हम किसी नाज़नी को, पाने दुआ करते हैं

15-12-2025

हम किसी नाज़नी को, पाने दुआ करते हैं

सुशील यादव (अंक: 290, दिसंबर द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)


फ़ाएलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन
2122    1122    1122    22

 

हम किसी नाज़नी को, पाने दुआ करते हैं
ख़्वाब अक़्सर, इसी चक्कर में, बुना करते हैं
 
हमने फ़ूलों को, सजाया नहीं, बालों उनके
बद-ग़ुमानी के, वो इल्ज़ाम, धरा करते हैं
 
हमपे रहमत, ख़ुदा की ख़ूब, बदौलत जिसकी
आगे इंसाफ़, ज़माने को अता करते हैं
 
हम फटेहालों से, जी को चुरा लेते, जी भर
ख़ुद गिरेबान को, मजबूरी सिया करते हैं
 
जाने दौलत का नशा, चीज़ है क्या, जिस ख़ातिर
लोग दुश्मन की तरह, बरसों जिया करते हैं

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