उम्र मैंने खोयी है

01-07-2019

उम्र मैंने खोयी है

महेश रौतेला

उम्र मैंने खोयी है
पर मन नहीं अभी खोया है,
वैसा प्यार नहीं होता है
पर  प्यार के सपने आते हैं।

 

चलते क़दम अब ठहर गये हैं
पर चलने की चाह बनी हुई है,
कथा बहुत बार सुनी हुई है
फिर भी प्यास बनी हुई है।

 

तीर्थ कई कर आया हूँ
पर मन में रिक्तता बनी हुई है,
बहुत कर्मों से जुड़ा रहा हूँ
पर हाथ अभी भी खाली हैं।  

0 Comments

Leave a Comment

लेखक की अन्य कृतियाँ

कहानी
कविता
विडियो
ऑडियो