होगा क्या अंजाम

01-03-2025

होगा क्या अंजाम

डॉ. सत्यवान सौरभ (अंक: 272, मार्च प्रथम, 2025 में प्रकाशित)

 

उनकी कर तू साधना, अर्पण कर मन-फूल। 
खड़े रहे जो साथ जब, समय रहा प्रतिकूल॥
 
जंगल रोया फूटकर, देख जड़ों में आग। 
उसकी ही लकड़ी बनी, माचिस से निरभाग॥
 
कह दें कैसे हम भला, औरत को कमज़ोर। 
मर्दाना कमज़ोर जब, लिखा हुआ हर ओर॥
 
कलियुग के इस दौर का, होगा क्या अंजाम। 
जर ज़मीं जोरू करें, रिश्ते क़त्लेआम॥
 
बुरे हुए तो क्या हुआ, करके अच्छे काम। 
मन में फिर भी आस है, भली करेंगे राम॥
 
प्रयत्न हज़ारों कीजिए, फूँको कितनी जान। 
चिकनी मिट्टी के घड़े, रहते एक समान॥
 
बात करें जो दोहरी, कर्म करें संगीन। 
होती है अब ज़िन्दगी, उनकी ही रंगीन॥
 
जीते जी ख़ुद झेलनी, फँसी गले में फाँस। 
देता कंधा कौन है, जब तक चलती साँस॥

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