जंगल में सर्वाधिक कमाई करने वाले मंत्री हाथी हरखपदूड़ा का भाषण
वीरेन्द्र बहादुर सिंह
महाराजा सिंह की सरकार में परिवहन मंत्रालय सँभालने वाले हाथीभाई सबसे अधिक कमाई करने वाले मंत्री बन गए। यह उपलब्धि हासिल करने के बाद ख़ुशी से फूले न समाते हाथीभाई ने सिंह की शैली में लाइव संबोधन किया . . .
हाथी हरखपदूड़ा जंगल की सरकार में सड़क और परिवहन मंत्रालय सँभालते थे। महाराजा सिंह स्वयं हाथीभाई से बचकर रहते थे, तो दूसरे मंत्री आख़िर हाथीभाई के सामने टिकते ही कैसे। हाथीभाई का जंगल की सरकार में अलग ही दबदबा था। हाथीभाई चाहें तो विपक्ष की तारीफ़ कर दें, हाथीभाई चाहें तो सिंह सरकार की आलोचना भी कर सकते थे। हाथीभाई जैसा कोई कर ही नहीं सकता था। हाथीभाई पर संस्कारी पाठशाला के संस्थापक और सिंह, रीछ सहित सभी नेताओं के गुरु बगुलाजी का पूरा हाथ था। हाथीभाई को जब ग़ुस्सा आता, तब अगर पैर सूँड़ में आ जाए तो बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है, यह बात महाराजा सिंह भी अच्छी तरह समझते थे।
बाक़ी सभी दरबारी तो महाराजा सिंह से पूछकर पानी पीते थे, जबकि हाथीभाई सड़क पर चलने के कड़े टैक्स लगा देते थे और इसकी ख़बर भी महाराजा सिंह को ‘जंगल न्यूज़’ देखकर पड़ती थी। ऐसे हाथीभाई को सड़क और परिवहन मंत्रालय सौंपकर महाराजा सिंह और उनके निजी सलाहकार रीछभाई किसी भी प्रकार की माथापच्ची में नहीं पड़ते थे।
हाथीभाई ने अपनी उपलब्धियाँ गिनाने के लिए ऑनलाइन भाषण शुरू किया, जिसे असंख्य जंगलवासियों के अलावा राजा सिंह, रीछभाई समेत सभी नेता लाइव सुन रहे थे। हाथीभाई ने भाषण शुरू किया, “वंदे जंगलम्, आप सभी ने मेरे मंत्रालय को भरपूर डोनेशन दिया, इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। महाराजा सिंह ने जब सभी मंत्रियों को कमाई का लक्ष्य दिया था, तब सबसे कम समय में सबसे अधिक कमाई करके दिखाने का वादा मैंने किया था। आप सभी के सहयोग से मैं यह काम बहुत अच्छे से कर पाया। आप सभी जंगल में ट्रैफ़िक नियम न तोड़ने के बजाय उन्हें तोड़ने का इतना उज्ज्वल रिकार्ड बनाए रखते हैं, इसलिए मेरी कमाई का रिकॉर्ड भी उज्ज्वल बना रहा। आप सभी का एक बार फिर बहुत-बहुत धन्यवाद।”
सूँड़ को दो-चार बार ऊपर-नीचे करने के बाद हाथीभाई आगे बोले, “दोस्तों, जिन जंगलों में चुनाव चल रहे होते हैं या जहाँ चुनाव होने वाले होते हैं, वहाँ राजा सिंह जुर्माने से छूट दे देते हैं। इससे मेरे धंधे को झटका लगता है, लेकिन दूसरे जंगलों से वह रक़म वसूल की जा सके, इसके लिए मैंने सभी प्रयास शुरू कर दिए हैं। मैं जंगल के ख़जाने में धन की कमी बिलकुल नहीं होने दूँगा। वंदे जंगलम्, जंगलमाता की जय। आप जो यह जुर्माना भरते हैं, वह वास्तव में जंगलभक्ति ही है।”
हाथीभाई ने गहरी साँस ली, फिर छोड़ी। पूँछ से पीठ खुजलाते हुए भाषण आगे बढ़ाया, “कुछ जंगलवासी यह दलील करते हैं कि सड़कें अच्छी नहीं हैं, ट्रैफ़िक सिगनल ठीक से काम नहीं करते, सड़क के बीचों-बीच बड़े-बड़े गड्ढे पड़ गए हैं। नदियों-नालों पर बने पुल जर्जर हो चुके हैं, फिर भी उनकी मरम्मत नहीं होती। पुल के दोनों ओर कोई रेलिंग नहीं होने से जानवर रात के अँधेरे में दुर्घटनावश नदी में गिरकर जान गँवा देते हैं। छोटी सड़कों को चौड़ा नहीं किया जाता, लेकिन ऐसी बातें पूरी तरह निराधार हैं। एक बात ध्यान से समझिए मेरे प्यारे जंगलवासियों, आपसे जो टैक्स लिया जा रहा है, वह तो केवल सड़क पर चलने या वाहन चलाने का टैक्स है। जुर्माना तो आप सब अपनी ग़लतियों की वजह से भरते हैं। वह जुर्माने की रक़म तो जंगल सरकार का बोनस है। महाराजा सिंह और मेरे सहित सभी मंत्रियों का ख़र्च उसी से निकलता है।”
हाथीभाई ने थोड़ी देर रुककर भाषण समाप्त करते हुए कहा, “अगर आपको ऐसी सारी सुविधाएँ चाहिए, तो ज़्यादा टैक्स भरना पड़ेगा। उसी टैक्स से सड़कें अच्छी होगी, पुल अच्छे बनेंगे, नए ट्रैफ़िक सिगनल लगाए जाएँगे, गड्ढे भरे जाएँगे, सड़कों पर भर जाने वाले पानी की निकासी होगी। आप कहें तो मैं नया टैक्स शुरू कर दूँ? क्या आपको सचमुच ऐसी सारी सुविधाएँ चाहिए? क्या आप हमारे इस महान जंगल की ऐतिहासिक परंपरा के लिए इतना भी सहन नहीं कर सकते? इस विषय में मुझे पूरे जंगल का समर्थन प्राप्त है। सड़क दुर्घटनाएँ रोकने और ट्रैफ़िक नियमों का उल्लंघन रुकवाने के लिए जो जुर्माना मैं वसूलता हूँ, वह जंगल की परंपरा के लिए आवश्यक है। महाराजा सिंह के सपने के अनुसार मुझे सड़कें बनानी हैं। सड़कों पर केवल मिट्टी ही होनी चाहिए। उन पर सीमेंट-डामर जैसे पदार्थ चिपकाकर हमारे जंगल की महान परंपरा को तोड़ा गया था। हमारे पूर्वज कच्ची सड़कों पर चलते थे। मैं उसी परंपरा को बनाए रखना चाहता हूँ। वंदे जंगलम्, जंगलमाता की जय।”
महाराजा सिंह हाथी हरखपदूड़ा के भाषण से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने भाषण की लिंक सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा, “जंगल सरकार के सभी मंत्रियों को हाथी हरखपदूड़ा की कार्यशैली से प्रेरणा लेनी चाहिए। वंदे जंगलम्, जंगलमाता की जय।”
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