भोलू का सपना

15-06-2026

भोलू का सपना

वीरेन्द्र बहादुर सिंह  (अंक: 299, जून द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

भोलू को सपने देखने की आदत थी। वह रात में तो सपने देखता ही था, लेकिन कभी-कभी दिन में भी सपने देखने लगता था। भोलू को उसके दादाजी तरह-तरह की कहानियाँ सुनाते रहते थे, जादुई नगरी की, परियों की, राजा की और जादुई चिराग़ की। भोलू को ये सारी कहानियाँ बहुत पसंद थीं।

एक दिन रात को घर के बाहर खटिया बिछाकर भोलू और उसके दादाजी सो रहे थे। भोलू आकाश के तारों के बारे में दादाजी से पूछने लगा। भोलू ने दादा से कहा, “मैं एक दिन इन तारों के पास जाना चाहता हूँ।”

दादाजी ने कहा, “बेटा, वहाँ जाना बहुत कठिन है।” फिर दादाजी ने टूटते तारे के बारे में बताया, “ऐसा कहा जाता है कि उसकी ओर आँख बंद कर के जो चीज़ माँगी जाए, वह पूरी हो जाती है।”

भोलू ने पूछा, “दादाजी, क्या मैं राकेट में बैठकर तारों तक नहीं जा सकता?”

दादाजी ने कहा, “बेटा, वहाँ जाना बहुत मुश्किल है।”

उस रात भोलू ने सपना देखा कि वह राकेट में बैठकर सारे तारों को देखने गया है। उसने टूटते तारे से प्रार्थना की कि उसके सारे सपने पूरे हो जाएँ। सुबह उठकर उसने दादाजी को अपने सपने की बात बताई।

भोलू के पिताजी एक कारख़ाने में मज़दूरी करते थे। उसकी माँ बँगले में काम करने जाती थी। इस तरह भोलू का परिवार चलता था। उसका परिवार बहुत ग़रीब था। एक दिन भोलू अपनी माँ के साथ मालिकिन के बँगले पर गया। उस दिन उनके बेटे पिंटू का जन्मदिन था। भोलू की माँ वहाँ काम करती थी, इसलिए उसे भी जन्मदिन में आने के लिए कहा गया था। मालिकिन के बेटे ने नए कपड़े पहने थे। सब लोग उसके लिए बहुत सारे उपहार ले कर आ रहे थे। बड़ा केक, तरह-तरह की चॉकलेट और आइसक्रीम देखकर भोलू को लगा कि उसका जन्मदिन तो कभी मनाया ही नहीं गया। अगर उसका भी जन्मदिन मनाया जाए तो कितना मज़ा आए।

उस रात भोलू ने सपना देखा कि वह एक किसी जादुई नगरी में पहुँच गया था। उसका घर किसी बड़े महल जैसा था। महल के पास बड़ा-सा बग़ीचा था। वहाँ सब उसके जन्मदिन की तैयारी कर रहे थे। उसके लिए मम्मी-पापा बहुत सारे नए कपड़े और केक लेकर आए थे। बग़ीचे में चारों तरफ़ तरह-तरह की चॉकलेट के पेड़ थे। अलग-अलग रंगों की आइसक्रीम के पहाड़ थे। उसके लिए सारे मेहमान सुंदर उपहार लेकर आए थे।

सुबह होते ही माँ ने भोलू को जगा दिया। उसका सपना अधूरा रह गया। भोलू ने माँ से ज़िद की, “मुझे भी जन्मदिन मनाना है।”

कुछ दिनों बाद भोलू का जन्मदिन आया। बँगले वालों से वेतन के पैसे पहले लेकर भोलू की माँ ने जन्मदिन मनाने का निश्चय किया। भोलू के लिए नए कपड़े और चॉकलेट ख़रीदी। भोलू को तो केक खाना था। उसकी माँ ने उसे समझाया, “हम इतना महँगा केक नहीं ला सकते।”

भोलू की माँ उसे समझा ही रही थी कि तभी उसकी बँगले वाली मालिकिन पिंटू और उसके दोस्तों को लेकर वहाँ आईं। वे भोलू के लिए बड़ा केक, नए कपड़े, तरह-तरह की चॉकलेट, आइसक्रीम और सबके लिए नाश्ता लेकर आई थीं। पिंटू और उसके दोस्तों ने भोलू के लिए बहुत सारे उपहार लाए। भोलू बहुत ख़ुश हुआ। वह दौड़कर दादाजी के पास गया और उन्हें सारे उपहार दिखाए। उसने दादाजी के पैर छूकर कहा, “टूटते तारे ने मेरी इच्छा पूरी कर दी। जन्मदिन मनाने का मेरा सपना आज सच हो गया।”

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