आज़ादी के क्या माने वहाँ

07-02-2014

आज़ादी के क्या माने वहाँ

सुशील यादव

२२२१          २२२१        २२२१       २१२


साया हट गया है, फिर नया बरगद तलाशिये
अब मेरी ज़मीन, सरकती यहाँ, सरहद तलाशिये

कड़ुवे घूँट, पीने का माहिर, सुकरात चल दिया
आदम पी रहा है, ख़ून इधर, शहद तलाशिये

है कारीगरी का महज़ ये नमूना सा जान लो
ये मन्दिर ढके या मस्जिद ढके गुम्बद तलाशिये

उनके पाँव, न उठाये, उठेंगे अब ज़मीन से
कलयुग में, सियासी अमन के, अंगद तलाशिये

लिए परचम जिहादी घूमता चारों तरफ यहाँ
आज़ादी के क्या माने वहाँ, मक़सद तलाशिये

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