- श्रीसाहिती प्रकाशन,  हैदराबाद : मोबाइल +91 98499 86346 ‘संपादकीयम्’(2019) ऋषभदेव शर्मा के चुनिंदा संपादकीयों का संग्रह है। ये संपादकीय नियमित रूप से हैदराबाद के एक दैनिक आगे पढ़ें


शब्दहीन का बेमिसाल सफ़र - डॉ. गोपाल शर्मा

शब्दहीन का बेमिसाल सफ़र - डॉ. गोपाल शर्मा

समीक्षित कृति : संपादकीयम् (लेख/ पत्रकारिता) लेखक : ऋषभदेव शर्मा आईएसबीएन : 97893-84068-790 प्रकाशक : परिलेख, नजीबाबाद वितरक : श्रीसाहिती प्रकाशन, हैदराबाद  मोबाइल +91 98499 86346 ‘संपादकीयम्’ पुस्तक में संकलित और ‘डेली हिंदी मिलाप’ में पूर्व प्रकाशित विभिन्न सामयिक विषयों आगे पढ़ें


संस्मरण

30 - म्यूज़िक सिस्टम

12 जुलाई  2003  म्यूज़िक सिस्टम मेरे पास फ्लिप्स का पोर्टेबल म्यूज़िक सिस्टम (Portable music system)। क़रीब 15 साल काम करते-करते वह थक चुका था और मैं- उसका इलाज कराते-कराते थक चुकी थी। अंत में मैंने उसे अपने घर से हटा आगे पढ़ें


मेरे बाबूजी

आदर, प्यार, मनुहार, स्नेह, ममता, शिक्षा, सुरक्षा इत्यादि कितने ही मधुर मिश्रित भावों के साकार रूप का नाम है – बाबूजी। जिन बचपन की स्मृतियों में खो कर हम समय-समय पर आजीवन आनंदित होते रहते हैं, उसी बचपन की सहजता आगे पढ़ें


कविताएँ

शायरी

समाचार

साहित्य जगत - कैनेडा

राम तुम्हारा वृत्त स्वयं ही काव्य है…

राम तुम्हारा वृत्त स्वयं ही काव्य है…

17 Apr, 2019

हिन्दी राइटर्स गिल्ड की अप्रैल, 2019 मासिक गोष्ठी   ’हिन्दी साहित्य में राम के विभिन्न रूप’ विषय पर इस शनिवार,…

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’केसरिया फागुन’: हिन्दी राइटर्स गिल्ड की पुलवामा शहीदों को रचनात्मक श्रद्धांजलि

’केसरिया फागुन’: हिन्दी राइटर्स गिल्ड की पुलवामा शहीदों को रचनात्मक श्रद्धांजलि

30 Mar, 2019

हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने ९ मार्च २०१९ को ब्रैमप्टन की स्प्रिंगडेल शाखा लाइब्रेरी में दोपहर १.३० से ४.३० बजे एक…

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हिम की चादर पे खेले बसंत राज

हिम की चादर पे खेले बसंत राज

22 Feb, 2019

फरवरी 09, 2019 - कैनेडा की जानी-मानी और बहुआयामी संस्था हिंदी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठी ०९ फ़रवरी २०१९ को…

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साहित्य जगत - भारत

मानवता की प्रबल वकालत की है प्रदीप श्रीवास्तव ने : शिवमूर्ति 

मानवता की प्रबल वकालत की है प्रदीप श्रीवास्तव ने : शिवमूर्ति 

19 Apr, 2019

प्रदीप श्रीवास्तव की कहानियाँ नव उदारवाद, उदारवाद और भूमंडलीकरण की कहानियाँ हैं : हरिचरण प्रकाश  यूपी प्रेस क्लब, लखनऊ में…

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‘प्रवासी हिंदी साहित्य : संवेदना के विविध संदर्भ’ विषयक द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

‘प्रवासी हिंदी साहित्य : संवेदना के विविध संदर्भ’ विषयक द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

14 Apr, 2019

मैसूर, 8 मार्च, 2019 -  प्रवासी हिंदी साहित्य का परिदृश्य वैश्विक बनता जा रहा है। हिंदी में रचे जा रहे प्रवासी…

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ऋषभदेव शर्मा की पुस्तक 'संपादकीयम्' लोकार्पित

ऋषभदेव शर्मा की पुस्तक 'संपादकीयम्' लोकार्पित

14 Apr, 2019

मैसूर, 7 मार्च, 2019 - मैसूर विश्वविद्यालय और केंद्रीय हिंदी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के अंतर्गत…

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साहित्य जगत - विदेश

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा कथा-कविता सम्मान घोषित

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा कथा-कविता सम्मान घोषित

26 Feb, 2019

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन अमेरिका ने अपने प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन ने अपने कथा-कविता सम्मान घोषित कर दिए…

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