चिड़िया 

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा (अंक: 302, सितम्बर द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

फुदक-फुदक कर नाचती चिड़िया, 
दाना चुगकर उड़ जाती चिड़िया। 
 
हरी-भरी सुंदर बग़िया में, 
मीठे-मीठे गीत सुनाती चिड़िया। 
 
अपने मिश्री-घुले बोलों से 
बच्चों का मन चहकाती चिड़िया। 
 
नित मिल-जुल कर आती, 
आपस में नहीं झगड़ती चिड़िया। 
 
प्रेमभाव से रहना सिखलाती, 
बहुत बड़ी सीख देती नन्ही चिड़िया। 
 
तरह-तरह के रूप-रंग वाली, 
लाल, हरी, काली, नीली, पीली चिड़िया। 
 
फुदक-फुदक कर नाचती चिड़िया, 
दाना चुगकर उड़ जाती चिड़िया॥

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