पावस

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा (अंक: 302, सितम्बर द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

सावन की ठंडी फुहार। 
ख़ुशियाँ लाई अपार॥
नृत्य करे मन मयूर। 
कोयल गीत गाए मधुर॥
 
नभ में काली घटा छाई। 
हृदय विरहन के उदासी लाई॥
प्रीतम की याद घनी आई। 
शीतल बयार बहे सुखदाई॥
 
धरती की बुझी प्यास। 
सूखे कंठ मिला अमृतरस॥
जागी एक नई आस। 
सुखमय हुई पावस॥

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