विशेषांक: कैनेडा का हिंदी साहित्य

05 Feb, 2022

मेरी कोमल देह पर
पाँव रखकर
सुकून पाने वालो
भूल न जाना 
मेरी तपन के तेवर 
मुझे मुट्ठियों में भींचने की
जी तोड़ कोशिश करने वाला
स्वयं तोड़ बैठता है अपनी
क्षमता का भ्रम
समन्दर भी नहीं बाँध पाता मुझे
जानता है
आज़ाद ख़्याल रेत की
फ़ितरत नहीं होती
मुट्ठियों की क़ैद में रहना। 

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