विशेषांक: कैनेडा का हिंदी साहित्य

05 Feb, 2022

दिन की शतरंजी बिसात पर 
हर बार रखा मैंने
अपने मूड को उठा कर 
तुम्हारे मूड की चाल के अनुसार
और पूरी कोशश करी 
अपने मूड को बचाने की। 
  
पर तुम्हारा मूड बदलते ही
पिट जाते हैं 
मेरी युक्तियों के हाथी और वज़ीर! 
बचती फिरती है मेरे उमंगों की रानी, 
धैर्य के प्यादों के पीछे छिपता है, 
मेरे अस्तित्व का राजा! 
  
तुम्हारा ध्यान हटाने की कितनी भी कोशिश करूँ, 
पर हर बार तुम्हारा मूड जीतता है
और मात खा जाता है मेरा मूड . . .

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