राम उठो-कृष्ण उठो 

01-12-2025

राम उठो-कृष्ण उठो 

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा (अंक: 289, दिसंबर प्रथम, 2025 में प्रकाशित)

 

आदमी 
आदमी नहीं रहा 
बहुत ज़हरीला हो गया है। 
रावण-कंस 
दिनदहाड़े 
करते अट्टहास . . . 
 
राम-कृष्ण 
बैठे मंदिरों में 
उचित समय की प्रतीक्षा में, 
 
दुनिया बहुत 
ज़हरीली हो गई है। 
 
राम उठो 
कृष्ण उठो 
धनुष-चक्र 
चलाने का समय है 
मानवता बचानी है 
तो मर्यादा तोड़नी होगी 
शायद बंसी तभी मधुर लगेगी 
धरा के आँसुओं को पोंछने का 
समय है। 
 
हे राम! 
हे कृष्ण! 

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