पूनम की रात 

15-05-2026

पूनम की रात 

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा (अंक: 297, मई द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

चुपचाप बैठा 
पूनम की रात में 
छत पर अकेला 
चाँद को निहार रहा था मैं . . . 
चारों तरफ़ शान्ति ही शान्ति 
श्वेत चादर फैली थी आकाश में 
मदमस्त चाँद 
और ठंडी मलय समीर 
घायल कर रही थी 
मेरा हृदय! 
विचार रूपी नौका 
मन रूपी सागर में तैर रही थी 
भावुकता के तट से टकराकर 
हृदय में एक अजीब सी सिहरन दौड़ रही थी। 
मैं स्वयं से मुक्त महसूस कर रहा था 
एक असीम शान्ति मिली 
जब फ़ुज़ूल के विचार मिटे
मैं तन्हाई में भी सुकून का एहसास कर रहा था 
चुपचाप बैठा . . . 

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