माँ नर्मदे 

15-03-2026

माँ नर्मदे 

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा (अंक: 294, मार्च द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

मन भर उत्साह से चलो नर्मदा तीर। 
मिट जायेगी निश्चित ही जन्म-जन्म की पीर॥
 
रंग-बिरंगे घाट सजे माँ नर्मदे के 
सुमिरन कर लो सब नर-नारी मिलजुल कर। 
पाप कटेंगे, पुण्य मिलेंगे, भवसागर से जायेंगे तर॥
 
पूर्ण समर्पण, तन-मन-धन सब अर्पण। 
माँ नर्मदा के श्रीचरणों में कर दो स्वयं को अर्पण॥
 
भक्ति भाव से माँ नर्मदे गुण गाइये 
आरती, दीपदान, भजन और ध्यान-स्नान धरिए। 
हाथ जोड़ मस्तक नवा हृदय को निर्मल करिए॥
 
श्रद्धा से पतितपावनी माँ नर्मदे दर्शन कर। 
सब जन गाओ जय नर्मदे!, जय नर्मदे! एक स्वर॥
 
अमरकंठ से निकली, तेरी महिमा अपरंपार
सहज-सरल ममता की मूरत तू वरदानी। 
हे माँ नर्मदे! अमृत है तेरा निर्मल पानी॥
 
मोक्षप्रदायिनी सबकी बिगड़ी बनाने वाली। 
माँ नर्मदे पापनाशिनी धर्म की रक्षा करने वाली॥

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