करुणा का रस 

15-05-2026

करुणा का रस 

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा (अंक: 297, मई द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

पीकर करुणा का रस 
जीवन करो धन्य 
जन्म-जन्म सुखदाई 
जो करी भलाई 
लोकमंगल हो सदा 
सत्य राह चुनो भाई। 
 
हिमालय पुकारता 
वीर बनो-धीर बनो
ज्ञान करो अर्जित 
विश्व-वसुधा बने सुंदर 
मनुजतन महान 
चूको न सुअवसर। 
 
हृदय निर्मल-मन निर्मल 
घोर-पशुता मिटाओ
जिओ न निष्प्राण हो 
रवि सम बनकर 
तम जग से मिटाओ
हो पुलकित रोम-रोम शरीर। 

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