दुःख 

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा (अंक: 297, मई द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

दुःख मेरे जीवन का साथी 
हर पल साथ निभाता है 
मेरी क़िस्मत ने मुँह मोड़ा 
अपनों ने भी साथ है छोड़ा 
पर दुःख ने क्षण-क्षण साथ निभाया है 
मुझको मनभर-भरकर गले लगाया है
 
दुःख मेरे जीवन का साथी 
हर पल साथ निभाता है 
दुःख ने कभी समझा न पराया 
उसको मैं बहुत ही भाया 
बंद कमरे में अकेला-अकेला रोया 
दुःख साँस-साँस तक साथ रहा, भले भाग्य सोया
 
दुःख मेरे जीवन का साथी 
हर पल साथ निभाता है 
ख़ुद की लाश ख़ुद के कांधों पर ढोता हूँ 
कोई ख़ाली श्मशान ढूँढ़ता हूँ 
दुःख लेकर मैं सुख बाँटना चाहता हूँ 
गरल पीकर अमृत देना चाहता हूँ। 

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता
लघुकथा
किशोर साहित्य कविता
हास्य-व्यंग्य कविता
बाल साहित्य कविता
कविता - हाइकु
चिन्तन
काम की बात
यात्रा वृत्तांत
ऐतिहासिक
कविता-मुक्तक
सांस्कृतिक आलेख
पुस्तक चर्चा
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में