मेरे प्यारे पापा

15-03-2026

मेरे प्यारे पापा

डॉ. सत्यवान सौरभ (अंक: 294, मार्च द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

पापा की गोदी गर्म-गर्म, 
जैसे धूप सुहानी। 
बैठा हूँ मैं चिपक के उनसे, 
दुनिया लगे कहानी। 
 
छोटी बोतल हाथ में मेरी, 
घूँट-घूँट मुझे पिलाते। 
पापा हँसकर देख रहे हैं, 
मुझ पर प्यार लुटाते। 
 
पापा संग जब खेलूँ मैं, 
दिल मेरा खिल जाता। 
उनकी गोदी, उनका कंधा, 
सबसे प्यारा लगता। 
 
मेरे पापा सबसे अच्छे, 
मुझको ख़ूब हँसाते। 
छोटा हूँ मैं, बड़ा बनूँगा, 
उन जैसा बन जाऊँगा। 
 
पापा की गोदी प्यारी है, 
मुझको सबसे न्यारी है। 
पापा मेरे सबसे अच्छे हैं, 
दुनिया में सबसे सच्चे हैं। 

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