उपेक्षा 

15-11-2020

उपेक्षा 

राजनन्दन सिंह

अपनों की उपेक्षा में
फिर भी रहती है 
एक उम्मीद
शिकायत
उलाहने 
दावे
और अधिकारों का
कुछ न कुछ
अवशेष 
मगर 
अपने समाज से बाहर
गैर समाजियों की 
उपेक्षा में कभी भी नहीं होती
कहीं किसी मानवता का लेश
होता है तो सिर्फ़
दग्ध करनेवाला 
प्रत्युत्तर विहीन मौन रोष
विवशता
अपमान
घृणा और 
एक कटु ज़हर
विशेष

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