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    कैनेडा का हिंदी साहित्य
    कैनेडा का हिंदी साहित्य साहित्यकुंज.नेट पत्रिका चार सफल विशेषांकों (सुषम बेदी विशेषांक, दलित साहित्य विशेषांक,.. आगे पढ़ें
मंज़िल की तलाश
लेखक: डॉ. शिवांगी श्रीवास्तव - मंज़िल की तलाश

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

कहानियाँ

अपनी-अपनी विवशता

विधवा बूढ़ी काकी गाँव के खंडहर घर में अकेली वर्षों से रहती थी। एक बेटी, दो बेटे-बहुएँ, नाती-पोते से भरपूर उसका परिवार था लेकिन बूढ़ी काकी के दुःख–सुख का साथी कोई नहीं था। हाँ जब-जब फ़सल आती तब-तब बेटे आमदनी आगे पढ़ें


एक्टर की मौत – हत्या या आत्महत्या

सुबह के आठ बजे बज रहे थे। गणेश भोजनालय में हलकी-सी भीड़ थी। चाय-नाश्ते के लिये लोग जमा थे। मंदेश गुजरैल ने भोजनालय में प्रवेश करते ही यहाँ-वहाँ देखा और एक परिचित की टेबल पर उसके सामने की कुर्सी पर आगे पढ़ें


कुनबेवाला

(१) “ये दीये गिन तो।” मेरे माथे पर दही-चावल व सिन्दूर का तिलक लगा रही माँ मुस्कुराती है। वह अपनी पुरानी एक चमकीली साड़ी पहने है। उस तपेदिक से अभी मुक्त है जो उस ने तपेदिक-ग्रस्त मेरे पिता की संगति आगे पढ़ें


गंदी लड़की

"ऑफ़िस के साफ़-सफ़ाई के काम के लिए मुझे गंदी लड़की की आवश्यकता है" मालिक के इस तरह के जवाब पर कलमंजरी अचंभित थी। कलमंजरी ने पंखे की तरफ़ दृष्टि डाल कुछ अनुभव किया और उस अनुभव को मन में दबाकर आगे पढ़ें


छोटकी और मोटा हाथी

चींटियों का झुंड भोजन की तलाश में निकला था कि रास्ते पर मोटे हाथी ने एक चींटी को कुचल दिया और अपनी बाहु की ताक़त दिखाने लगा। चींटियों का झुंड उसकी इस करतूत को अनदेखा कर और आगे बढ़ा। उन्हें आगे पढ़ें


टॉमी और बंदर

बच्चों आज तुम्हें टॉमी और बंदरों की मनोरंजक कहानी सुनाना चाहती हूँ पर सोचती हूँ कि पहले टॉमी का परिचय दूँ या बंदरों का। चलो दातागंज के नटखट बंदरों का ही परिचय पहले कराती हूँ। वैसे तो बंदर हर स्थान आगे पढ़ें


डायरी का पन्ना – 008 : मैडिकल डॉक्टर

एक मशहूर कहावत है कि “दूसरे की थाली में परोसा हुआ बैंगन भी लड्डू लगता है”। अपना जीवन तो हम सब जीते ही हैं लेकिन दूसरे की ज़िन्दगी में झाँक कर और उसे जी कर ही असलियत का पता चलता आगे पढ़ें


तीन कुँवारियाँ

मूल कहानी: द थ्री क्रोन्स; चयन एवं पुनर्कथन: इतालो कैल्विनो अंग्रेज़ी में अनूदित: जॉर्ज मार्टिन; पुस्तक का नाम: इटालियन फ़ोकटेल्स हिन्दी में अनुवाद: सरोजिनी पाण्डेय प्रिय पाठको, लोककथाएँ, चाहे वे किसी भी देश अथवा संस्कृति से जुड़ी हों, सदियों से आगे पढ़ें


नक़ाबपोश रिश्ते

दिव्या गाँव में रहने वाली एक भोली-भाली सी लड़की थी और उसके पिता रायसेन ज़िले के एक छोटे से क़स्बे के सरपंच। गाँव बहुत छोटा था, इस कारण वहाँ के निवासियों को बहुत कम सुविधाएँ मिल पातीं थी। गाँव में आगे पढ़ें


प्रेम प्यासा

लाल जोड़े में सजी-सँवरी बैठी कल्पना, कल्पना के अथाह सागर में गोते लगा रही थी, रात में मनायी सुहागरात का रसानुभव कर रही थी कि अचानक उस पर कुठाराघात हुआ, मन-मस्तिष्क विदीर्ण हो गया क्योंकि अमोल ने आते ही प्रश्न आगे पढ़ें


भाँड

वह अपने पिता जी की  वीर रस की कविताओं को सुनते हुए बड़ा हुआ था। उनकी लिखी कई पंक्तियाँ या यूँ कहें कि कई  कविताये तो उसे ज़बानी याद थीं। "अपनी जान लुटा देंगे, हम लाखों शीश चढ़ा देंगे; ये आगे पढ़ें


विडम्बना

"सुना है - चाँद पर पानी खोज रहा है विज्ञान?" अशिक्षित औरत ने शिक्षित औरत से पूछा।  शिक्षित औरत ने उत्तर दिया, "सही सुना है तुमने?" अशिक्षित औरत ने फिर पूछा, "क्या धरती पर पानी सच में बिलकुल नहीं बचा? आगे पढ़ें


विसर्जन

शाम के 7 बजकर 40 मिनट हो रहे थे। स्निग्धा रोज़ की तरह अपने रसोई के कार्य में व्यस्त थी। बीच-बीच में खिड़की से गणपति के निमज्जन में मग्न कॉलोनी वालों के उत्साह को देख लेती थी। उसके विवाह के आगे पढ़ें


सम्मान

पति के चेहरे पर निराशा के भाव देखकर पत्नी ने कहा, "आज भी किसी ने नहीं सुनी! मैं कहती हूँ छोड़ो ऑफ़िस का चक्कर। साग रोटी से ही दिन कट जायेंगे।" "पहले एक ग्लास पानी तो पिलाओ, कड़ी धूप से आगे पढ़ें


सुबह अभी हुई नहीं थी 

सुबह अभी हुई नहीं थी। सूरज निकलने में अभी कुछ वक़्त और था। रात के कालेपन और सुबह के उजालेपन के बीच जो धूसर होता है वह अपने चरम पर चमक रहा था। चारों तरफ़ एक सर्द ख़ामोशी छाई थी।  आगे पढ़ें


सेकेण्ड वाइफ़ – 1

नवंबर का दूसरा सप्ताह बस जाने ही वाला था। मौसम बहुत सुहावना हो रहा था। लेकिन मेरा मन बड़ा अशांत था। थका-थका सा, अपना स्ट्रॉली बैग खींचता हुआ ट्रेन की एक बोगी में चढ़ गया। कई सीटों पर इधर-उधर दृष्टि आगे पढ़ें


स्वागत

ताऊ भरथु जवानी से ही ऐसे दल का समर्थन करते रहे, जिसका गाँवों में कोई जनाधार नहीं था, जिससे हर चुनाव के बाद ताऊ को मन मसोसकर रह जाना पड़ता था। लेकिन वक़्त ने पलटा खाया, इस बार उस दल आगे पढ़ें


हरतालिका-तीज

“अच्छा-ख़ासा मूड था आपका, यूँ अकस्मात आपके सलोने चेहरे पर तनाव की बदलियाँ क्यों मँडराने लगी मोहतरमा? आपकी शान में कोई गुस्ताख़ी की हो, याद नहीं। समस्या को ज़ुबाँ तक आने का कष्ट दें तो मदद करूँ।” “यह सास बहू आगे पढ़ें


हसरतों का ख़ून

लेखक: रिज़वान गुल सिंधी से हिन्दी में अनुवाद: देवी नागरानी  रात के मौन सन्नाटे में बड़े से घर के एक अंधकारपूर्ण कमरे में से निरंतर एक बूढ़े शख़्स के खाँसने की आवाज़ आ रही है। उसका बेटा एयर कंडीशन कमरे आगे पढ़ें


हास्य/व्यंग्य

आश्वासन मय सब जग जानी

इधर ज्यों ही साँपों की नज़र अख़बार में छपी इस ख़बर पर पड़ी कि देश भर में विश्व मच्छर दिवस धूमधाम से ही नहीं मनाया गया अपितु मच्छर मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रीजी ने इस मौक़े पर हर वर्ग आगे पढ़ें


जिसकी लाठी उसकी भैंस

"जिसकी लाठी, उसकी भैंस" बचपन में पढ़ा तो मेरी नज़र हमेशा लाठी लिए व्यक्ति को ताकती रहतीं। सही भी लगा। मैंने देखा, कोई व्यक्ति हाथ में लाठी लिए जा रहा है और उसकी भैंस कभी पगुराती, कभी बीच- बीच में आगे पढ़ें


बार्टर सिस्टम

बरसों पहले नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने एक नारा दिया था “तुम मुझे ख़ून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा“। अच्छी पहल थी देश में इस नारे को आज भी बहुत इज़्ज़त दी जाती है। लोग नेता जी के एक आह्वान आगे पढ़ें


आलेख

आधुनिक जीवन यथार्थ को बयां करती मंगत बादल की कविताएँ

(डॉ. मंगत बादल कृत कविता-संग्रह ‘अच्छे दिनों की याद में’ के संदर्भ में)   समकालीन कवि डॉ. मंगत बादल हिन्दी व राजस्थानी का एक चिरपरिचित नाम है। कवि बादल रायसिंहनगर, ज़िला श्रीगंगानगर में चार-पाँच दशकों से निरन्तर साहित्य सृजन कर आगे पढ़ें


जैन धर्म और पर्यूषण पर्व

जैन धर्म को हिंदू समाज का ही अंग माना जाता है। जैन समाज के लोग आपको प्राय: मंदिरों में हमारे साथ ही व्रत त्यौहार और परम्परायें मनाते देखा है। सभ्यता और संस्कृति की दृष्टि से भी कोई भिन्नता नहीं दृष्टिगोचर आगे पढ़ें


मेरा शहर बनारस

करोना काल के कारावास के बाद कृष्ण जन्माष्टमी मनाने के लिए 'अपने शहर' वाराणसी (काशी )आना हुआ। यह वाराणसी मेरी 'ससुराल' है। इस शहर से मेरा नाता पाँच दशकों से भी अधिक का है। विवाह से पूर्व स्नातक शिक्षा के आगे पढ़ें


समीक्षा

आम आदमी के पक्ष में खड़ी कविताएँ

आम आदमी के पक्ष में खड़ी कविताएँ

आलोच्य पुस्तक: नई रोपणी (कविता संग्रह) लेखक: सुरेश उपाध्याय  प्रकाशक: बोधि प्रकाशन, सी-46, सुदर्शनपुरा इंडस्ट्रियल एरिया एक्सटेंशन, नाला रोड, 22 गोदाम, जयपुर - 302006   आईएसबीएन नंबर: 978-93-89831-76-4 मूल्य: 120 रुपए “नई रोपणी” सुपरिचित कवि-साहित्यकार श्री सुरेश उपाध्याय का दूसरा आगे पढ़ें


रामनारायण रमण कृत ‘जोर लगाके हइया’

रामनारायण रमण कृत ‘जोर लगाके हइया’

समीक्ष्य पुस्तक: जोर लगाके हइया लेखक: रामनारायण रमण प्रकाशक: जयपुर : बोधि प्रकाशन संस्करण: 2021 मूल्य: रु. 150/- पृ. संख्या: 116 ISBN: 978-93-90827-71-8 अनादिकाल से भारतीय वाङ्मय में मंगल-मन्त्रों की महत्ता का वर्णन मिलता है। इसका मुख्य कारण यह है आगे पढ़ें


संवाद यात्रा : कुछ अनछुए पहलू

संवाद यात्रा : कुछ अनछुए पहलू

पुस्तक का नाम: संवाद यात्रा लेखक: प्रो. चंदन कुमार प्रकाशक: संचय प्रकाशन, सोनिया विहार, दिल्ली-110090 संस्करण: 2020 मूल्य: 200 रुपए पृष्ठ: 150 प्रस्तुत पुस्तक ‘संवाद यात्रा’ प्रो. चन्दन कुमार द्वारा दिए गये वक्तव्यों की विचार यात्रा है। तकनीक ने यह आगे पढ़ें


स्त्रियाँ घर लौटती हैं

स्त्रियाँ घर लौटती हैं

पुस्तक: स्त्रियाँ घर लौटती हैं (काव्य संग्रह) लेखक: विवेक चतुर्वेदी प्रकाशक: वाणी प्रकाशन वर्ष: 2020 पृष्ठ संख्या: 108 मूल्य: ₹165.00 स्त्रियाँ घर लौटती हैं कवि की पर कविता पढ़ते हुए हृदय की तान स्वयं ही कविता का स्वर बन कर खेलने आगे पढ़ें


साक्षात्कार

यूनिकोड ने हिंदी में नियमित लेखन का अवसर दिया : अनुराग शर्मा 

अनुराग शर्मा अमेरिका में रहकर भारतीय भाषा, साहित्य और संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं और इस उद्देश्य में नवीन तकनीक और प्रोद्योगिकी का भरपूर प्रयोग कर रहे हैं। हिंदी कहानी, कविता लेखन में भी आपकी विशेष रुचि है। आपने आगे पढ़ें


कविताएँ

शायरी

समाचार

साहित्य जगत - कैनेडा

विश्वरंग 2020 - कैनेडा  सत्र नवम्बर 07

विश्वरंग 2020 - कैनेडा सत्र नवम्बर 07

29 Nov, 2020

रिपोर्ट- आशा बर्मन  कैनेडा के हिंदी-प्रेमियों के लिए 7 नवम्बर 2020 एक अविस्मरणीय दिन रहेगा। इसी दिन पहली बार कैनेडा…

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शिशिर की एक शाम, नृत्य-नाट्योत्सव के नाम

शिशिर की एक शाम, नृत्य-नाट्योत्सव के नाम

23 Nov, 2019

हिन्दी राइटर्स गिल्ड का 11वां वार्षिकोत्सव   नवंबर 17, 2019 मिसीसागा -  टोरोंटो में पिछले ग्यारह वर्षों से अपने एक…

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शरद्‌ काव्योत्सव मासिक गोष्ठी - अक्तूबर 2019

शरद्‌ काव्योत्सव मासिक गोष्ठी - अक्तूबर 2019

25 Oct, 2019

१९ अक्तूबर २०१९—हिन्दी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठी ब्रैम्पटन लाइब्रेरी के सभागार में संपन्न हुई। पतझड़ के मोहक रंगों से…

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साहित्य जगत - भारत

तृतीय अखिल भारतीय लघुकथा सम्मेलन का आयोजन

तृतीय अखिल भारतीय लघुकथा सम्मेलन का आयोजन

23 Sep, 2021

संस्था 'क्षितिज' द्वारा तृतीय अखिल भारतीय लघुकथा सम्मेलन 2021 का आयोजन 26 सितंबर, 2021 रविवार को सुबह 10.00 बजे से…

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अभिनव बालमन के नए अंक का हुआ विमोचन

अभिनव बालमन के नए अंक का हुआ विमोचन

17 Sep, 2021

अलीगढ़। बाल रचनाकारों की राष्ट्रीय पत्रिका ‘अभिनव बालमन’ के 12वें वर्ष के 44वें अंक का विमोचन मॉरीशस इण्टरनेशनल स्कूल में…

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भारतीय साहित्य मानव जाति की प्राचीन ज्ञान परंपरा का दर्पण है : प्रो. अवधेश प्रधान

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16 Sep, 2021

हिंदू कॉलेज में डॉ. दीपक सिन्हा स्मृति व्याख्यान का आयोजन नई दिल्ली। ‘भारतीय साहित्य की अवधारणा भारत से जुड़ी है।…

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साहित्य जगत - विदेश

पंकज सुबीर को रूस का पुश्किन सम्मान

पंकज सुबीर को रूस का पुश्किन सम्मान

2 Sep, 2021

30 अगस्त 2021 – मास्को। मानवीय सरोकारों के पैराकार हिन्दी के चर्चित लेखक पंकज सुबीर को रूस का पुश्किन सम्मान-2017…

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वातायन के इतिहास में एक शानदार सम्मान-समारोह

वातायन के इतिहास में एक शानदार सम्मान-समारोह

25 Nov, 2020

डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक’ और श्री मनोज मुंतशिर वातायन-यूके द्वारा सम्मानित   लंदन, 21 नवंबर 2020: वातायन का वार्षिक समारोह…

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तेजेन्द्र शर्मा के कविता संग्रह ‘टेम्स नदी के तट से’ का लोकार्पण नेहरू सेन्टर लंदन के मंच से...

तेजेन्द्र शर्मा के कविता संग्रह ‘टेम्स नदी के तट से’ का लोकार्पण नेहरू सेन्टर लंदन के मंच से...

29 Sep, 2020

• कथा यू.के. संवाददाता भारतीय उच्चायोग लंदन, नेहरू सेन्टर लंदन एवं एशियन कम्यूनिटी आर्ट्स ने एक साझे कार्यक्रम में तेजेन्द्र…

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फीजी का हिन्दी साहित्य

साहित्यकुञ्ज पत्रिका ’फीजी का हिन्दी साहित्य’ विषय पर नवंबर में विशेषांक प्रकाशित करने वाली हैं। उद्देश्य यह है कि फीजी की सांस्कृतिक और हिन्दी की साहित्यिक संपदा पाठकों के सामने रख सकें। हमारा फीजी के लेखकों और फीजी से जुड़े सभी लोगों से सादर आग्रह है कि आप अपनी कविताएँ, कहानियाँ, साहित्यिक लेख, संस्मरण, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि आदि साहित्यकुंज पत्रिका के लिए भेजियेगा। साहित्यकुंज पत्रिका के संपादक हैं: सुमन कुमार घई। इस विशेषांक की संपादक हैं: डॉ. शैलजा सक्सेना; सह-संपादक: सुभाषिणी लता कुमार (लौटुका, फीजी) ये रचनाएँ अक्तूबर 18, 2020 तक अवश्य भेज दीजिए। कृपया इन रचनाओं को आप इन ई-मेल पतों पर भेजिए: shailjasaksena@gmail.com sampadak@sahityakunj.net
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