युद्ध 

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा (अंक: 291, जनवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

युद्ध! 
नस-नस में चल रहा है 
हर मन-मस्तिष्क में चल रहा है 
 
युद्ध! 
राजा और प्रजा में चल रहा है 
दिन और रात में चल रहा है
  
युद्ध! 
भगवान और शैतान में चल रहा है 
अँधेरे और उजाले में चल रहा है 
 
युद्ध! 
रक्त के कण-कण में चल रहा है 
सृष्टि के हर अणु-परमाणु में चल रहा है 
 
युद्ध! 
सत्य और असत्य के बीच चल रहा है 
किसान और खेत के बीच चल रहा है 
 
युद्ध! 
जन्म और मृत्यु के मध्य चल रहा है 
युद्ध का दूसरा नाम ही तो संसार है . . .

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