• विशेषांक

    वर्ष 2020 कोरोना संकट के संदर्भ से बदलता जीवन
    वर्ष 2020 कोरोना संकट के संदर्भ से बदलता जीवन लेखकों से अनुरोध है कि वे अपनी रचनाएँ और लेख मई 15 तक अवश्य भेज दें। sahityakunj@gmail.com.. आगे पढ़ें
बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात
साहित्य के रंग शैलजा के संग - बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

कहानियाँ

अचूक

फोन किया, “आपको याद होगा, मैंने एक निवेदन किया था।” “कैसा निवेदन?” “आपकी पत्रिका में कहानी छपी थी मगर मुझे प्रति नहीं मिली। पाठकों के पत्रों से जानकारी मिली।” “मुझसे क्या चाहते हैं?” “पिछली बार मैंने प्रति दोबारा भेजने का आगे पढ़ें


अधीरता

वरिष्ठ लेखक ने समाचार पत्र के साहित्य परिशिष्ट के सुपरिचित अपेक्षाकृत युवा प्रभारी सम्पादक को व्हाट्सएप पर संदेश भेजा, “रचना प्रकाशित हुए चार महीने हो गये हैं। लगता है, पारिश्रमिक अब तक नहीं भेज पाये हैं!” उत्तर नहीं आया मगर आगे पढ़ें


अपनी जरें

(बुंदेली लघुकथा )   "तुमसे कित्ती बेर कही के शहर चलो मन तुम ने मान हो, इते का हडगा गड़े हैं," मुकेश कछु ज्यादै गुस्सा में थो। भोत दिनों से वो बाई बब्बा है शहर ले जावे की जुगत में आगे पढ़ें


औलाद के लिए माँ की चाहत

भगवान विष्णु और लक्ष्मी के बीच ’माँ अपनी सन्तान के लिए क्या चाहती है?’  विषय पर बहुत वाद-विवाद होता रहा। और अन्त में विष्णु को लक्ष्मी ने कहा– "प्रभु जाइए मर्त्यलोक में। ‌माँ सन्तान के लिए क्या चाहती है, वहीं आगे पढ़ें


खाद पानी

"उठो चुन्नू आज स्वतंत्रता दिवस है तुम्हे स्कूल नहीं जाना क्या?" मम्मी ने चुन्नू को आवाज़ लगाई। "नहीं मम्मी मैं नहीं जाऊँगा," चुन्नू ने अधनींदे स्वर में उत्तर दिया। "पर क्यों बेटा ये हमारा राष्ट्रीय पर्व है इसे उतने ही आगे पढ़ें


चिरैया बिना आँगन सूना

शहर की नई कॉलोनी में नए नए मकान बनते गए। सारी सुविधाओं का ख़्याल रखा गया। बस पुराने ज़माने जैसा रोशनदान नहीं दिखे जिसमें गौरैया, मैना, कबूतर अपना घोंसला बनाते थे। एक मकान की बालकनी में चिड़ियों को पानी पिलाने आगे पढ़ें


दमबाज़

इधर म्यान्मार इस पहली फरवरी से स्थापित किए गए सैन्य शासन के विरोध में मैं वहाँ की जनता के बढ़ रहे जुलूसों को देखती हूँ तो मुझे अपनी नानी के अधूरे उपन्यास का जन-विरोध याद आ जाता है। आज जिस आगे पढ़ें


दहशत

वातावरण में डर था। कोरोना से अधिक वायरस से संक्रमित हो जाने का आतंक सता रहा था। न टीका, न दवा, अँधेरा ही अँधेरा था। दुनिया का हर कोना भ्रमित था। हरएक बड़ा–छोटा, प्रभुत्व सम्पन्न–ग़रीब, विकसित–अविकसित, उन्नत–पिछड़ा देश हो या आगे पढ़ें


पश्चाताप

ज़िंदगी जो हमें सिखाती है शायद वह किसी पाठशाला में हमें सीखने को नहीं मिलता। वक़्त जैसे बेलगाम घोड़े की रफ़्तार की तरह भागता ही जा रहा था। ना जाने कब मैं ५९ वर्ष का एक बेबस इंसान हो गया आगे पढ़ें


फूस की सास

"माँ जी, आपके लिए तेल औटा दिया है . . . बस ठंडा होते ही बोतल में भर कर रख दूँगी . . . और आज रात से ही आपके घुटनों की मालिश शुरू . . . देखना कैसे सारा आगे पढ़ें


बिल्लो की भीष्म प्रतिज्ञा – 1

चार घंटे देरी से जब ट्रेन लखनऊ रेलवे स्टेशन पर रुकी तो ग्यारह बज चुके थे। जून की गर्मी अपना रंग दिखा रही थी। ग्यारह बजे ही चिल-चिलाती धूप से आँखें चुँधियाँ रही थीं। ट्रेन की एसी बोगी से बाहर आगे पढ़ें


ब्राह्मण 

चुनाव प्रचार चरम पर था। नेता जी एक गाँव में अपनी चुनावी सभा में भाषण दे रहे थे। जज़्बात की रौ में बहते हुए वे बोले, "ब्राह्मणों के साथ होने वाले किसी भी ज़ुल्म को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। मेरी आगे पढ़ें


मुनासिब

राष्ट्रीयकृत बैंक के प्रबन्धक का कमरा। मेज़ के उस तरफ यूनियन का नेता कुर्सी पर बैठा है। प्रबन्धक के होंठों पर मुस्कराहट और नेता के तेवरों पर बल है। “मैनेजर साहब, अगर आपका यही रवैया रहा तो मेरा कोई भी आगे पढ़ें


राग-विराग – 8

उस दिन रत्नावली ने कहा था, "मैं हूँ न तुम्हारे साथ।"  "हाँ, तुम मेरे साथ हो।" पर यहाँ आकर वे हार जाते हैं। अपनी बात कैसे कहें?  नहीं, नहीं कह सकते। रत्नावली से किसी तरह नहीं कह सकते।  मन में आगे पढ़ें


विज्ञान दिवस

पिछले साल का वाक़या है। उस दिन विज्ञान दिवस था और निदेशक ने मुख्य अतिथि के सामने उन्हें भाषण देने के लिए चुना था। वजह भी थी। उनका भाषण बेहद प्रभावी और ज्ञानवर्धक होता है। पूरी प्रयोगशाला में उनसे बेहतर आगे पढ़ें


होली के रंगों जैसी

इस बार की होली नई नवेली दुल्हन हीरा के लिए अद्भुत एहसास लेकर आई थी, क्योंकि यह उसके ब्याह के बाद की पहली होली थी। अभी-अभी नया घर-संसार, नया परिवार मिला था, नये लोगों के साथ त्यौहार मनाना था । आगे पढ़ें


ख़ैरात

दीनू से उसकी माँ ने पूछा, “डीलर के पास मिलने गया था; वहाँ कुछ मिला कि नहीं ? "नहीं मिला माँ,” दीनू ने सिर ना में हिला दिया और उदास होकर बैठ गया। "क्या कहा उसने?" माँ ने पूछा। “कह आगे पढ़ें


हास्य/व्यंग्य

कुविता में कविता

"जुड़ती है सड़क एक सड़क से  बासी रोटी ने महका रखा है घर को  मैं कौन, निश्चित मैं मौन हूँ टूटी हैं बेड़ियाँ, लड़कर थकी नहीं, सड़क का कूड़ा, समय से लड़ती कूची दिमाग़ का दही बनाती है कविता" जी आगे पढ़ें


जीवी और जीवी

हिन्दी भाषा अभी तलक मातृभाषा बनने की बाट जोह रही है। स्वर्गीय बाजपेयी जी के संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी में ऐतिहासिक भाषण के बावजूद आज भी हिन्दी वहाँ की अधिकृत भाषाओं में शामिल नहीं है।  कुछ सयानजनों का कहना आगे पढ़ें


मैं जब भ्रष्ट हुआ

मेरी नियुक्ति जब एक कमाऊ विभाग में हुई तो परिवार के लोगों और सगे - संबंधियों को आशा थी कि मैं शीघ्रातिशीघ्र भ्रष्ट बनकर राष्ट्र की मुख्यधारा में जुड़ जाऊँगा लेकिन आशा के विपरीत जब मैं एक दशक तक भ्रष्ट आगे पढ़ें


राजनीति के नमूने

ये ट्रम्पवा भी बड़ा बागड़बिल्ला निकला। बताओ तो भला, सत्तारी घूम रहे अपने पिट्ठुओं को इसने अमेरिकी संसद पर चढ़ा दिया। पठ्ठा अपनी हार मानने तक को तैयार नहीं!!!  तब तो पूरे चार साल नाच-गाना किया और कंधा उचकाते हुए आगे पढ़ें


रैशनेलिटि स्वाहा

जिस तरह घोर आदर्श से आदर्श प्रेमी प्रेम में और तो सब कुछ होता है, पर क़तई भी रैशनेल नहीं होता, जिस तरह आदर्श पति पत्नी धर्म में और तो सब कुछ होता है,  पर माशा भर भी रैशनेल नहीं आगे पढ़ें


आलेख

कोरोना काल में मिथकों से टूटता मोह

अब तक हमारा भारतीय समाज मिथकों की जकड़ में था। लेकिन कोरोना ने समाज के बहुत से मिथकों को बदलकर रख दिया। कई कुरीतियाँ जो अब तक बेख़ौफ़ चल रही थीं, उस पर अंकुश लगाने का काम इस कोरोना काल आगे पढ़ें


चलो एक बार फिर से

भारत छोड़े हुये एक लम्बा अरसा हो गया है। कैसे ज़िन्दगी का एक बहुत बड़ा हिस्सा यहाँ गुज़ार दिया, इसका कोई अन्दाज़ा ही नहीं रहा। वक़्त गुज़रता गया और इसी के साथ साथ ज़िन्दगी की गाड़ी ने भी अपनी रफ़्तार आगे पढ़ें


जात न पूछो साधु की

मेरे कॉलेज के शुरुआती दिनों में मुझसे मेरे एक मित्र ने स्वयं के संशय को दूर करने के लिए पूछा: "क्या तुम ब्राह्मण हो"? तब मैंने प्रत्युत्तर में कहा,"Man is Man; He cannot be particularised by cast."। वास्तव में वह आगे पढ़ें


नकारात्मक विचारों को अस्वीकृत करें

नकारात्मक विचार हमारे मन के अंदर की ही भावनाएँ हैं जो हमें एवं दूसरों को नुक़सान पहुँचाती हैं। मस्तिष्क में भय मनुष्य को बहुत छोटा बना देता हैं एवं वह स्वयं को असुरक्षित महसूस करता है। नकारात्मक विचार स्वयं को आगे पढ़ें


मानव मन का सर्वश्रेष्ठ उल्लास है होली

होली का नाम आते ही मन रंगों के बिछावन पर लोटने लगता है। रंग बिरंगे चेहरे भाभियों और देवरों का मज़ाक मन में कुलाँचे मार ने लगता है। मानव मन के उत्कृष्ट उल्लास का नाम होली का त्यौहार है। होली आगे पढ़ें


हरदासीपुर– दक्षिणेश्वरी महाकाली

"कोई दुआ असर नहीं करती, जब तक वो हम पर नज़र नहीं करती, हम उसकी ख़बर रखें न रखें, वो कभी हमें बेख़बर नहीं करती।"  कुछ ऐसा ही संबंध है हमारा और हमारी कुल देवी दक्षिण मुखी माँ काली का, आगे पढ़ें


समीक्षा

1857 का संग्राम 

1857 का संग्राम 

समीक्षित पुस्तक: 1857 का संग्राम  अनुवाद: विजय प्रभाकर (मूल लेखक: वि.स.वालिंबे) मूल प्रकाशक:नेशनल बल ट्रस्ट, इंडिया, प्र.सं.2000 पुस्तक उपलब्धता: 1857 का संग्राम (www.pustak.org) 1857 का संग्राम (books.google.com) 1857 का संग्राम (kobo.com) 1857 का संग्राम (goodreads.com) नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया देश की आगे पढ़ें


साहित्य, संस्कृति और भाषा

साहित्य, संस्कृति और भाषा

समीक्षित पुस्तक: साहित्य, संस्कृति और भाषा (2021) लेखक: ऋषभदेव शर्मा प्रकाशक: अमन प्रकशन, कानपुर पृष्ठ: 200 मूल्य: रु. 495  साहित्य, संस्कृति और भाषा – इन तीनों का परस्पर संबंध अटूट है क्योंकि देश-दुनिया की संस्कृति की जितनी प्रभावी अभिव्यक्ति साहित्य के आगे पढ़ें


हिंदी राष्ट्र भाषा या विश्व भाषा: वर्चस्व का संघर्ष

हिंदी राष्ट्र भाषा या विश्व भाषा: वर्चस्व का संघर्ष

समीक्ष्य कृति: हिंदी राष्ट्र भाषा से विश्व भाषा   लेखिका: डॉ.सुरभि दत्त  प्रकाशक: विकास प्रकाशन, 311 की, विश्व बैंक बर्रा, कानपुर  मूल्य: 450/ मात्र  मोबाइल: 9415154156, 9540057852, फोन: 0512-2543549 प्रथम संस्करण: 2019  समीक्षक: डॉ. पद्मावती  सहायक आचार्य, हिंदी विभाग,आसन महाविद्यालय, चेन्नई आगे पढ़ें


ख़ामोश है अंतर्मन 'मैं मुक्ता हूँ' उपन्यास के परिप्रेक्ष्य में

ख़ामोश है अंतर्मन 'मैं मुक्ता हूँ' उपन्यास के परिप्रेक्ष्य में

समीक्षित पुस्तक: मैं मुक्ता हूँ लेखक: डॉ. शशिप्रभा प्रकाशक: अयन प्रकाशन, १/२०, मेहरौली, न्यू दिल्ली-110030 पृष्ठ संख्या: 188 मूल्य: रु 400/- भारतीय संस्कृति अपनी विशिष्ट पहचान के कारण सदैव विश्व के लिए आदरणीय और वंदनीय रही है। प्राचीन भारत की आगे पढ़ें


संस्मरण

अनोखा विवाह

नीरजा और महेश चंद्र द्विवेदी की सगाई की रस्मों का प्रारम्भ ही नाटकीय नहीं हुआ अपितु विवाह भी कम नाटकीय परिस्थितियों में नहीं हुआ।  जब लड़के और लड़की की सहमति मिल गई तो जैसे चुपचाप सगाई का सामान वापस भेज आगे पढ़ें


घर-परिवार

24 अक्टूबर 2020 मेरे ठीक सामने जो दीवाल घड़ी टँगी है उसमें इस समय सवेरे के 9 बज रहे हैं। यह घड़ी 15 मिनट आगे है। घर पर कहा जाता है कि ऐसा इसलिए किया गया है ताकि स्कूल/ऑफ़िस जाने आगे पढ़ें


बचपन की होली

माघ बसंत पंचमी से ही हमारे यहाँ होली गाने और खेलने की परंपरा है। आज से होली के दिन तक जो कोई मेहमान गाँव में आ जाता है, उसे लाल-पीला करके ही भेजा जाता है। गाली देनेवाला देता रहे, पर आगे पढ़ें


बेचारे विप्र भंगड़ी लाल

बात उन दिनों की है जब मैं अपनी वकालत द्वितीय वर्ष की परीक्षा, लखनऊ विश्वविद्यालय में समाप्त हो जाने पर, अवकाश के समय होस्टल से अपने गाँव कफारा लखीमपुर खीरी गयी हुई थी। तभी यह दिलचस्प वाक़या हमारे गाँव में आगे पढ़ें


वह स्वर्ण मंदिर दर्शन का वृत्तांत 

एक बार डॉक्टर जसराज अपनी पत्नी रतन को हरमिंदर साहब के दर्शन कराने अमृतसर ले गये। यह सिक्खों का एक प्रमुख धार्मिक स्थान है। इसे दरबार साहिब भी कहते हैं। यह एक बड़े सरोवर के बीच में बनाया गया है। आगे पढ़ें


अन्य

संपूर्ण साहित्य को प्रगतिशील होना पड़ेगा

  सम्पादकीय: अगर जीवन संघर्ष है तो उसका अंत सदा त्रासदी में ही क्यों हो?   साहित्यकुञ्ज मार्च द्वितीय अंक का संपादकीय पढ़ा।  वैसे साहित्य कुञ्ज के सभी नये अंकों का सबसे पहले मैं संपादकीय ही पढ़ता हूँ। संपादकीय इसलिए आगे पढ़ें


साक्षात्कार

वीरेन्द्र आस्तिक से अवनीश सिंह चौहान की बातचीत 

मूर्धन्य कवि, आलोचक एवं सम्पादक श्री वीरेंद्र आस्तिक बाल्यकाल से ही अन्वेषी, कल्पनाशील, आत्मविश्वासी, स्वावलंबी, विचारशील, कलात्मक एवं रचनात्मक रहे हैं। बाल्यकाल में मेधावी एवं लगनशील होने पर भी न तो उनकी शिक्षा-दीक्षा ही ठीक से हो सकी और न आगे पढ़ें


कविताएँ

शायरी

समाचार

साहित्य जगत - कैनेडा

विश्वरंग 2020 - कैनेडा  सत्र नवम्बर 07

विश्वरंग 2020 - कैनेडा सत्र नवम्बर 07

29 Nov, 2020

रिपोर्ट- आशा बर्मन  कैनेडा के हिंदी-प्रेमियों के लिए 7 नवम्बर 2020 एक अविस्मरणीय दिन रहेगा। इसी दिन पहली बार कैनेडा…

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शिशिर की एक शाम, नृत्य-नाट्योत्सव के नाम

शिशिर की एक शाम, नृत्य-नाट्योत्सव के नाम

23 Nov, 2019

हिन्दी राइटर्स गिल्ड का 11वां वार्षिकोत्सव   नवंबर 17, 2019 मिसीसागा -  टोरोंटो में पिछले ग्यारह वर्षों से अपने एक…

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शरद्‌ काव्योत्सव मासिक गोष्ठी - अक्तूबर 2019

शरद्‌ काव्योत्सव मासिक गोष्ठी - अक्तूबर 2019

25 Oct, 2019

१९ अक्तूबर २०१९—हिन्दी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठी ब्रैम्पटन लाइब्रेरी के सभागार में संपन्न हुई। पतझड़ के मोहक रंगों से…

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साहित्य जगत - भारत

अभिनन्दन! अभिनन्दन!

अभिनन्दन! अभिनन्दन!

12 Mar, 2021

श्रेष्ठ साहित्यकार, संवेदनशील व्यक्तित्त्व एवं ऊर्जावान एवं चंदन चर्चित चरित्र के स्वामी परम सम्माननीय डॉ. राजकुमार आचार्य जी के पाणि…

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साहित्य सरोकारों और सम्वेदनाओं को आवाज़ देता है- आशुतोष राना

साहित्य सरोकारों और सम्वेदनाओं को आवाज़ देता है- आशुतोष राना

20 Feb, 2021

डॉ. सुशील शर्मा की चार पुस्तकें विमोचित   गाडरवारा स्थानीय महाराणा प्रताप वार्ड शांति नगर में परम पूज्य पंडित देव…

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डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा की दो पुस्तकें लोकार्पित

डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा की दो पुस्तकें लोकार्पित

20 Feb, 2021

हैदराबाद, 19.2.2021 यहाँ दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के खैरताबाद स्थित परिसर में विगत 11 फरवरी को डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा…

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साहित्य जगत - विदेश

वातायन के इतिहास में एक शानदार सम्मान-समारोह

वातायन के इतिहास में एक शानदार सम्मान-समारोह

25 Nov, 2020

डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक’ और श्री मनोज मुंतशिर वातायन-यूके द्वारा सम्मानित   लंदन, 21 नवंबर 2020: वातायन का वार्षिक समारोह…

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तेजेन्द्र शर्मा के कविता संग्रह ‘टेम्स नदी के तट से’ का लोकार्पण नेहरू सेन्टर लंदन के मंच से...

तेजेन्द्र शर्मा के कविता संग्रह ‘टेम्स नदी के तट से’ का लोकार्पण नेहरू सेन्टर लंदन के मंच से...

29 Sep, 2020

• कथा यू.के. संवाददाता भारतीय उच्चायोग लंदन, नेहरू सेन्टर लंदन एवं एशियन कम्यूनिटी आर्ट्स ने एक साझे कार्यक्रम में तेजेन्द्र…

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ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा-कविता सम्मान घोषित

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा-कविता सम्मान घोषित

28 May, 2020

(सभी सम्मान लेखिकाओं को) ममता कालिया, उषाकिरण ख़ान, अनिलप्रभा कुमार, प्रज्ञा, रश्मि भारद्वाज तथा गरिमा संजय दुबे होंगे सम्मानित ढींगरा…

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फीजी का हिन्दी साहित्य

साहित्यकुञ्ज पत्रिका ’फीजी का हिन्दी साहित्य’ विषय पर नवंबर में विशेषांक प्रकाशित करने वाली हैं। उद्देश्य यह है कि फीजी की सांस्कृतिक और हिन्दी की साहित्यिक संपदा पाठकों के सामने रख सकें। हमारा फीजी के लेखकों और फीजी से जुड़े सभी लोगों से सादर आग्रह है कि आप अपनी कविताएँ, कहानियाँ, साहित्यिक लेख, संस्मरण, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि आदि साहित्यकुंज पत्रिका के लिए भेजियेगा। साहित्यकुंज पत्रिका के संपादक हैं: सुमन कुमार घई। इस विशेषांक की संपादक हैं: डॉ. शैलजा सक्सेना; सह-संपादक: सुभाषिणी लता कुमार (लौटुका, फीजी) ये रचनाएँ अक्तूबर 18, 2020 तक अवश्य भेज दीजिए। कृपया इन रचनाओं को आप इन ई-मेल पतों पर भेजिए: shailjasaksena@gmail.com sampadak@sahityakunj.net
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