जब प्यार मरने लगता है

01-02-2026

जब प्यार मरने लगता है

महेश रौतेला (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

आँधी-तूफ़ानों में
जो प्यार खड़ा रह जाता था, 
सीमाओं की रक्षा में
जो प्यार शहीद हो जाता था। 
टेढ़ी-मेढ़ी पगडण्डी में
जो प्यार सरल रह जाता था, 
जो हाथों से हाथ मिला
मज़बूती पा लेता था। 
छोटी-मोटी बातों में
जो मरा कभी नहीं करता था, 
किसी खायी में गिरने से
जीवित गृह लौट आता था। 
हर आशा-आकांक्षा को
ख़ूब जिया करता था, 
छोटे-छोटे मन मुटाव को
पल-पल मरने देता था। 
रोगों से लड़-लड़ कर
सदा निकट रहा करता था, 
लेकिन जब प्यार मरने लगता है
सन्नाटा छा जाता है।

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