मेरी योग्यता-अयोग्यता पर चुप हो

01-09-2026

मेरी योग्यता-अयोग्यता पर चुप हो

महेश रौतेला (अंक: 301, सितम्बर प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

अब नहीं मिलोगी
घर पर, घर की गूँज में, 
नहीं मिलोगी
श्मशान की आग में। 

शरीर जल चुका है
तो राख में भी नहीं मिलोगी, 
जो अस्थियाँ विसर्जित हुई
उन अस्थियों में नहीं रहोगी। 

जितनी दूर ढूँढ़ूँगा
वहाँ भी नहीं पाऊँगा, 
जब तक रहूँगा
मन से चिपका पाऊँगा। 
 
संदर्भ में बार-बार आ
घर को पकड़ लोगी, 
मेरी योग्यता-अयोग्यता पर चुप हो
विषयांतर कर दोगी। 

जब तक रहूँगा
टँगी मिलोगी चुपचाप
सपनों के पेड़ पर, 
लौटना मुझे भी है
सब सुख-दुख पीछे छोड़कर। 

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