सूरज दादा 

डॉ. उषा रानी बंसल (अंक: 299, जून द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

सूरज दादा, सूरज दादा 
क्या आपको पता नहीं है?
गरमी की छुट्टियाँ हो गईं 
स्कूलों पर ताले लग गये, 
जगने की इतनी जल्दी क्या है? 
ख़ुद जगते, हमें न सोने देते, 
नींद नहीं आती है तुमको? 
चार गोली नींद की खा लो 
ज़रा देर तक तुम भी सो लो 
हमको भी तुम सोने दो। 

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