09-02-2017

मैं समय से कह आया हूँ

महेश रौतेला

मैं समय से कह आया हूँ
अपनी महिमा अक्षुण्ण रखना,
प्यार के अद्भुत गीतों को तू
स्वयं से आगे कर देना,
भिक्षुक जैसा जो बन जाये
उसकी लाठी तू बन जाना,
ख़ुशबू वाले फूल खिलाना
गंगा जैसी नदी बनाना,
हिमगिरी जैसा पर्वत लेकर
भारत जैसा देश बनाना,
आसमान पर तारे रखना
धरती को धसने न देना।

मैं समय से कह आया हूँ
मनुष्य को आलोक दिखा दे
आखेटक की भूमिका भुला दे,
धर्म कहीं पर रख दे ऐसा
कि शीश वहीं झुक जाये सबका।

0 Comments

Leave a Comment

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता
कहानी
विडियो
ऑडियो