मैं कुछ नहीं कहूँगा

15-09-2026

मैं कुछ नहीं कहूँगा

महेश रौतेला (अंक: 302, सितम्बर द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

मैं कुछ नहीं कहूँगा तुमसे
प्यार के बारे में
क्योंकि वह शब्दों में नहीं, 
आत्मा में है, 
कर्म में दुबका पड़ा है। 
मैं नहीं कहूँगा तुमसे
साथ चलने को
सूक्ष्म-अँधेरी रात में। 
नहीं कहूँगा
छाँव बैठने को
एकान्त में आने को
क्योंकि हमें साथ-साथ उत्पन्न होना है। 
नहीं कहूँगा तुम्हें
सच बोलने को, 
क्योंकि यह तुम्हारा पुण्य है। 
आओ, गुनगुना लें
जीवन के चमत्कार को, 
एकात्म होकर। 

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