मुझे जीना है 

15-09-2026

मुझे जीना है 

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा (अंक: 302, सितम्बर द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

मेरा मन डूब रहा है
अनजाने अंधकार में 
मेरी सारी कोशिशें 
मेरे सारे प्रयास 
बेकार हो रहे हैं। 
 
टूट रहा है बार-बार 
मनोबल! 
सांसारिक आघात 
अपनों का दग़ा 
जब मिलता है
बड़े-बड़े योद्धा 
धराशायी हो जाते हैं। 
 
लेकिन मुझे 
उबरना है
इस कठिन दौर से गुज़रकर 
बाहर निकलना है
सीने का दर्द सीने में ही सहना है . . . 
मौन रहकर 
मुक़ाबला करना है
अपने हालातों से 
 
मुझे जीना हैं 
मर-मर कर ही सही 
ख़ुद को ख़ुद ही समझाना है। 

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