अब नेता जनता को महँगाई के समर्थन में झूमने पर मजबूर कर रहे हैं
वीरेन्द्र बहादुर सिंह
एक बाबा ने नेताजी को फोन किया, “मेरे कार्यक्रम में बहुत सारे लोग झूमते हैं। मैं बड़ा अद्भुत वशीकरण करता हूँ। अपने वशीकरण से मैं लोगों से आपको वोट भी दिलवा सकता हूँ। संक्षेप में कहूँ तो मैं आपके बहुत काम का आदमी हूँ।”
नेताजी हँसते हुए बोले, “अच्छा? यदि आपको अपने चमत्कारों पर इतना अभिमान है तो हमारे दरबार में आ जाइए। तब आपको पता चलेगा कि असली चमत्कार किसे कहते हैं।”
बाबाजी चकित रह गए। बोले, “महाराज, दरबार तो हम लगाते हैं। क्या आपने हमारा काम भी छीन लिया?”
नेताजी फिर हँसते हुए बोले, “पुराने समय में राजा दरबार लगाते थे। अब लोकतंत्र है और हम नए राजा हैं, इसलिए दरबार भी हम ही लगाते हैं। हालाँकि हमारा दरबार आम नहीं, बल्कि ख़ास लोगों का होता है।”
बाबाजी उलझ गए। बोले, “मतलब? आप इतनी कठिन भाषा बोलते हैं कि मुझे समझ ही नहीं पड़ती।”
नेताजी बोले, “अरे भले आदमी, ख़ास मतलब वीआईपी और वीवीआईपी। लोकतंत्र में हमारे दरबार केवल वीवीआईपी लोगों के लिए ही होते हैं।”
बाबा समझ गए कि नेता स्वयं को वीवीआईपी का सम्मान दे रहे हैं। इसलिए उन्होंने अपने सभी सत्संग रद्द कर दिए और नेताओं की संगति करने पहुँच गए। वहाँ जाकर देखा तो उनके जैसे आधा दर्जन बाबा पहले से मौजूद थे।
बाबाजी हैरान रह गए। नेताजी ने उनका स्वागत करते हुए कहा, “बैठिए। आपके जैसे ये सभी बाबा भी अपने भक्तों को भ्रमित करने और वशीकरण की ट्रेनिंग लेने हमारे पास आए हैं।”
बाबा का दिमाग़ चकरा गया। बोले, “भक्तों को? आप हमारे भक्तों को भ्रमित करेंगे?”
नेताजी ने उनके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, “अरे बाबाजी, आप बहुत भोले हैं। भक्तों के मामले में हम आत्मनिर्भर हैं। हमें आपके भक्तों की कोई आवश्यकता नहीं है। आज के आधुनिक युग में आपके जैसे बाबाओं की तुलना में हमारे जैसे नेताओं के भक्त कई गुना अधिक हैं। हम उन्हें वर्षों से हर चुनाव में भ्रमित करते आए हैं। हम ऐसा ज़बरदस्त वशीकरण करते हैं कि हमारी ग़लतियाँ भी उन्हें उपलब्धियों जैसी दिखाई देती हैं। लोकतंत्र में मतदाता शेर होते हैं, लेकिन हमने अपने वशीकरण से उन्हें भेड़ों जैसा बना दिया है। जो लोग हमारी आलोचना करते हैं, वे उन्हें देशद्रोही दिखाई देते हैं।
“फ़्लाईओवर टूट जाएँ, दूषित पानी से लोग मर जाएँ, सार्वजनिक परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हो जाएँ, तब भी भक्त जनता को हमारी कोई ग़लती दिखाई नहीं देती। एक समय था, जब लोग महँगाई के ख़िलाफ़ आंदोलन करते थे। लेकिन हमारे वशीकरण का चमत्कार देखिए कि अब इतनी महँगाई बढ़ रही है, फिर भी लोग महँगाई के समर्थन में झूम रहे हैं।”
यह सुनकर स्वयं बाबा भी नेताजी के दरबार में झूमने लगे।
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