रखते हैं किताबों में तस्वीर किसी की

01-06-2026

रखते हैं किताबों में तस्वीर किसी की

सुशील यादव (अंक: 298, जून प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

मफ़ऊल मुफ़ाईलुन मफ़ऊल फ़ऊलुन
221    1222    221    122
 
रखते हैं किताबों में तस्वीर किसी की
रहता है ख़्यालों में तासीर किसी की
 
मिलती जो सज़ायें तो चुपचाप सहे हम
पैरों में जो बाँधी वो ज़ंजीर किसी की
 
हमको था भरोसा हरदम प्यार का तेरा
सौंपी थी मग़र तुमने जागीर किसी की
 
राहों में तिरे काँटे बन के नहीं आते
चुभती हुई बातों में तहरीर किसी की
 
मकतल पे मिली शै से नाता नहीं तेरा
इतना अभी जाना है खंजीर किसी की

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

ग़ज़ल
कविता-मुक्तक
सजल
नज़्म
कविता
गीत-नवगीत
दोहे
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
पुस्तक समीक्षा
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में

लेखक की पुस्तकें