संक्षिप्त हो जाऊँ

15-06-2026

संक्षिप्त हो जाऊँ

महेश रौतेला (अंक: 299, जून द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

संक्षिप्त हो जाऊँ
इतना भी नहीं
कि मौन लगूँ। 
 
शान्ति बन जाऊँ
इतना भी नहीं
कि श्मशान हो जाऊँ। 
 
सच बन जाऊँ
इतना भी नहीं
कि युधिष्ठिर बन जाऊँ।
  
कथा बन जाऊँ
ऐसी भी नहीं
कि कहा न जा सकूँ। 
 
प्यार बन जाऊँ
इतना भी नहीं
कि वियोग लगने लगूँ। 
 
धरती पर रहूँ
इतना भी नहीं
कि बोझ लगने लगूँ। 

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