ढूँढ़ रहा हूँ 

15-05-2026

ढूँढ़ रहा हूँ 

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा (अंक: 297, मई द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

ढूँढ़ रहा हूँ 
ख़ुद को ख़ुद में 
क़तरा-क़तरा जी रहा हूँ 
ख़ुद को ख़ुद में। 
 
उम्मीदों के सहारे 
आगे बढ़ा रहा हूँ 
ख़ुद को ख़ुद में 
भीतर-बाहर ढूँढ़ रहा हूँ 
ख़ुद को ख़ुद में। 
 
तिनका-तिनका हुई ज़िन्दगी 
दर्पण सा देख रहा हूँ 
ख़ुद को ख़ुद में 
कुछ कहने की 
कुछ सुनने की चाहत बाक़ी है 
ख़ुद को ख़ुद में। 
 
अंत नहीं में 
आशा भरा जीवन हूँ 
ख़ुद को ख़ुद में। 

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