प्यार हर किसी से नहीं होता

01-06-2026

प्यार हर किसी से नहीं होता

वीरेन्द्र बहादुर सिंह  (अंक: 298, जून प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

प्यार हर किसी से नहीं होता, 
ये दिल यूँ ही किसी पर फ़िदा नहीं होता। 
हज़ारों चेहरे मिलते हैं राहों में मगर, 
हर चेहरा ज़िन्दगी का ख़ुदा नहीं होता। 
 
कुछ लोग बस मौसम की तरह आते हैं, 
थोड़ी देर ठहरते हैं, चले जाते हैं। 
पर कोई एक होता है दुनिया में ऐसा, 
जो रूह में उतरकर घर बना जाता है। 
 
प्यार शब्द नहीं, एक साधना होती है, 
आँखों में चुपचाप जलती प्रार्थना होती है। 
जिसे निभाने में उम्रें गुज़र जाया करती हैं, 
और लोग समझते हैं कि बस चाहत होती है। 
 
हर मुस्कान के पीछे मोहब्बत नहीं होती, 
हर नज़दीकी में राहत नहीं होती। 
कुछ रिश्ते भीड़ में खो जाते हैं यूँ ही, 
हर हाथ में क़िस्मत की लकीर नहीं होती। 
 
जिसे देखकर दिल को सुकून मिल जाए, 
जिसकी ख़ामोशी भी गीत बन जाए। 
जिसके दुख में अपनी साँसें भारी लगें, 
वही प्यार है, जो इबादत बन जाए। 
 
प्यार हर किसी से नहीं होता, 
ये नसीब वालों की कहानी होता है। 
जिसे मिल जाए सच्चा हमसफ़र, 
उसका जीवन ही कविता हो जाता है। 

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