• विशेषांक

    वर्ष 2020 कोरोना संकट के संदर्भ से बदलता जीवन
    वर्ष 2020 कोरोना संकट के संदर्भ से बदलता जीवन लेखकों से अनुरोध है कि वे अपनी रचनाएँ और लेख मई 15 तक अवश्य भेज दें। sahityakunj@gmail.com.. आगे पढ़ें
बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात
साहित्य के रंग शैलजा के संग - बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

कहानियाँ

आपसी भाईचारा

नंदीपुरा और खादीमगंज के बुज़ुर्गों ने गाँवों को निर्जन स्थान पर बसाया था। दोनों गाँवों के बुज़ुर्गों ने एक सद्भावनात्मक इच्छा के वशीभूत होकर और ताकि आपसी भाईचारा लोगों में बना रहे इसलिए नंदीपुरा में मस्जिद और खादीमगंज में मंदिर आगे पढ़ें


उलझन

उसकी ज़िंदगी में इतनी जल्दी-जल्दी घटनाएँ घटीं कि वह स्वयं हैरान रह जाती थी। वह औरों की ठहरी हुई क्रमबद्ध सहज ज़िंदगी देखती तो सोचती कि उसके लिये कुछ भी लिखते समय विधाता अक्कड़ बक्कड़ खेल कर लिखता रहा, या आगे पढ़ें


ऑक्सीजन

चार वर्षीय आदि देख रहा था घर में अफ़रा-तफ़री का माहौल था। उसने मासूमियत से अपनी माँ से पूछा, "माँ, ये ऑक्सीजन क्या होती है?" माँ समझ रही थी वो ये क्यों पूछ रहा है। उसके दादा जी को कोरोना आगे पढ़ें


कालू सियार की शैतानी 

कालू सियार सुबह से ही जंगल में घूम रहा था। वह बस इसी ताक में था कि कब जंगल में आग लगाए। सबसे पहले गौरैया के पास गया और बोला, "गौरैया दीदी पता है कल गिलहरी तुम्हारी ख़ूब बुराई कर आगे पढ़ें


डायरी का पन्ना – 005: मिलावटी घी बेचने वाला

एक मशहूर कहावत है कि “दूसरे की थाली में परोसा हुआ बैंगन भी लड्डू लगता है”। अपना जीवन तो हम सब जीते ही हैं लेकिन दूसरे की ज़िन्दगी में झाँक कर और उसे जी कर ही असलियत का पता चलता आगे पढ़ें


तरक़्क़ी

सुधीर के ऑफ़िस की रोज़-रोज़ की पार्टियों से मन पूरी तरह से ऊबने लगा था . . .वही लोग . . .वही हो-हल्ला . . . वही बेतुकी चापलूसी . . . वही साड़ी-ज़ेवर की नुमाइश . . . वही आगे पढ़ें


धर्म-भाई 

कार में बैठते ही दिल ऐसा प्रफुल्लित हो गया मानो बहुत बड़ा ख़ज़ाना मिल गया हो। पूरे 2 साल बाद मायके में कुछ दिन बिताने का मौक़ा मिला था। औरतें चाहे कितनी उम्र की हो जायें पर मायके जाने का आगे पढ़ें


नई दिशा

"महाजन, यह छाता रख लो और मुझे सौ रुपए दे दो," एक आदिवासी अधेड़ ने गल्ले के व्यापारी अजय चौधरी से विनती की और लगभग नया एक छाता सामने रखी चौकी पर रख दिया। बग़ल के गाँव के रामू की आगे पढ़ें


पहचान

राम जी बाबू काफ़ी सुखी-संपन्न व्यक्ति थे जिनकी उम्र साठ से ऊपर हो चली थी। दोनों बच्चे सेटल कर चुके थे और उन्होंने दोनों को विदेश जाने और प्रवासी बनने से नहीं रोका था। लेकिन इन्हें अपनी भूमि से इतना आगे पढ़ें


बंकू भैया 

कहानी पुरानी नही है, इसमें राजा और रानी भी नहीं हैं, कहते हैं कहानी वही अच्छी होती है जो आपकी और मेरी हो। ऐसी ही एक कहानी सुनाने जा रही हूँ।  10 साल के बच्चे की कहानी, आपकी और मेरी आगे पढ़ें


बिल्लो की भीष्म प्रतिज्ञा – 6

इतना कह कर बिल्लो ने लंबा कश लेकर बहुत सा धुँआ उगल दिया और काफ़ी कुछ को अंदर ही जज़्ब कर लिया। इसके उलट वो बातें एक भी जज़्ब नहीं कर रही थी। उसके इस रहस्योद्घाटन ने मुझे फिर अचंभित आगे पढ़ें


भटकती आत्मा!

चौबीसों घण्टे, नकारात्मकता से युक्त रोज़ाना ख़बरों में कोरोना वायरस के संक्रमण के बढ़ते मामलों और मृत्यु-दर के साथ-साथ असंख्य कहानियों को सुनते-देखते, ज़िंदगी अग्रसर है।  मार्च में लॉक-डाउन के बावजूद, तबलीगी जमातियों द्वारा सोची-समझी रणनीति के तहत दिल्ली से आगे पढ़ें


मूस और घूस

मूल कहानी: द पैलेस माउस एंड द गार्डन माउस; चयन एवं पुनर्कथन: इटलो कैल्विनो अँग्रेज़ी में अनूदित: जॉर्ज मार्टिन; पुस्तक का नाम: इटालियन फ़ोकटेल्स हिन्दी में अनुवाद: सरोजिनी पाण्डेय   एक था मूस (चूहे की वह प्रजाति जो घरों में आगे पढ़ें


मेरा कमरा

"भगवन्! एक स्त्री जिसे आज ही मृत्युलोक से लाया गया है, उसे कमरा न. 25 में भेजा जा रहा है। वैसे तो वह कमरा मोतीराम के नाम बुक है लेकिन उन्हें आने में अभी चार दिन का समय शेष है। आगे पढ़ें


मेहनती लड़का

पड़ोसिन का हाल-चाल पूछ जब मिसेज़ खन्ना अपने घर दाख़िल हुईं तो पति और बेटी को टीवी पर आ रहे फ़ुटबॉल मैच देखने में मस्त और बैठक की ख़स्ता हालत देख ऊँची आवाज़ में बोल उठीं, "मैं फिर से कहे आगे पढ़ें


मोक्ष

बाबा आत्माराम बचपन में ही घर छोड़कर निकल गए थे। कुछ साधु-संतों की संगति में रहते-रहते वे भी साधु हो गए। हर समय उनके ओठों पर ईश्वर का नाम रहता था। धीरे-धीरे उनकी ख्याति चारों ओर फैलने लगी। उनका प्रवचन आगे पढ़ें


रक्तबीज दानव

(कथा संग्रह "मोह के धागे"; प्रकाशक: बिम्ब प्रतिबिंब प्रकाशन)   "हैलो . . .हैलोओओ! रजत।" घबराई आवाज़ . . . "जी, पापा आप घबरा क्यों रहे हैं? क्या बात है?" लेकिन पापा की आवाज़ की टोन पर स्वयं उसके चेहरे आगे पढ़ें


राग-विराग – 013

जब भी नन्ददास का इधर चक्कर लगता है, भौजी के हाल-चाल लेना नहीं भूलते। जानते हैं दद्दू के समाचार पाने को वे भी व्याकुल होंगी। देवर होने का अपना फ़र्ज़ बख़ूबी निभा रहे हैं। यही चाहते हैं उनकी कुछ सहायता आगे पढ़ें


रूपा की शादी 

उसने एक बार फिर बालकॉनी से नीचे झाँककर देखा गली में अभी भी बहुत भीड़ थी। वो पिछले डेढ़ घंटे में करीब छह बार नीचे लोगों की आवाजाही को देखकर सहम जाता है और फिर अंदर जाकर निरुद्देश्य-सा बैठ जाता आगे पढ़ें


लाजवाब

नवंबर 2019 का वाक़या है। सान होजे, कैलिफ़ोर्निया में आयोजित एक दावत में हम दो दर्जन हिंदुस्तानियों के बीच वह अकेला अमेरिकी था। नितिन उसका मित्र था और हम सबको नितिन ने अपने जन्मदिन की दावत में बुलाया था। ख़ैर, आगे पढ़ें


विस्मृति

प्रकृति की गोद में बसी जन जातियाँ। निष्कपट और साफ़ दिल। आज भी आधुनिकता से दूर नैसर्गिक जीवन जीती हुई। कष्टतर परिस्थितियों को झेलने पर मजबूर। उपेक्षित, अशिक्षित, अपने संवैधानिक अधिकारों से अनभिज्ञ। इस आदिवासी समुदाय की महिलाओं की स्थिति आगे पढ़ें


वक़्त की मार

बड़े साहब के सामने हरकू माली हाथ जोड़े खड़ा था। उसे 'ग्रीन एंड ग्रीन' नामक इस लिमिटेड कंपनी में नौकरी मिले अभी सिर्फ़ तीन महीने हुए थे। अच्छी पगार थी और वह ख़ुश था। कल बड़े साहब की मेम साहब आगे पढ़ें


सपने और खिलौने

राजू सात साल का लड़का दिन भर पिता के साथ चाय दुकान में काम करता और रात को घोड़े बेच कर सोता। उसके सपने में नई बन रही फ़ैक्ट्री आती तो वो ख़ुश हो जाता। उसी के उम्र के लड़के आगे पढ़ें


हास्य/व्यंग्य

आज्ञाकारी पति की वाल से

कुत्तों की तरह ही पतियों की भी बहुत सी श्रेणियाँ होती हैं जिनमें से बहुतों पर शोध हो चुका है और बहुतों पर शोधार्थियों के बदले आदर्श पति ही शोध करने में जुटे हैं ताकि सही ढंग का शोध हो आगे पढ़ें


मानव श्रेष्ठ या तुच्छ

कौवे ने काँव -काँव की आवाज़ के साथ सभी को जंगल के मध्य स्थित ऊँचे टीले पर एकत्रित होने के लिए कहा। "क्या कोई ख़ास बात है, दादा?" नन्ही सी फुदकी ने फुदकते हुए कहा। "वो सब तो वहीं आकर आगे पढ़ें


आलेख

दक्खिनी का पद्य और गद्य : भारतीय साहित्य की अनमोल धरोहर 

भारत प्राचीन काल से ही अनेक भाषाओं और संस्कृतियों की जन्मस्थली रही है। भारतीय संस्कृति इस भूखंड में अनादि काल से विकसित अनगिनत भाषा रूपों के माध्यम से पुष्पित और पल्लवित होती रही है।  संस्कृत भारत की प्राचीनतम भाषा के आगे पढ़ें


विश्व पर्यावरण दिवस – वर्तमान स्थितियाँ और हम

“पृथ्वी हर मनुष्य की हर  ज़रूरत को पूरा कर सकती है, लेकिन हर व्यक्ति के लालच को नहीं।”- महात्मा गाँधी   पर्यावरण एक व्यापक शब्द है। यह उन संपूर्ण शक्तियों, परिस्थितियों एवं वस्तुओं का योग है, जो मानव जगत को आगे पढ़ें


समाज और मीडिया में साहित्य का स्थान

साहित्य एक ऐसा नियोजन है ऐसा माध्यम, ऐसी संप्रेरणा है जिसके पीछे किसी एक वर्ग-जाति-धर्म-समाज-समूह-संप्रदाय-देश के बजाय समस्त विश्व-समाज के कल्याण की भावना सन्निहित हो। साहित्यकार के पास भरपूर कल्पनाशीलता और विश्वदृष्टि होती है। साहित्य समाज रूपी शरीर की आत्मा आगे पढ़ें


हवाई यात्रा में यादों की उड़ान

उस दिन मैं और मेरे पति बिटिया के पास जाने के लिए दिल्ली से बंगलुरु की विमान-यात्रा कर रहे थे, सभी कुछ सामान्य रूप से संचालित हो रहा था। लगभग आधी यात्रा होने को आई, तब घोषणा हुई कि बाहर आगे पढ़ें


ख़त – 001: विरह भी प्रेम है

प्यारे दुष्ट, कहते हैं जिससे जितना प्रेम होता है, उससे उतनी ही शिकायतें भी होती हैं। मगर ये शिकायतें कभी प्रेम को नहीं निगलतीं। आज अगर तुम्हारी शिकायतें लिखने बैठूँ—तो किताबें कम पढ़ जाएँगी। मगर अंतिम पृष्ठ पर लिखा मात्र आगे पढ़ें


समीक्षा

परछाइयों का जंगल : मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों का सुंदर गुलदस्ता

परछाइयों का जंगल : मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों का सुंदर गुलदस्ता

समीक्षित पुस्तकः परछाइयों का जंगल लेखिका: देवी नागरानी वर्ष: 2019 मूल्यः 350 रु. पन्नेः160 प्रकाशकः भारत श्री प्रकाशन,  10/119, सूरजमल पार्क साईड, पटेल गली शहादरा, दिल्ली, 110032. shilalekhbooks@rediffmail.com 'परछाइयों का जंगल'कहानी-संग्रह लेखिका आदरणीया देवी नागरानी जी का सिंधी में लिखित आगे पढ़ें


मीरा याज्ञिक की डायरी 

मीरा याज्ञिक की डायरी 

त्रैमासिक पत्रिका: विश्व गाथा का अप्रैल-जून 2020 अंक संपादक: श्री पंकज त्रिवेदी सम्पादकीय कार्यालय: विश्व गाथा,  गोकुलपार्क सोसायटी, 80 फीट रोड,  सुरेंद्रनगर - 363002 (गुजरात)  विश्व गाथा एक साहित्यिक एवं स्तरीय त्रैमासिक पत्रिका है। विश्व गाथा का अप्रैल-जून 2020 अंक आगे पढ़ें


संस्मरण

अमावस्या की रात

ज़रूरी नहीं कि हर अमावस्या की कहानी भूत-प्रेत संबंधित ही हो। कुछ अन्तर्ज्ञान की, अंधकार से उजाले की ओर के सफ़र से संबंधित संभावना भरी भी हो सकती है। जिसका मनुष्य के भावी जीवन पर अमिट गहरा प्रभाव बन कर आगे पढ़ें


आर. बी. भण्डारकर – डायरी 006 : प्रतिरोधक क्षमता

दिनांक 10 जून 2021 कोविड-19 की दूसरी लहर ने लोगों को हिलाकर रख दिया है।  कुछ दिनों पहले जो व्यक्ति अच्छा-भला था, 10-15 दिन बाद ही उसके दुनिया छोड़ने की सूचनाएँ मिलने लगती हैं।  ऐसे समाचार मन विचलित कर देते आगे पढ़ें


मृत्यु उपरांत व्यक्ति का दर्शन 

आत्म कथ्य: जो लिखने जा रही हूँ वह घटना सन्१९८७ के मई या जून की है। कई बार लिखने का मन हुआ पर यह सोच कर नहीं लिखा कि ऐसी बातें अंधविश्वास बढ़ाती हैं। यह नितांत व्यक्तिगत अनुभव व अहसास हैं, आगे पढ़ें


शिमला डायरी

शिमला डायरी

दिन तो रोज़ आते हैं और बीत जाते हैं। पर कोई-कोई दिन इतना अलग होता है कि उसे याद करना यक़ीनन सुखद लगता है। दिल चाहता है उस दिन की समृति को बार-बार दोहराया जाय। पहाड़ी क्षेत्रों पर जाना मेरे आगे पढ़ें


सच्चा मित्र है बरगद का वृक्ष

सुबह तैयार होकर बी०आर०डी० मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में अपनी साइकिल से ड्यूटी जा रहा था। उसी समय माता जी का कॉल आया, माँ बोली, "बेटा जो अपने आँगन में बरसों पुराना बरगद का पेड़ लगा हुआ है। उसे परिवार के आगे पढ़ें


होनहार हिमांशी  

कहते हैं होनहार बिरवान के होत चीकने पात। हिमांशी बहुत ग़रीब और अशिक्षित परिवार की बच्ची थी। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उसकी पढ़ाई में गहरी लगन व निष्ठा थी, इसी वज़ह से सारे अध्यापकों को वह अति प्रिय थी। वह आगे पढ़ें


साक्षात्कार

कुमार रवीन्द्र से अवनीश सिंह चौहान की बातचीत

[10 जून 1940, लखनऊ, उत्तर प्रदेश में जन्मे प्रतिष्ठित साहित्यकार कुमार रवींद्र ने 1958 में लखनऊ विश्वविद्यालय से एम.ए. (अंग्रेज़ी साहित्य) की उपाधि प्राप्त करने के बाद दयानंद कॉलेज, हिसार (हरियाणा) में अंग्रेज़ी शिक्षक के रूप में कार्य किया और आगे पढ़ें


कविताएँ

शायरी

समाचार

साहित्य जगत - कैनेडा

विश्वरंग 2020 - कैनेडा  सत्र नवम्बर 07

विश्वरंग 2020 - कैनेडा सत्र नवम्बर 07

29 Nov, 2020

रिपोर्ट- आशा बर्मन  कैनेडा के हिंदी-प्रेमियों के लिए 7 नवम्बर 2020 एक अविस्मरणीय दिन रहेगा। इसी दिन पहली बार कैनेडा…

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शिशिर की एक शाम, नृत्य-नाट्योत्सव के नाम

शिशिर की एक शाम, नृत्य-नाट्योत्सव के नाम

23 Nov, 2019

हिन्दी राइटर्स गिल्ड का 11वां वार्षिकोत्सव   नवंबर 17, 2019 मिसीसागा -  टोरोंटो में पिछले ग्यारह वर्षों से अपने एक…

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शरद्‌ काव्योत्सव मासिक गोष्ठी - अक्तूबर 2019

शरद्‌ काव्योत्सव मासिक गोष्ठी - अक्तूबर 2019

25 Oct, 2019

१९ अक्तूबर २०१९—हिन्दी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठी ब्रैम्पटन लाइब्रेरी के सभागार में संपन्न हुई। पतझड़ के मोहक रंगों से…

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साहित्य जगत - भारत

सुंदर चित्रकारी तथा पौधारोपण के माध्यम से ठाकुरद्वारा स्कूल के बच्चों ने दिया पर्यावरण सुरक्षा का सुंदर संदेश

सुंदर चित्रकारी तथा पौधारोपण के माध्यम से ठाकुरद्वारा स्कूल के बच्चों ने दिया पर्यावरण सुरक्षा का सुंदर संदेश

5 Jun, 2021

कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश राजकीय उच्च विद्यालय ठाकुरद्वारा में मनाया गया ऑनलाइन पर्यावरण दिवस। बच्चों ने पर्यावरण सुरक्षा संबंधी संदेश देने…

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राजकीय उच्च विद्यालय ठाकुरद्वारा ने करवाई कोरोना पेंटिंग प्रतियोगिता

राजकीय उच्च विद्यालय ठाकुरद्वारा ने करवाई कोरोना पेंटिंग प्रतियोगिता

26 May, 2021

कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश— राजकीय उच्च विद्यालय ठाकुरद्वारा द्वारा बच्चों को कोरोना के प्रति जागृत करने के लिए कोरोना पेंटिंग प्रतियोगिता…

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अभिनन्दन! अभिनन्दन!

अभिनन्दन! अभिनन्दन!

12 Mar, 2021

श्रेष्ठ साहित्यकार, संवेदनशील व्यक्तित्त्व एवं ऊर्जावान एवं चंदन चर्चित चरित्र के स्वामी परम सम्माननीय डॉ. राजकुमार आचार्य जी के पाणि…

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साहित्य जगत - विदेश

वातायन के इतिहास में एक शानदार सम्मान-समारोह

वातायन के इतिहास में एक शानदार सम्मान-समारोह

25 Nov, 2020

डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक’ और श्री मनोज मुंतशिर वातायन-यूके द्वारा सम्मानित   लंदन, 21 नवंबर 2020: वातायन का वार्षिक समारोह…

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तेजेन्द्र शर्मा के कविता संग्रह ‘टेम्स नदी के तट से’ का लोकार्पण नेहरू सेन्टर लंदन के मंच से...

तेजेन्द्र शर्मा के कविता संग्रह ‘टेम्स नदी के तट से’ का लोकार्पण नेहरू सेन्टर लंदन के मंच से...

29 Sep, 2020

• कथा यू.के. संवाददाता भारतीय उच्चायोग लंदन, नेहरू सेन्टर लंदन एवं एशियन कम्यूनिटी आर्ट्स ने एक साझे कार्यक्रम में तेजेन्द्र…

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ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा-कविता सम्मान घोषित

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा-कविता सम्मान घोषित

28 May, 2020

(सभी सम्मान लेखिकाओं को) ममता कालिया, उषाकिरण ख़ान, अनिलप्रभा कुमार, प्रज्ञा, रश्मि भारद्वाज तथा गरिमा संजय दुबे होंगे सम्मानित ढींगरा…

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फीजी का हिन्दी साहित्य

साहित्यकुञ्ज पत्रिका ’फीजी का हिन्दी साहित्य’ विषय पर नवंबर में विशेषांक प्रकाशित करने वाली हैं। उद्देश्य यह है कि फीजी की सांस्कृतिक और हिन्दी की साहित्यिक संपदा पाठकों के सामने रख सकें। हमारा फीजी के लेखकों और फीजी से जुड़े सभी लोगों से सादर आग्रह है कि आप अपनी कविताएँ, कहानियाँ, साहित्यिक लेख, संस्मरण, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि आदि साहित्यकुंज पत्रिका के लिए भेजियेगा। साहित्यकुंज पत्रिका के संपादक हैं: सुमन कुमार घई। इस विशेषांक की संपादक हैं: डॉ. शैलजा सक्सेना; सह-संपादक: सुभाषिणी लता कुमार (लौटुका, फीजी) ये रचनाएँ अक्तूबर 18, 2020 तक अवश्य भेज दीजिए। कृपया इन रचनाओं को आप इन ई-मेल पतों पर भेजिए: shailjasaksena@gmail.com sampadak@sahityakunj.net
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