विशेषांक: कैनेडा का हिंदी साहित्य

05 Feb, 2022

गहन
भारी-भरकम अत्याधिक दारुण
समस्याएँ
जीवन कष्टकर दिन पर दिन बनाएँ
रोज़ी-रोटी लेन-देन दवा-दारू साफ़-सफ़ाई 
सूक्ष्म सूक्ष्मतर प्लास्टिक हवा-पानी-मिट्टी में, 
पशु-पक्षी-प्राणी हर में
 
फ्रेकिंग समुद्र तल खनन (डीप-सी माइनिंग) 
पिघलते ध्रुव दोनों धुआँ-धूँ जलते वन छोर छोर
कार्बन पदचिन्ह का बढ़ता ज़ोर
अब लो कोविड वायरस फैला हर ओर 
 
पेड़ 
पेड़ों से है आशा 
सिर तने से लगा
अंक में ख़ुद को छुपा
शाखा का झूला बना
 
निहारें फूल 
खाएँ फल
चाहे पिएँ 
नीरा औ' ताड़ी
 
इनकी छाया तले
ठंडक बयार मिले
पंछी कुहू करें
 
हम वन स्नान करें
बस चैन की साँस भरें

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