मृत्यु का इंतज़ार
वीरेन्द्र बहादुर सिंह
मृत्यु का इंतज़ार
क्या यह भय है या कोई गहरी शान्ति?
क्या यह अंत का अंधकार है,
या अनंत की पहली कांति?
जीवन की भीड़ में चलते-चलते
एक दिन यह विचार आता है,
कि जिस राह पर सब चल रहे हैं,
वहाँ अंत में क्या रह जाता है?
हम जन्म के उत्सव में खोकर
मृत्यु को भूल जाते हैं,
पर हर साँस के पीछे छुपे
उस साए को नहीं पहचान पाते हैं।
मृत्यु का इंतज़ार कोई
हर पल करता तो नहीं,
पर कहीं भीतर एक सन्नाटा
इस सत्य को नकारता भी नहीं।
कुछ लोग इसे डर से देखते,
कुछ इसे विश्राम समझते हैं,
कुछ के लिए यह मुक्ति का द्वार,
कुछ इसे अंधकार समझते हैं।
जो थक गए हैं जीवन से,
उनके लिए यह एक ठहराव है,
जो उलझे हैं अपने ही जाल में,
उनके लिए यह एक बहाव है।
मृत्यु का इंतज़ार कभी-कभी
जीवन से भागना भी होता है,
पर कई बार यह एक गहरा
स्वीकार करना भी होता है।
जब मन सारे उत्तर खोजकर
ख़ुद ही प्रश्न बन जाता है,
तब मृत्यु का विचार कहीं
एक समाधान बन जाता है।
पर क्या सच में मृत्यु
हर पीड़ा को हर लेती है?
या यह सिर्फ़ एक नया प्रश्न
हमारे सामने रख देती है?
जीवन एक अधूरी कहानी है,
जिसे हम पूरा मान लेते हैं,
और मृत्यु उस आख़िरी पंक्ति को
बिना पढ़े ही जान लेते हैं।
इंतज़ार
यह शब्द ही कितना भारी है,
यह समय को भी थाम लेता है,
और आत्मा को भी उतारता है।
जो मृत्यु का इंतज़ार करते हैं,
वो शायद जीवन को गहराई से देखते हैं,
हर पल को आख़िरी समझकर
उसमें अनंत को खोजते हैं।
मृत्यु एक दर्पण है,
जो हमें हमारा सत्य दिखाती है,
हमारी सारी इच्छाओं को
एक बिंदु में सिमटा देती है।
वह कहती है
जो कुछ भी है, यहीं है, अभी है,
जो बीत गया, वह सपना है,
जो आने वाला है, वह अभी नहीं है।
तो क्या मृत्यु का इंतज़ार करना
वास्तव में जीवन को समझना है?
या यह बस एक भ्रम है
जो मन को बहलाना है?
शायद उत्तर इन दोनों के बीच है
ना पूरी स्वीकृति, ना पूरी अस्वीकृति,
बस एक शांत प्रतीक्षा
जो बिना शब्दों के होती है स्पष्ट।
मृत्यु का इंतज़ार तब सुंदर है
जब वह डर से नहीं, समझ से आए,
जब वह अंत नहीं, परिवर्तन लगे
और आत्मा को विस्तार दिलाए।
तब जीवन एक यात्रा बन जाता है,
जहाँ हर मोड़ पर एक सीख है,
और मृत्यु उस यात्रा का
सबसे गहरा संगीत है।
तो मत डरो उस क्षण से
जो एक दिन निश्चित आएगा,
बल्कि जी लो हर उस पल को
जो अभी तुम्हें बुलाएगा।
क्योंकि जो जीवन को पूरी तरह जीता है,
वह मृत्यु का इंतज़ार नहीं करता,
वह उसे एक पुराने मित्र की तरह
शांत हृदय से स्वीकार करता।
और अंत में
मृत्यु का इंतज़ार नहीं,
जीवन का अनुभव ही सत्य है,
क्योंकि जो इस क्षण को जी ले,
उसके लिए मृत्यु भी एक मधुर रहस्य है।
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