तुम्हारा प्रेम

15-12-2025

तुम्हारा प्रेम

अमरेश सिंह भदौरिया (अंक: 290, दिसंबर द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)

 

तुम्हारा प्रेम केवल एक अनुभव नहीं, 
वह तो चेतना की किसी अतल गहराई में
जगा हुआ वह स्पंदन है
जो जीवन और मृत्यु के बीच
शाश्वत संवाद रचता है। 
 
यह कोई संयोग नहीं, 
जो संधियों और संकल्पों से बँधा हो, 
यह तो वह अनाम अनुबंध है
जिसे आत्माएँ बिना भाषा के
कर्म और स्मृति में निभाती हैं। 
 
तुम्हारा प्रेम—
अदृश्य किन्तु सर्वत्र व्यापी, 
जैसे वायु में घुला हुआ कोई ऋग्वैदिक मंत्र, 
जो सुनाई तो नहीं देता, 
पर आत्मा में हर पल गूँजता रहता है। 
 
तुम्हारा प्रेम वह ध्वनि है
जो मौन से जन्म लेती है, 
वह दीपशिखा है
जो अंधकार से प्रेम करती है। 
 
तुम्हारा प्रेम . . . 
कोई चरम नहीं, कोई प्रारंभ भी नहीं—
यह कालजयी यात्रा है
जहाँ साथ होना नहीं, 
सार्थक होना महत्त्वपूर्ण है। 

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