मैं मधुवन बन जाता हूँ

01-05-2026

मैं मधुवन बन जाता हूँ

महेश रौतेला (अंक: 296, मई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

मैं मधुवन बन जाता हूँ
तुम गाय चराने आ जाना, 
मैं कुरुक्षेत्र बन जाऊँ
तुम गीता कहने आ जाना। 
 
मैं प्रेम के संग रहता हूँ
तुम सुख की लीला कर देना, 
मैं राह-राह जब भटकूँगा
तुम सारथी बन आ जाना। 
 
मेरे अन्दर के पावन क्षण
तुम छाँट-छाँट कर रख लेना, 
मेरे अन्दर की दुविधा
तुम गीता कहकर हर देना। 
 
मैं जब विधि के आगे हारूँगा
तुम जय की रचना कर देना, 
जब चक्रव्यूह में फँस जाऊँ
तुम हाथ थामने आ जाना। 

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