वर्ष कहाँ चला गया है

21-02-2019

वर्ष कहाँ चला गया है

महेश रौतेला

सुबह-सुबह सोच रहा हूँ
वर्ष कहाँ चला गया है
शायद कुछ तुम्हारे पास है
कुछ मेरे पास है
कुछ इधर है, कुछ उधर है,
कुछ देश में है, कुछ परदेस में है
कुछ प्यार में घुलमिल गया है,
वह गीत से भी निकला है
संगीत में भी डूबा है,
पवित्र होने के लिये
शिखर तक उठा है,
उसने जीवन भी दिया है
प्राण भी खोला है
इंद्रधनुषी दिख कर
मोह भी छोड़ा है ।
सुबह से सोच रहा हूँ
वर्ष कहाँ चला गया है?

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