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    दलित साहित्य
    दलित साहित्य दलित साहित्य और उसके होने की ज़रूरत डॉ. शैलजा सक्सेना दलित साहित्य उस समाज की सच्चाई से.. आगे पढ़ें
बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात
साहित्य के रंग शैलजा के संग - बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हरीश नवल जी से एक मुलाक़ात

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

कहानियाँ

जंगली धारा

मूल अँग्रेज़ी : डॉ नंदिनी साहू  अनुवाद : दिनेश कुमार माली    उस पूरी शाम मेरी माँ बरामदे के पास लकड़ी के सख़्त तख़्ते पर बैठी हुई थी। मैंने कोयले की सिगड़ी जलाकर उनके पाँवों के पास रख दी और आगे पढ़ें


डर (सतीश सिंह)

संजय यानी मैं सालों से मुंबई में हूँ। भागम-भाग के जीवन में अपने पिछले जीवन या दोस्तों या रिश्तेदारों के बारे में सोचने की मुझे कभी फ़ुर्सत मिली ही नहीं। घर से ऑफ़िस और फिर ऑफ़िस से घर। यही मेरी आगे पढ़ें


दर्द जब हद से गुज़र जाए

फाल्गुनी अपने पति मेहर महाजन के साथ यूरोप के टूअर पर निकली है। एक महीने का टूअर– रोम, वेनिस जैसे सुंदर-सुंदर शहरों के नज़ारे लेते हुए पेरिस पहुँचे हैं। पेरिस की छटा है बहुत सुहानी! आज का दिन ख़ूब मज़े आगे पढ़ें


बापवाली!

“बाहर दो पुलिस कांस्टेबल आए हैं,” घण्टी बजने पर बेबी ही दरवाज़े पर गयी थी, “एक के पास पिस्तौल है और दूसरे के पास पुलिस रूल। रूल वाला आदमी अपना नाम मीठेलाल बताता है। कहता है, वह अपनी लड़की को आगे पढ़ें


मरीचिका - 4

(मूल रचना:  विद्याभूषण श्रीरश्मि) धारावाहिक कहानी 1951-53 नई नौकरी मेरी थी, पर नशा उसका विमल पर क़ाबिज़ था। मेरे देर रात घर लौटने और सप्ताह-सप्ताह-भर एम डी के साथ टूर पर रहने को उसने मेरी सफलता का लक्षण माना, मुझे आगे पढ़ें


शिक्षक सम्मान

"नहीं, तुम्हें शिक्षक सम्मान नहीं मिल सकता।" "मगर क्यों?" "तुम योग्य नहीं हो?" "क्या योग्यता होनी चाहिए?" "एक अच्छा शिक्षक..." "लोग मुझे अच्छा शिक्षक ही मानते हैं।" "वो कैसे?" "मेरे पढ़ाये छात्र कलेक्टर हैं डॉक्टर हैं, आईआईटी में हैं मेरी आगे पढ़ें


सलीना तो सिर्फ़ शादी करना चाहती थी

सुबकियों के बीच निराश सलीना ने बोखारी के साथ खोले, अपने बचत-खाते की किताब पर नज़र डाली। पिछले तीन सालों में दोनों मिलकर सिर्फ़ पच्चीस पाऊँड ही बचा पाए थे। शादी के लिए कम-से-कम डेढ़ सौ पाऊँड तो चाहिएँ ही आगे पढ़ें


सुकून! (आरती ’पाखी’)

रात के क़रीब दस बजने को थे। आज मौसम ने अचानक ही करवट बदल ली। आसमान में बिजलियाँ कड़क रही थीं। जिस वज़ह से बारिश होने के पूरे आसार थे। हाथ में शराब की बोतल लिए एक निजी कंपनी में आगे पढ़ें


हिन्दी इज़ द मोस्ट वैलुएबल लैंग्वेज

"हिन्दी दिवस पर आज मैं आप सब लोगों का हार्दिक अभिनंदन करता हूँ। हिन्दी भारतीय संस्कृति की प्राण है, यह शस्य श्यामला भूमि का भूषण हैं। यह मानव मन को अवर्चनीय आनंद से सांगोपांग पगा देने वाली भाषा है।" बाल आगे पढ़ें


हास्य/व्यंग्य

आता माझी सटकली

फाइनेंस कंपनी के चेयरमैन को पत्र आदरणीय,  सादर नमस्कार।  मैं अपनी बेस्ट फाइनेंस कंपनी की रामगढ़ शाखा का शाखा प्रबंधक हूँ। मैं इस शाखा में अकेला अधिकारी हूँ, इसके बावजूद भी मैंने शाखा के सभी टार्गेट्स पूर्ण किए हैं। हमारी आगे पढ़ें


चरणयोगी भोग्या वसुंधरा

कहता रहे जो कहता रहे, हो जिसके लिए कर्मयोग सबसे बड़ा योग हो, पर मेरे लिए तो योगों में योग चरणयोग ही है। और मरने के बाद भी सर्वश्रेष्ठ योग चरणयोग ही रहेगा। मरने के बाद भी जो दाँव लगा आगे पढ़ें


विराम- अविराम

मेरे कंप्यूटर का हिन्दीवाला कुंजी-पटल विराम-चिह्न लगाने में गड़बड़ करने लगा है, कितना ही खटखटाओ प्रश्न-चिह्न और विस्मयादिबोधक तो तशरीफ़ लाते ही नहीं - लेकिन अंग्रेज़ी का हो तो चट् हाज़िर। लगता है इनमें भी हिन्दी-कांप्लेक्स आ गया! एक वाक्य आगे पढ़ें


आलेख

शिक्षा परम्परा से आधुनिकता तक

प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च रहा है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में गुरु की उपयोगिता से हम इंकार नहीं कर सकते। गुरु-शिष्य परम्परा हमारी स्वस्थ एवं सभ्य भारतीय संस्कृति का परिचायक रही है। बिना आगे पढ़ें


शिक्षा, समाज और हम

(शिक्षा दिवस के अवसर पर)   मानव इतिहास के आदिकाल से ही शिक्षा का विविध भाँति सतत् विकास तथा विस्तार होता रहा है। प्रत्येक देश अपनी अनूठी सामाजिक तथा सांस्कृतिक पहचान की अभिव्यक्ति तथा संवृद्धि के लिए अपनी विशिष्ट शिक्षा आगे पढ़ें


साहित्य और मानवाधिकार के प्रश्न

मानव अधिकारों की संकल्पना मनुष्य के व्यापक जीवन दर्शन पर आधारित है, जिसके घेरे में सम्पूर्ण जीवन और सामाजिक व्यवस्था स्वत: ही आ जाती है। मानव जीवन की सर्वश्रेष्ठ अभिव्यक्ति है। अत: जीव मात्र से जुड़ना, उसका संरक्षण करना तथा आगे पढ़ें


हिंदी भाषा की उत्पत्ति एवं विकास एवं अन्य भाषाओं का प्रभाव

(हिंदी दिवस पर विशेष )   प्रारम्भिक अवस्था में मानव ने अपने भावों-विचारों को अपने अंग संकेतों से प्रषित किया होगा बाद में इसमें जब कठिनाई आने लगी तो सभी मनुष्यों ने सामाजिक समझौते के आधार पर विभिन्न भावों, विचारों आगे पढ़ें


समीक्षा

उम्मीदों के ऊर्जावान कवि : श्री दुर्गा प्रसाद झाला

उम्मीदों के ऊर्जावान कवि : श्री दुर्गा प्रसाद झाला

'जलती रेत पर नंगे पाँव' यह कविता संग्रह श्री दुर्गा प्रसाद झाला का बारहवाँ कविता संग्रह है। 87 वर्ष की उम्र में साहस के साथ उम्मीदों की कविताएँ रचने का काम श्री झाला जी कर रहे हैं। अपने कविता कर्म को आगे पढ़ें


एक उपन्यास जिसे आपको पढ़ना ही चाहिए

एक उपन्यास जिसे आपको पढ़ना ही चाहिए

चर्चित कृति: स्वर्ग का अंतिम उतार (उपन्यास)  लेखक: लक्ष्मी शर्मा  प्रकाशक: शिवना प्रकाशन, पी.सी. लैब, सम्राट कॉम्प्लेक्स बेसमेण्ट, बस स्टैण्ड, सीहोर-466 001. प्रथम संस्करण: 2020.  पृष्ठ संख्या: 104 मूल्य: 150.00 रु. पेपरबैक अपने दो ही तो शौक़ हैं – पढ़ना आगे पढ़ें


रोचक व्यंग्य रचनाओं का अनूठा गुलदस्ता

रोचक व्यंग्य रचनाओं का अनूठा गुलदस्ता

पुस्तकः बंटी, बबली और बाबूजी का बटुआ (व्यंग्य संग्रह) लेखकः श्री दीपक गिरकर प्रकाशकः रश्मि प्रकाशन, 204 सनशाइन अपार्टमेंट, बी-3, बी-4 कृष्णा नगर, लखनऊ-226023 मूल्य:175 रु. देश के विभिन्न समाचार पत्र-पत्रिकाओं में श्री दीपक गिरकर की व्यंग्य रचनाएँ निरंतर प्रकाशित आगे पढ़ें


संस्मरण

चाऊमाऊ की कहानी मेरी ज़बानी

आज जो कहानी मैं आप लोगों को सुनाने जा रही हूँ वह एक बहुत प्यारे, आज्ञाकारी पौमेरियन कुत्ते की है, जिसे हमने पाला था। एक दिन मेरे पति जब घर आये तो मुझसे बोले, “अपनी आँखें बंद करो” और मेरे आगे पढ़ें


कविताएँ

शायरी

समाचार

साहित्य जगत - कैनेडा

शिशिर की एक शाम, नृत्य-नाट्योत्सव के नाम

शिशिर की एक शाम, नृत्य-नाट्योत्सव के नाम

23 Nov, 2019

हिन्दी राइटर्स गिल्ड का 11वां वार्षिकोत्सव   नवंबर 17, 2019 मिसीसागा -  टोरोंटो में पिछले ग्यारह वर्षों से अपने एक…

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शरद्‌ काव्योत्सव मासिक गोष्ठी - अक्तूबर 2019

शरद्‌ काव्योत्सव मासिक गोष्ठी - अक्तूबर 2019

25 Oct, 2019

१९ अक्तूबर २०१९—हिन्दी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठी ब्रैम्पटन लाइब्रेरी के सभागार में संपन्न हुई। पतझड़ के मोहक रंगों से…

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हिन्दी हैं हम, चाहे, कोई वतन हमारा…..

हिन्दी हैं हम, चाहे, कोई वतन हमारा…..

28 Sep, 2019

हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने 14 सितम्बर 2019 को अपनी मासिक गोष्ठी में ‘हिंदी दिवस’ का सुन्दर आयोजन किया। यह कार्यक्रम…

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साहित्य जगत - भारत

कविता संग्रह 'नक्कारखाने की उम्मीदें' का ऑन लाइन लोकार्पण/समीक्षा संगोष्ठी

कविता संग्रह 'नक्कारखाने की उम्मीदें' का ऑन लाइन लोकार्पण/समीक्षा संगोष्ठी

27 Jul, 2020

सुपेकर की कविताएँ पूर्वाग्रह मुक्त कविताएँ - श्री सतीश राठी नगर की प्रमुख साहित्यिक संस्था क्षितिज के द्वारा श्री संतोष…

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’अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो’ पुस्तक को ’इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्डस’ द्वारा मान्यता

’अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो’ पुस्तक को ’इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्डस’ द्वारा मान्यता

13 Jul, 2020

सुदर्शन सोनी द्वारा लिखी पुस्तक ’अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो’ एक ऐसा व्यंग्य संग्रह जिसके सभी 34 व्यंग्य केवल कुत्तों…

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अनिल शर्मा केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के नए उपाध्यक्ष 

अनिल शर्मा केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के नए उपाध्यक्ष 

30 Jun, 2020

27 जून 2020 (भारत): मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने अनिल कुमार शर्मा को केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल का…

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साहित्य जगत - विदेश

तेजेन्द्र शर्मा के कविता संग्रह ‘टेम्स नदी के तट से’ का लोकार्पण नेहरू सेन्टर लंदन के मंच से...

तेजेन्द्र शर्मा के कविता संग्रह ‘टेम्स नदी के तट से’ का लोकार्पण नेहरू सेन्टर लंदन के मंच से...

29 Sep, 2020

• कथा यू.के. संवाददाता भारतीय उच्चायोग लंदन, नेहरू सेन्टर लंदन एवं एशियन कम्यूनिटी आर्ट्स ने एक साझे कार्यक्रम में तेजेन्द्र…

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ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा-कविता सम्मान घोषित

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा-कविता सम्मान घोषित

28 May, 2020

(सभी सम्मान लेखिकाओं को) ममता कालिया, उषाकिरण ख़ान, अनिलप्रभा कुमार, प्रज्ञा, रश्मि भारद्वाज तथा गरिमा संजय दुबे होंगे सम्मानित ढींगरा…

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डॉ. सुषम बेदी की स्मृति में भावपूर्ण ज़ूम श्रद्धांजलि सभा 

डॉ. सुषम बेदी की स्मृति में भावपूर्ण ज़ूम श्रद्धांजलि सभा 

25 May, 2020

दिनांक 15 मई, 2020 को शीर्ष प्रवासी साहित्यकार श्रीमती सुषम बेदी की स्मृति में वैश्विक हिंदी परिवार (वाटस्एप समूह) द्वारा…

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फीजी का हिन्दी साहित्य

साहित्यकुञ्ज पत्रिका ’फीजी का हिन्दी साहित्य’ विषय पर नवंबर में विशेषांक प्रकाशित करने वाली हैं। उद्देश्य यह है कि फीजी की सांस्कृतिक और हिन्दी की साहित्यिक संपदा पाठकों के सामने रख सकें। हमारा फीजी के लेखकों और फीजी से जुड़े सभी लोगों से सादर आग्रह है कि आप अपनी कविताएँ, कहानियाँ, साहित्यिक लेख, संस्मरण, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि आदि साहित्यकुंज पत्रिका के लिए भेजियेगा। साहित्यकुंज पत्रिका के संपादक हैं: सुमन कुमार घई। इस विशेषांक की संपादक हैं: डॉ. शैलजा सक्सेना; सह-संपादक: सुभाषिणी लता कुमार (लौटुका, फीजी) ये रचनाएँ अक्तूबर 18, 2020 तक अवश्य भेज दीजिए। कृपया इन रचनाओं को आप इन ई-मेल पतों पर भेजिए: shailjasaksena@gmail.com sampadak@sahityakunj.net
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