जादूगर मोबाइल
वीरेन्द्र बहादुर सिंह
एक था राजू। वह शहर में रहता था। राजू की दादी उसे रोज़ नई-नई कहानियाँ सुनाया करती थीं। उन कहानियों में जादूगर और जादुई छड़ी की कथाएँ भी होती थीं।
राजू सोचता कि काश, मैं भी जादूगर होता तो छड़ी घुमाता और मेरा ‘लेसन’ हो जाता। छड़ी घुमाता और मज़ेदार खाना आ जाता। तभी राजू की मम्मी गरमागरम नाश्ता लेकर आ गईं। राजू बोला, “बहुत यम्मी है। यह आपको किसने सिखाया?”
मम्मी ने हँसते हुए मोबाइल दिखाया। राजू आश्चर्य से बोला, “मोबाइल से?”
मम्मी बोलीं, “हाँ, मोबाइल तो मेरा जादूगर है।”
राजू बोला, “जादूगर? पर मोबाइल से तो बस बातें होती हैं न?”
मम्मी ने कहा, “अब के स्मार्टफोन तो जादूगर जैसे हैं। उनमें अनगिनत ख़ज़ाना भरा है। जो चाहो, वह हाज़िर। मोबाइल में देखा जा सकता है, पढ़ा जा सकता है। रसोई, कढ़ाई-बुनाई, जोड़, स्पेलिंग सब कुछ सीखा जा सकता है। बैंक के काम, टिकट बुकिंग, सब घर बैठे हो जाता है। ऑर्डर करो, चीज़ हाज़िर।”
राजू बोला, “मम्मी, तुम्हारा मोबाइल तो बड़ा ज़बरदस्त जादूगर है। बिलकुल वैसा ही, जैसा दादी कहानियों में बताती हैं कि जो माँगो, वही मिल जाए।”
मम्मी ने राजू को मोबाइल इस्तेमाल करना सिखाया और कहा:
“मोबाइल में है एक पिटारा,
उसमें भरा है ज्ञान का ख़ज़ाना,
जो मोबाइल एक बार अपनाए,
वह उसका दीवाना बन जाए।”
साथ ही मम्मी ने चेतावनी भी दी कि इस जादूगर का जादू सिर्फ़ आधा घंटा ही चलता है।
राजू बोला, “ज्यादा इस्तेमाल करें तो?”
मम्मी ने कहा, “तो जादूगर को ग़ुस्सा आ जाता है। आँखें थका देता है, सिर में दर्द कर देता है।”
राजू बोला, “ओ बाप रे, यह जादूगर तो बड़ा ग़ुस्सैल है। मम्मी, जादूगर से कहना कि मुझे कहानी सुनाए।”
मम्मी ने राजू को एक मंत्र सिखाया:
“मोबाइल तू खुल जा,
ज्ञान अपना देता जा।
कलबल काबर की कहानी,
मुझे सुनाता जा।”
यह सुनते ही मोबाइल मधुर आवाज़ में काबर की कहानी सुनाने लगा।
राजू को सुनने में बहुत मज़ा आया।
फिर तो राजू बारीबारी से अलग-अलग चीज़ें माँगने लगा।
वह बोलता:
“मोबाइल तू खुल जा,
ज्ञान अपना देता जा।
मैं बोलूँ जो शब्द सारे,
उनके स्पेलिंग बताता जा।”
तुरंत मोबाइल सही-सही स्पेलिंग बताने लगा। फिर बच्चों के गीत, कार्टून, खेल, पहेलियाँ . . . राजू बोलता जाता और मोबाइल दिखाता जाता।
एक दिन राजू दादा-दादी के कमरे में ‘लेसन’ कर रहा था। दादी ने दादा से कहा, “सोसाइटी के सब लोग यात्रा पर जा रहे हैं। मेरे पैर दुखते हैं, तो हम कैसे जाएँ?”
यह सुनकर राजू दौड़कर मम्मी का मोबाइल ले आया। बोला, “दादा-दादी, आप मुझे जादूगर की कहानियाँ सुनाते हैं न? आज मैं सच में जादूगर लेकर आया हूँ। यह आपको यात्रा कराएगा। बताइए, कहाँ जाना है?”
दादी बोलीं, “सोमनाथ।”
दादा बोले, “द्वारका।”
राजू बोला, “झगड़ा नहीं।
मैं आप दोनों को दर्शन कराऊँगा।”
यह कहकर राजू ने मंत्र बोला:
“मोबाइल तू खुल जा,
ज्ञान अपना देता जा।
सोमनाथ और द्वारका,
दादा-दादी को दिखाता जा।”
तुरंत मोबाइल पर सोमनाथ और द्वारका की आरती दिखाई देने लगी।
दादा-दादी ने हाथ जोड़ लिए।
दोनों ने घर बैठे आरती और दर्शन कर लिए। दादा-दादी बोले, “तुम्हारा जादूगर तो कमाल का है। यह तो घर बैठे गंगास्नान जैसा है।”
फिर राजू ने उन्हें भजन, श्लोक सुनाए। देश-विदेश के प्रसिद्ध स्थान दिखाए। दादा-दादी को पूरी दुनिया की सैर करा दी। उसके बाद राजू ने कहा, “आज के लिए बस इतना ही।”
और मोबाइल रख दिया।
फिर बोला, “ज्यादा इस्तेमाल करेंगे तो जादूगर नाराज़ हो जाएगा।”
दादा-दादी अपने पोते की भोली समझदारी पर निहाल हो गए।
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