ऋतुराज की अनुगामिनी:  फरवरी

15-02-2026

ऋतुराज की अनुगामिनी:  फरवरी

अमरेश सिंह भदौरिया (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

स्वर्ण आभा में नहाती फरवरी। 
मौन अधरों को जगाती फरवरी। 
 
रक्तवर्णा कोंपलों की ओट से, 
सृष्टि का यौवन सजाती फरवरी। 
 
स्मृति कुंजों में प्रलय जो सुप्त थी, 
मलय बन कर गुदगुदाती फरवरी। 
 
शून्य पर अंकित अधूरे प्रश्न को, 
मृदुल उत्तर दे मनाती फरवरी। 
 
वंचनाओं की तपन को सोख कर, 
नेह का अमृत पिलाती फरवरी। 
 
काल की धूसर लिपि को काट कर, 
प्राण-अक्षर फिर बनाती फरवरी। 

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता
सामाजिक आलेख
सांस्कृतिक आलेख
चिन्तन
साहित्यिक आलेख
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
ऐतिहासिक
लघुकथा
किशोर साहित्य कविता
कहानी
सांस्कृतिक कथा
ललित निबन्ध
शोध निबन्ध
ललित कला
पुस्तक समीक्षा
कविता-मुक्तक
हास्य-व्यंग्य कविता
गीत-नवगीत
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में