बेड़ियाँ

15-09-2026

बेड़ियाँ

निर्मल कुमार दे (अंक: 302, सितम्बर द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

नंदिनी का जन्म ग़रीब परिवार में हुआ था। पर पढ़ने में वह बड़ी तेज़ थी। आर्थिक कारणों से विज्ञान विषय लेकर वह नहीं पढ़ पाई थी। लेकिन संस्कृत भाषा और साहित्य में उसकी गहरी रुचि देख शिक्षकों ने उसे संस्कृत में स्नातक करने की सलाह दी थी।

“सर, मैं पुरोहित बनना चाहती हूँ। क्या यह सम्भव है?” उसने अपने शिक्षक से जानना चाहा था कभी।

नंदिनी को जवाब देते हुए सर ने कहा था, “बेटा तुम्हारी सोच को सलामी देना चाहूँगा। तुम परंपरा की बेड़ियों को ज़रूर तोड़ पाएगी।”

आज नंदिनी की आँखें ख़ुशी से भरी हुई थी।

क्लब की अध्यक्षा ने नंदिनी की प्रशंसा करते हुए कहा, “आपके पौरोहित्य में नवरात्र सम्पन्न हुआ। आपने नया इतिहास रचा।

“दुर्गा ख़ुद नारी है तो उसकी पूजा एक नारी कैसे नहीं कर सकती है?” नंदिनी ने हँसते हुए कहा। 

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