नियति 

निर्मल कुमार दे (अंक: 300, जुलाई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

रख दी सोने की तिजोरी
चोरों के दरबार में
उम्मीद की थीं
सुरक्षित रहेगी तिजोरी, 
बिक गया सारा सोना
खुले बाज़ार में
बचा नहीं कुछ
हाथ मलने के सिवा, 
ख़ज़ाना ख़ाली हो गया
देखो उधार में। 

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