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    दलित साहित्य
    दलित साहित्य दलित साहित्य और उसके होने की ज़रूरत डॉ. शैलजा सक्सेना दलित साहित्य उस समाज की सच्चाई से.. आगे पढ़ें
बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात
साहित्य के रंग शैलजा के संग - बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

कहानियाँ

अरक्षित

उनका घर इन-बिन वैसा ही रहा जैसा मैंने कल्पना में उकेर रखा था। स्थायी, स्वागत-मुद्रा के साथ घनी, विपुल वनस्पति; ऊँची, लाल दीवारों व पर्देदार खुली खिड़कियाँ लिए वह बँगला पूरी सड़क को सुशोभित कर रहा था। “साहब घर पर आगे पढ़ें


आत्मविश्वास और पश्चाताप

आत्मविश्वास और पश्चाताप में युद्ध होने लगा। आत्मविश्वास का वज्र प्रहार हर बार पश्चाताप के जीर्ण-विदीर्ण शरीर पर पड़ता और पश्चाताप धराशायी हो जाता। आत्मविश्वास ने प्रस्थान करते-करते कहा, "मेरा प्रवेश जिस मन-मस्तिष्क में हो जाए, वो विकासशील होकर विकसित आगे पढ़ें


एक बिलकुल अलग कहानी – 2

 मूल कहानी (अँग्रेज़ी): डॉ. नंदिनी साहू  अनुवाद: दिनेश कुमार माली    हम हर दिन के हर छोटे-बड़े विवरण का साझा करते थे। एक बार उसने लिखा, “अभी-अभी मैंने एम.ए. अंग्रेज़ी के छात्रों को डोवर बीच पर व्याख्यान दिया। याद आई आगे पढ़ें


एक मैं एक वो

हाँ वो वही थी, जिसे मैं पंद्रह साल से भुलाने की कोशिश करते हुए भी भुला न पाई। काले कोयले सा बदन, कसी हुई चमकती चमड़ी, काले चेहरे पर दो बड़ी-बड़ी आँखें जो दूर से दो सफ़ेद गोलाकार रंग-मंडप सी आगे पढ़ें


तोरपा का साहसी क़दम

"चाचा जी, चाचा जी, चाइना में वुहान कहाँ है?" ढ़ाई साल की तोरपा अपने चाचा से पूछा। स्कूल में मैडम से जो बातें चाइना के वुहान शहर के बारे में सुनी थीं, जानना चाहती थी। तोरपा ने फिर आगे कहा, आगे पढ़ें


दाह

दरवाज़े पर कड़कदार खट-खट का जबाब दीना को देना ही पड़ा। दरवाज़ा खोलने से पहले उसने एक लाचार नज़र घर की औरतों पर डाली। अपने एक कमरे के इस झोंपड़े में वे सिर ढके, अपने में कुछ और सिकुड़ गईं।  आगे पढ़ें


धुआँ (राजीव कुमार)

भले ही कुछ लोगों ने  मज़ाक उड़ाया लेकिन ओम अब सीख गया है, सिगरेट के धुएँ को स्टाईल में छोड़ना। कुछ लोग उसके धुएँ वाली स्टाईल की तारीफ़ करके उसकी जेब ढीली कर लिया करते हैं। एक-एक कश में वो आगे पढ़ें


पिताजी

रात के तीन बजे थे। कालबेल बजने की लगातार आवाज़ से नींद खुल गई। फिर भी, संजीव तकिया से कान बंद करके सोने की कोशिश कर रहा था। ढाई घंटे ही हुए थे सोये हुए। अंतत:  कान की सहनशक्ति समाप्त आगे पढ़ें


प्यादा

वह मेरा क़रीबी है । वह पिछले कुछ वर्षों में देश के एक राजनैतिक दल में अपनी गहरी पैठ बना चुका है। मुझे अफ़सोस है कि पोस्टर चिपकाने, नारे लगाने और अपनी पार्टी के नेताओं के गुणगान करने के अलावा आगे पढ़ें


बलात्कार का जश्न

उत्तर प्रदेश के एक गाँव में बलात्कार की घटना घटित होने की ख़बर फैलते ही सोशल मीडिया पर बलात्कार से संबंधित लेखों, कहानियों एवं कविताओं की बाढ़-सी आ गई। प्रिया दीक्षित एक स्वघोषित लेखिका थी। जब किसी भी राष्ट्रीय समाचार आगे पढ़ें


मरीचिका - 6

(मूल रचना:  विद्याभूषण श्रीरश्मि) धारावाहिक कहानी 1956-59 घर छोड़ने के बाद मैं सीधे मिस साइमन के पास गई, उनके कंधे पर सिर रख कर दिल का बोझ हल्का किया। कहते हैं कि सहकर्मी से सामीप्य रखना ठीक नहीं होता, पर आगे पढ़ें


मुख्यमंत्री 

संत बद्रीनाथ कश्यप के लाखों अनुयायी थे। अपने अनुयायियों के लिए वो भगवान सदृश थे। उनके राज्य में वही राजनीतिक पार्टी विजयी होती थी, जिसके पक्ष में वो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से होते थे। उनकी कृपा से ही राजेश्वर आगे पढ़ें


मौक़ापरस्त

आपको एक क़िस्सा सुनाना चाहता हूँ लेकिन क़िस्से सुनाने का तज़ुर्बा न होने के कारण समझ नहीं पा रहा हूँ कि कहाँ से शुरू करूँ। ख़ैर, मुझे लगता है यह क़िस्सा आपको सीधे सहज तरीक़े से सुनाना उचित होगा। यह आगे पढ़ें


ये दुनिया-वो दुनिया

वर्मा जी बहुत परेशान हैं। उनके छठे कहानी संकलन पर एक बड़ी गोष्ठी ज़ूम पर आयोजित की जा रही है और उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि वे कल कहाँ बैठ कर इस मीटिंग में बोलें? हर कोना अपने आगे पढ़ें


हास्य/व्यंग्य

फिर हैप्पी इंडिपेंडेंस डे

लीजिए, फिर एक और इंडिपेंडेंस डे का प्रोग्राम शुरू हो गया। बिजली बीच-बीच में आ जा रही है। मुझे बिजली और बिजली वालों पर पर ग़ुस्सा आ रहा है तो बीवी को केवल मुझ पर। उसके विचार में, जब मैं आगे पढ़ें


आलेख

21वीं शती में हिंदी उपन्यास और नारी विमर्श : श्रीमती कृष्णा अग्निहोत्री के विशेष संदर्भ में

उपन्यास आधुनिक हिंदी साहित्य का जीवंत रूप है। सामयिक जीवन की बहमुखी विविधता और जटिलताओं का समग्र चित्रण करने में इसने अद्भुत सफलता पाई है। विशाल फलक पर मानव मन की छोटी से छोटी सम्वेदनाओं और आकांक्षाओं को भली-भाँति व्यक्त आगे पढ़ें


नई कविता का आत्म संघर्ष: मुक्तिबोध

"पथ भूल कर जब चांदनी  की किरन टकराए कहीं दीवार पर, तब ब्रह्मराक्षस समझता है वंदना की चांदनी ने  ज्ञान गुरु मानव से।" (ब्रह्मराक्षस कविता से) नई कविता नए वैचारिक तेवर के साथ साहित्य जगत में एक नवीन भाव भूमि आगे पढ़ें


नवगीत के उन्नायक दिनेश सिंह

विश्व-समाज में व्यक्ति का जन्मोत्सव मनाने के करोड़ों उदाहरण मिल जाएँगे, किन्तु मृत्योत्सव मनाने के उतने उदाहरण दिखाई नहीं पड़ते हैं; कहने को तो मृत्योत्सव के भी बहुत-से उदाहरण मिल जाएँगे, किन्तु मरणोपरांत व्यक्ति के अवदान को याद कर उत्सव आगे पढ़ें


समीक्षा

प्राचीन भारत में खेल-कूद (स्वरूप एवं महत्व)

प्राचीन भारत में खेल-कूद (स्वरूप एवं महत्व)

समीक्ष्य पुस्तक: प्राचीन भारत में खेल-कूद (स्वरूप एवं महत्व) लेखक: अवधेश कुमार सिन्हा प्रकाशक: मिलिन्द प्रकाशन, हैदराबाद प्रथम संस्करण: अगस्त 2018 SBN: 978-81-908990-1-7 पृष्ठ संख्या: 158 अवधेश कुमार सिन्हा द्वारा लिखित और मिलिन्द प्रकाशन, हैदराबाद द्वारा प्रकाशित पुस्तक “प्राचीन भारत आगे पढ़ें


युवाओं की लाचारगी का यथार्थ चित्रण 

युवाओं की लाचारगी का यथार्थ चित्रण 

समीक्षित कृति: यारबाज़ (लघु उपन्यास) लेखक: विक्रम सिंह   प्रकाशक: लोकोदय प्रकाशन  प्रा.लि., 65/44, शंकर पुरी, छितवापुर रोड, लखनऊ - 226001 आईएसबीएन नंबर: 978-93-88839-57-0 मूल्य: 175 रु. हाल ही के वर्षों में विक्रम सिंह ने हिंदी कहानी लेखन में अपनी आगे पढ़ें


वक़्त है फूलों की सेज, वक़्त है काँटों का ताज

वक़्त है फूलों की सेज, वक़्त है काँटों का ताज

(प्रबोध कुमार गोविल की किताब ‘ज़बाने यार मनतुर्की’ की समीक्षा) पुस्तक: ज़बाने यार मनतुर्की लेखक: प्रबोध कुमार गोविल  प्रकाशक: बोधि प्रकाशन  ISBN: 978-81-947232-6-4 पृष्ठ संख्या: 143  समीक्षक: प्रवीण प्रणव बोधि प्रकाशन, जयपुर से प्रकाशित प्रबोध कुमार गोविल की किताब ‘ज़बाने आगे पढ़ें


हरी चरण प्रकाश जी कहानी 'नन्दू जिज्जी'पर संक्षिप्त टिप्पणी

'नन्दू जिज्जी' कहानी पढ़कर राहत देने वाला अनुभव मिला। यह कहानी हिंदी में चल रहे विमर्शों की छायाओं से मुक्त है। यह मनुष्य की कुठाओं की नहीं, दुःखों की कहानी है इसलिये यह कुछ भी आरोपित नहीं करती। जीवन और आगे पढ़ें


संस्मरण

पवनार आश्रम 

पवनार आश्रम 

पवनार एक ऐतिहासिक गाँव है जो महाराष्ट्र के वर्धा जिले में धाम नदी के तट पर बसा है। यह गाँव ज़िले की सबसे प्राचीन बस्तियों में एक है। राजपूत राजा पवन के नाम पर इसका नाम पवनार पड़ा। गाँव में आगे पढ़ें


भांडे में ही भेद है, पानी सबमें एक

बस आकर रुकती तो जितने उसके अंदर चढ़ते उससे कई ज़्यादा लड़के लपक के बस की छत पर चढ़ जाया करते थे। शॉपिंग सेंटर बस का एक स्टोपेज था। यहाँ बस के इंतज़ार मेंं खड़े अधिकतर, अभियांत्रिकी महाविद्यालय के विद्यार्थी आगे पढ़ें


नाटक

आरती

पहला दृश्य (किसी फ़्लाई ओवर के नीचे का अन्तिम, धूल-भरा, सिरा। दूर लगी स्ट्रीट-लाइट्स का हल्का-हल्का प्रकाश आ रहा है। अधेड़ अम्र के उस्ताद के अतिरिक्त अन्य पात्र बच्चे अथवा किशोर हैं।)   उस्तादः  आओ मेरी चवन्नियो, अठन्नियो, दुअन्नियो, खोटे आगे पढ़ें


साक्षात्कार

स्वयंसिद्धा – ए मिशन विद ए विज़न - 2 

आइये इस सिलसिलेवार सफ़र को अंजाम तक ले जाते है।.. वहाँ जहाँ घर की लक्ष्मी अपनी पहचान पाने में जूझ रही है, वही विवाहित महिलाओं का सांस्कृतिक समूह सोनाली जी किस दिशा में ले जाना चाहती थीं, आइये सुनते हैं आगे पढ़ें


कविताएँ

शायरी

समाचार

साहित्य जगत - कैनेडा

शिशिर की एक शाम, नृत्य-नाट्योत्सव के नाम

शिशिर की एक शाम, नृत्य-नाट्योत्सव के नाम

23 Nov, 2019

हिन्दी राइटर्स गिल्ड का 11वां वार्षिकोत्सव   नवंबर 17, 2019 मिसीसागा -  टोरोंटो में पिछले ग्यारह वर्षों से अपने एक…

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शरद्‌ काव्योत्सव मासिक गोष्ठी - अक्तूबर 2019

शरद्‌ काव्योत्सव मासिक गोष्ठी - अक्तूबर 2019

25 Oct, 2019

१९ अक्तूबर २०१९—हिन्दी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठी ब्रैम्पटन लाइब्रेरी के सभागार में संपन्न हुई। पतझड़ के मोहक रंगों से…

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हिन्दी हैं हम, चाहे, कोई वतन हमारा…..

हिन्दी हैं हम, चाहे, कोई वतन हमारा…..

28 Sep, 2019

हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने 14 सितम्बर 2019 को अपनी मासिक गोष्ठी में ‘हिंदी दिवस’ का सुन्दर आयोजन किया। यह कार्यक्रम…

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साहित्य जगत - भारत

कविता संग्रह 'नक्कारखाने की उम्मीदें' का ऑन लाइन लोकार्पण/समीक्षा संगोष्ठी

कविता संग्रह 'नक्कारखाने की उम्मीदें' का ऑन लाइन लोकार्पण/समीक्षा संगोष्ठी

27 Jul, 2020

सुपेकर की कविताएँ पूर्वाग्रह मुक्त कविताएँ - श्री सतीश राठी नगर की प्रमुख साहित्यिक संस्था क्षितिज के द्वारा श्री संतोष…

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’अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो’ पुस्तक को ’इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्डस’ द्वारा मान्यता

’अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो’ पुस्तक को ’इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्डस’ द्वारा मान्यता

13 Jul, 2020

सुदर्शन सोनी द्वारा लिखी पुस्तक ’अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो’ एक ऐसा व्यंग्य संग्रह जिसके सभी 34 व्यंग्य केवल कुत्तों…

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अनिल शर्मा केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के नए उपाध्यक्ष 

अनिल शर्मा केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के नए उपाध्यक्ष 

30 Jun, 2020

27 जून 2020 (भारत): मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने अनिल कुमार शर्मा को केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल का…

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साहित्य जगत - विदेश

तेजेन्द्र शर्मा के कविता संग्रह ‘टेम्स नदी के तट से’ का लोकार्पण नेहरू सेन्टर लंदन के मंच से...

तेजेन्द्र शर्मा के कविता संग्रह ‘टेम्स नदी के तट से’ का लोकार्पण नेहरू सेन्टर लंदन के मंच से...

29 Sep, 2020

• कथा यू.के. संवाददाता भारतीय उच्चायोग लंदन, नेहरू सेन्टर लंदन एवं एशियन कम्यूनिटी आर्ट्स ने एक साझे कार्यक्रम में तेजेन्द्र…

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ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा-कविता सम्मान घोषित

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा-कविता सम्मान घोषित

28 May, 2020

(सभी सम्मान लेखिकाओं को) ममता कालिया, उषाकिरण ख़ान, अनिलप्रभा कुमार, प्रज्ञा, रश्मि भारद्वाज तथा गरिमा संजय दुबे होंगे सम्मानित ढींगरा…

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डॉ. सुषम बेदी की स्मृति में भावपूर्ण ज़ूम श्रद्धांजलि सभा 

डॉ. सुषम बेदी की स्मृति में भावपूर्ण ज़ूम श्रद्धांजलि सभा 

25 May, 2020

दिनांक 15 मई, 2020 को शीर्ष प्रवासी साहित्यकार श्रीमती सुषम बेदी की स्मृति में वैश्विक हिंदी परिवार (वाटस्एप समूह) द्वारा…

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फीजी का हिन्दी साहित्य

साहित्यकुञ्ज पत्रिका ’फीजी का हिन्दी साहित्य’ विषय पर नवंबर में विशेषांक प्रकाशित करने वाली हैं। उद्देश्य यह है कि फीजी की सांस्कृतिक और हिन्दी की साहित्यिक संपदा पाठकों के सामने रख सकें। हमारा फीजी के लेखकों और फीजी से जुड़े सभी लोगों से सादर आग्रह है कि आप अपनी कविताएँ, कहानियाँ, साहित्यिक लेख, संस्मरण, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि आदि साहित्यकुंज पत्रिका के लिए भेजियेगा। साहित्यकुंज पत्रिका के संपादक हैं: सुमन कुमार घई। इस विशेषांक की संपादक हैं: डॉ. शैलजा सक्सेना; सह-संपादक: सुभाषिणी लता कुमार (लौटुका, फीजी) ये रचनाएँ अक्तूबर 18, 2020 तक अवश्य भेज दीजिए। कृपया इन रचनाओं को आप इन ई-मेल पतों पर भेजिए: shailjasaksena@gmail.com sampadak@sahityakunj.net
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