अमरेश सिंह भदौरिया - मुक्तक - होली

01-05-2026

अमरेश सिंह भदौरिया - मुक्तक - होली

अमरेश सिंह भदौरिया (अंक: 296, मई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

1
​वक्त की आँच में हर शिकायत जले,
प्यार के रंग में आज दुनिया ढले,
फागुन की मस्ती में ऐसा रँगे हम—
कि सदियाँ बीतें पर ये रंग न ढले।
​2 
​द्वेष की लकड़ियाँ मन से चुन लीजिए,
नेह की अनसुनी धुन को सुन लीजिए,
राख हो जाए कल की कड़वाहटें—
आज ख़ुशियों का दामन ही बुन लीजिए।
3
​चेहरे बदल गए पर मिज़ाज वही है,
बीत गए मौसम पर साज़ वही है,
गुलाल की परतें तो धुल गईं कब की—
पर रूह पे चढ़ा जो, वो अंदाज़ वही है।

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