मेरी साइकिल

15-03-2026

मेरी साइकिल

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा (अंक: 294, मार्च द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

सरपट-सरपट दौड़ लगाती 
नित व्यायाम ख़ूब कराती 
गाँव-गाँव, गली-गली घुमाती
मेरी साइकिल ख़ूब सैर कराती। 
 
बिना ईंधन के चलती जाती 
मन मेरा ख़ूब बहलाती
साथ-साथ बोझा भी उठाती 
मेरी साइकिल ख़ूब सैर कराती। 
 
पर्यावरण की सच्ची मित्र कहाती 
हर तरह के प्रदूषण से दूर रहती 
धीमे-धीमे मंज़िल तक पहुँचाती 
मेरी साइकिल ख़ूब सैर कराती। 
 
ग़ुस्सा ये कभी न करती 
हो जाए ख़राब तो, बोझ न बनती 
मंज़िल तक हर हाल में साथ चलती 
मेरी साइकिल ख़ूब सैर कराती। 

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