साथी

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा (अंक: 292, जनवरी द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

साथी फूँक-फूँक कर क़दम बढ़ाना, 
मन से मन चंचल न मिलाना। 
जब तक न जागे पूर्ण विश्वास-
हृदय से हृदय नहीं मिलाना॥
 
नित झूठ-कपट-छल का बढ़ना, 
मुश्किल हुआ जारहा जग में रहना। 
आताताई-आतंकी रक्तबीज बन रहे-
कोई बताए, कैसे है इनसे बचना॥
 
साथी सदा सचेत-सावधान रहना, 
स्वयं जाग औरों को जगाते रहना। 
चक्रव्यूह नित नये-नये रच रहे-
तुम वीर अभिमन्यु बन जाना॥
 
साथी फूँक-फूँक कर क़दम बढ़ाना, 
हिंसा के काले कर्म न करना। 
भय मत बसने देना अपने हृदय-
वीर-धीर तुम बलवान बनना॥

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