इंसानों को सीमाएँ रोकती हैं, भूतों को नहीं
वीरेन्द्र बहादुर सिंह
दुनिया भर में हैलोवीन के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय भूत मंच का प्रस्ताव
दुनिया के एक ख़ूबसूरत समुद्र तट पर, जहाँ सुनहरी रेत और नीला पारदर्शी समुद्र था, कई भूतों की अंतरराष्ट्रीय बैठक चल रही थी।
भारतीय भूत: वाह! क्या शानदार जगह है। हमारी हारर फ़िल्मों में तो हमेशा वही पुराने ‘क्लिशे’ होते हैं, अँधेरा, सुनसान, डरावनी गुफाएँ और उनमें घूमते भूत। ऐसे बीच पर मस्ती करने का मौक़ा तो हमें फ़िल्मों में कभी नहीं मिलता।
मैक्सिकन भूत: मैंने एक बार तुम्हारी हारर फ़िल्म सबटाइटल्स के साथ देखी थी। मुझे तो बहुत मज़ेदार लगी थी!
कोरियन भूत: मूर्ख! वह तो भारतीय मानकों के हिसाब से हारर फ़िल्म रही होगी, लेकिन उसका ट्रांसलेशन शायद किसी एआई से हुआ होगा, इसलिए तुम्हें वह कॉमेडी लगी। हमारी फ़िल्मों को भी भारतीय लोग उल्टा समझते हैं और फिर उन्हें अपनाकर कचरा बना देते हैं।
जापानी भूत: अरे भाई, फ़िल्मों जैसी बेकार बातों में समय मत गँवाओ। हम जापानी तो भूत बनने के बाद भी एक सेकंड भी व्यर्थ नहीं करते।
अमेरिकी भूत: मेरे जैसे राष्ट्रपति के आने से पहले ही तुम सब गपशप में लग गए, तभी तो इतनी गड़बड़ियाँ होती हैं। देखो, हमारे परलोक के भी हम ही ज़मींदार हैं। अभी हैलोवीन का समय है, पितरों और मृत आत्माओं को याद करने का पर्व, जो एक साथ कई देशों में मनाया जाता है। इसीलिए मैंने सोचा कि भूतों का भी एक अंतरराष्ट्रीय मंच बनाया जाए।
चीनी भूत: ओ परलोक के ज़मींदार, अगर हमें तुम्हारे मंच से नहीं जुड़ना हो तो? मैं तो अपना अलग समूह बनाऊँगा। अंतरराष्ट्रीय एकता के नाम पर तुम भूतों का भी वर्चस्व जमाना चाहते हो! याद रखो, नोबेल शान्ति पुरस्कार के लालच में कुछ लोग तो ज़िन्दा रहते हुए ही भूत बन कर भटकते हैं। बाक़ी, जो आत्मा मरने के बाद भी शान्ति नहीं चाहती, वही भूत समाज में आती है। इसलिए यहाँ ज़्यादा दादागीरी मत करना, सब अपनी-अपनी हद में रहें।
अमेरिकी भूत: जो भूत मेरे मंच में नहीं जुड़ेंगे, उन्हें हमारे देश आने का वीसा नहीं मिलेगा! और अगर वे हमारी सीमा में पकड़े गए तो देश निकाला कर दिया जाएगा!
भारतीय भूत: डियर, शांत हो जा। सीमाएँ तो सिर्फ़ इंसानों को रोकती हैं, हम भूतों को नहीं। इंसानों जैसे झगड़े मत कर। हमारे देश के कई लोग तुम्हारे यहाँ वैसे भी बिना अनुमति घुस कर भूत जैसी डरावनी ज़िन्दगी जीते हैं। उससे तो भूत के रूप में यह ज़िन्दगी कहीं ज़्यादा आज़ाद है।
यह सुन कर चीनी और मैक्सिकन भूत ठहाका मार कर हँस पड़े, जापानी भूत ने पान चबाया और अमेरिकी भूत ग़ुस्से में उठ कर चला गया।
भारत में हर पाँच साल में हैलोवीन आता है, जिसमें तरह-तरह के वेशभूषा में लोग माइक के सामने अजीब-अजीब भाषाओं में बातें करते हैं। लोकभाषा में उन्हें ‘नेता’ कहा जाता है।
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