नेपाल-त्रासदी

01-09-2026

नेपाल-त्रासदी

महेश रौतेला (अंक: 301, सितम्बर प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

थोड़ी देर रो लूँ
इस त्रासदी पर, 
जो दबे पैर आयी
दबे-बहे गाँव-शहर पर। 
 
फिर तो उठना होगा
जीवन के लिए, 
बसाना होगा गाँव
बनाना होगा नया शहर। 
 
ले जाना होगा जीवन
चाहे उसे मोड़ना होगा सौ बार, 
लगाने होंगे मेले
बेचने होंगे फूल। 
 
पेड़ और पशुओं पर
जगाना होगा भरोसा, 
पहले जैसी न हो हँसी
पर धीरे-धीरे हँसना तो होगा।

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