युद्ध -  2

15-05-2026

युद्ध -  2

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा (अंक: 297, मई द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

युद्ध! 
आदमी-आदमी के बीच का ख़ून संघर्ष है 
युद्ध की आग 
इंसानियत को जलाकर राख कर देती है 
तीर-कमान, लाठी डंडों, 
बंदूक की गोली वाला दौर तो चला गया 
अब युद्ध मिसाइलों से लड़ा जाता है 
जो इतना हाहाकारी है कि 
पल भर में मानवता का अंत कर देता है। 
 
युद्ध आँसुओं के सागर को जन्म देता है 
जो सदियों तक उफनता रहता है 
विनाश का चलचित्र दिखाता रहता है 
स्वार्थ की आग शहर के शहर खा जाती है 
मौत की सौदागरी, ए मानव! अच्छी नहीं . . . 
ये दुनिया शान्ति से ही सुंदर लगती है 
युद्ध किसी समस्या का हल नहीं! 

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