तेरी दुनिया नई नई है क्या

22-10-2014

तेरी दुनिया नई नई है क्या

सुशील यादव

२१२२ १२१२ २२

तेरी दुनिया नई नई है क्या
रात रोके कभी, रुकी है क्या

बदलते रहते हो, मिज़ाज अपने
सुधर जाने से, दुश्मनी है क्या

जादु-टोना कभी-कभी चलता
सोच हरदम,यों चौंकती है क्या

तीरगी, तीर ही चला लेते
पास कहने को, रोशनी है क्या

सर्द मौसम, अभी-अभी गुज़रा
बर्फ़ दुरुस्त कहीं जमी है क्या

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