पहाड़ और पहाड़

01-06-2026

पहाड़ और पहाड़

महेश रौतेला (अंक: 298, जून प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

पहाड़ ऐसे ही होते हैं
ऊँची कहानियाँ कहते
प्यार से लबालब भरे, 
बादलों घिरे
नदियों को जन्माने वाले, 
आसमान से जुड़े
दिलों में बैठे
घुमावदार रास्तों वाले
झीलों के रचनाकार। 
 
पहाड़ की गरदन पर 
लिखी रहती हैं 
कठिन घुमावदार बातें, 
लोगों की कहानियाँ
गीतों की अनसुनी धुनें। 
 
पहाड़ बोलते हैं 
मेरे लिए, तुम्हारे लिए
हम सब के लिए, 
सावधान करते हैं
अनुचित बातों से, 
हमारे क़दमों को 
ऊँचाई पर ले जा 
एक दूरदर्शिता दर्शाते हैं। 
 
पहाड़ बोलते हैं 
मेरे लिए, तुम्हारे लिए
हम सबके लिए। 

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